Sunday, January 23, 2022
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लापरवाही का संक्रमण: ओमिक्रॉन से नहीं है खौफ

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ओमिक्रॉन का खौफ क्रांतिधरा पर नहीं दिखता। बाजारों में इस कदर भीड़ हैं, जिसे जनवाणी के फोटो जर्नलिस्ट ने कैमरे में कैद कर लिया। खौफ होता तो शायद इतनी भीड़ बाजारों में नहीं होती। मास्क भी नहीं। मेरठ से 53 किमी की दूरी पर दिल्ली हैं, जहां 24 मरीजों में ओमिक्रॉन की पुष्टि हो चुकी हैं, फिर भी कहीं कोई खौफ नहीं है। लालकुर्ती पैंठ बेहद व्यस्तम बाजार हैं, जहां लोग नहीं समझ रहे हैं कि ओमिक्रॉन कितना खतरनाक हैं। शहर में इसकी एंट्री हुई तो लोगों के लिए बड़ी दिक्कत खड़ी हो जाएगी। फिर भी लोग समझने को तैयार नहीं है। लापरवाही का संक्रमण से शहर के हालात विस्फोटक हो सकते हैं, जिसको नियंत्रण कर पाना मुश्किल होगा।


जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन भले ही ओमिक्रॉन को लेकर अलर्ट पर हो,मगर जनता लापरवाह बनी है। जनता की यह लापरवाही जानलेवा तो साबित हो सकती है, साथ ही शहर के लोगों को अपनी चपेट में ले लेगी, जो भयावह साबित हो सकती है। इस बात को जनता जानती है, फिर भी कोरोनो संक्रमितों की संख्या में एक बार फिर बढ़ोतरी हो रही है। कोरोना के नए वैरिएंट ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता को और बढ़ा दिया है। जिस तरह कोरोना के नए वैरिएंट ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया है, वह लोगों के लिए भी चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है।

वहीं, इस संबंध में मंडलीय सर्विलांस अधिकारी अशोक तालियान का कहना है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट की दस्तक से प्रशासन ने एक बार फिर आॅक्सीजन प्लांटों का मॉकड्रिल कर परखा है। वहीं, पिछले दिनों सरकारी एवं निजी अस्पतालों में लगाए गए सभी आॅक्सीजन प्लांटों एवं कंसंट्रेटरों की जांच पड़ताल की जा रही है। सभी आॅक्सीजन प्लांटों को संचालित कर देखा जा रहा है कि आपात स्थिति में आॅक्सीजन की स्थिति सुधरेगी या नहीं या फिर जिले में आॅक्सीजन की कोई कमी न हो। ओमिक्रॉन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने माइक्रो प्लान बनाया है।

ये है स्थिति

  • मेरठ में कुल 27 आॅक्सीजन प्लांट। इनमें 12 सरकारी एवं 17 प्राइवेट अस्पतालों में।
  • मंडल में कुल 92 आॅक्सीजन प्लांट
  • मेरठ में कुल 591 आॅक्सीजन कंसंट्रेटर

ओमिक्रॉन को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में आॅक्सीजन की कमी से जिले में हाहाकार मच गया था। अब नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने चिंता और बढ़ा दी है। मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान ने बताया कि अब ओमिक्रॉन वैरिएंट की दस्तक से प्रशासन ने एक बार फिर आॅक्सीजन प्लांटों का मॉक ड्रिल कर परखा है। वहीं, पिछले दिनों सरकारी एवं निजी अस्पतालों में लगाए गए सभी आॅक्सीजन प्लांटों एवं कंसंट्रेटरों की जांच पड़ताल की जा रही है।

सभी आॅक्सीजन प्लांटों को संचालित कर देखा जा रहा है कि आपात स्थिति में आॅक्सीजन की स्थिति सुधरेगी या नहीं या फिर जिले में आॅक्सीजन की कोई कमी न हो। ओमिक्रॉन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने माइक्रो प्लान बनाया है। स्वास्थ्य विभाग ओमिक्रॉन को लेकर पूरी तरह से सतर्क है।

मेडिकल कालेज के मीडिया प्रभारी डा. वीडी पांडे ने बताया कि मेडिकल कालेज में कोविड अस्पताल तथा नान कोविड अस्पताल को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रधानाचार्य डा. आरसी गुप्ता ने प्रभारी नामित कर जिम्मेदारी तय कर दी है। अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं पूर्ण रूप से दुरुस्त हैं।

मेडिकल कालेज के प्रमुख अधीक्षक डा. धीरज राज बालियान ने बताया कि कोविड अस्पताल वर्तमान में आपातकालीन विभाग के स्वाइन फ्लू वार्ड में संचालित किया जा रहा है। यदि कोरोना संक्रमितों की संख्या में वृद्धि होती है तो पीएमएसएस वाई (सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक) को कोविड अस्पताल के रूप में संचालित किया जाएगा।

इसकी समस्त व्यवस्थाएं कर ली गई हैं तथा मॉक ड्रिल भी कर लिया गया है। सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक में 200 बेड की व्यवस्था की गई है, जिसमें से 160 आइसोलेशन तथा 40 सघन चिकित्सा के लिए क्रियाशील हैं।

मास्क और सैनिटाइजेशन बेहद जरूरी
देशभर में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले बढ़ते ही जा रहै हैं। वहीं, कम्युनिटी ट्रांसमिशन के चलते इसके केस 1.5 से तीन दिनों मे दोगुना हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने यह जानकारी दी है। डब्लूएचओ ने सदस्य देशों को तकनीकी जानकारी में बताया है कि इस बात का प्रमाण मिला है कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन बहुत तेजी से फैल रहा है। चिंता की बात यह भी है कि ओमिक्रॉन उन देशों में तेजी से फैल रहा है, जहां आबादी में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा है। डब्लूएचओ ने कहा कि 26 नवंबर को ओमिक्रॉन को वैरिएंट आॅफ कंसर्न का दर्जा दिया गया था।

हालांकिक अभी यह नहीं पता कि यह नया वैरिएंट कितना गंभीर साबित हो सकता है। संगठन ने कहा है कि राहत वाली बात यह है कि ओमिक्रॉन उतना घातक नहीं है, जितना कोरोना के पहले वाले वैरिएंट थे। हालांकि जिस गति से ओमिक्रॉन फैल रहा है उसे देखते हुए मास्क, सैनिटाइजेशन और भीड़ से बचने जैसे उपाय करते रहने की जरूरत है।

ओमिक्रॉन, डेल्टा मिलकर बना सकते हैं सुपर वैरिएंट
मॉडर्ना के चीफ मेडिकल आफिसर डा. पॉल बर्टन ने कहा है कि अगर ओमिक्रॉन और डेल्टा स्ट्रेन मिलकर किसी को संक्रमित करते हैं तो कोरोना का नया सुपर वैरिएंट बन सकता है। ब्रिटेन में डेल्टा और ओमिक्रॉन की आउटब्रेक स्पीड ने सुपर-वैरिएंट की आशंका को बढ़ा दिया है।

  1. डा. बर्टन ने बताया है कि दोनों वायरस आपस में मिलकर जीन शेयर और स्वैप कर सकते हैं। उन्होंने कहा है कि आमतौर पर इंसान कोरोना के एक ही एक म्यूटेंट स्ट्रेन से संक्रमित होता है पर कुछ खास मामलों में दो स्ट्रेन एक ही वक्त पर मरीज को संक्रमित करते हैं। अगर डेल्टा और ओमिक्रॉन दोनों एक सेल को संक्रमित करते हैं तो ये आपस में डीएनए की अदला-बदली कर सकते हैं। इन दोनों के मिलने से कोरोना का एक नया सुपर स्ट्रेन बन सकता है।
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