Monday, February 16, 2026
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Basant Panchami: कब है वसंत पंचमी? जानिए विशेष पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और नियम

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली वसंत पंचमी न केवल ऋतुराज बसंत के स्वागत का पर्व है, बल्कि यह दिन ज्ञान, कला और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा का भी विशेष दिन है। खासकर विद्यार्थियों और बच्चों के लिए यह पर्व अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन विद्यारंभ, लेखन और शिक्षा से जुड़े संस्कार किए जाते हैं।

वसंत पंचमी कब है?

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वसंत पंचमी की तिथि 23 जनवरी को सुबह 2:28 बजे से शुरू होकर 24 जनवरी 2026 को सुबह 1:46 बजे तक रहेगी। चूंकि उदया तिथि (जिसे मान्यता प्राप्त होती है) 23 जनवरी को है, इसलिए वसंत पंचमी का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।

शुभ मुहूर्त

वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा। इस समय में पूजा करने से विद्यार्थियों को विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है, और कार्यों में सफलता की प्राप्ति होती है।

वसंत पंचमी का धार्मिक महत्व

वसंत पंचमी केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, संगीत, कला, संस्कृति और प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक पर्व है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जिन्हें विद्या, बुद्धि, वाणी और विवेक की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इस कारण इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है।

सांस्कृतिक महत्व

सांस्कृतिक दृष्टि से वसंत पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल खिलने लगते हैं, जो समृद्धि और खुशहाली के प्रतीक माने जाते हैं। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, जिसे ऊर्जा, ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

वसंत पंचमी की पूजा विधि

स्नान और वस्त्र: वसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें।

मां सरस्वती की पूजा: पूजा के लिए घर के साफ स्थान या ईशान कोण में मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

पुजन सामग्री: मां को पीले फूल, पीला चंदन, अक्षत, दूर्वा, फल और मिठाई अर्पित करें। विशेष रूप से पीले चावल, केसर युक्त खीर या बूंदी का भोग शुभ माना जाता है।

विद्यार्थियों की पूजा: विद्यार्थी अपनी किताबें, कॉपी और कलम मां के चरणों में रखें। संगीत, कला और लेखन से जुड़े लोग अपने वाद्य यंत्रों और उपकरणों की पूजा करें।

मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप 108 बार करें।

आरती और प्रसाद: पूजा के बाद मां सरस्वती की आरती करें और प्रसाद भक्तों में वितरित करें।

वसंत पंचमी पर क्या करें

पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनें, क्योंकि पीला रंग शुभ और सकारात्मक माना जाता है।

सात्विक और हल्का भोजन खाएं, जैसे खीर, फल या घर का बना शुद्ध भोजन।

विद्या, लेखन, संगीत या चित्रकला जैसी विधाओं से जुड़े अभ्यास करें।

मां सरस्वती की पूजा करके ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति की कामना करें।

वसंत पंचमी पर क्या न करें

क्रोध करने या कठोर शब्द बोलने से बचें, वाणी में मधुरता बनाए रखें।

मांसाहार, शराब या तामसिक भोजन से बचें।

आलस्य, नकारात्मक विचार और समय की बर्बादी से दूर रहें।

विद्या और संस्कार के विपरीत आचरण से बचें।

इस दिन श्रद्धा और सही विधि से पूजा करने से मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में ज्ञान, बुद्धि और सफलता का वास होता है।

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