Monday, March 16, 2026
- Advertisement -

दोगुनी तेजी से बढ़े कागज के रेट

  • स्याही पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी, किताबों पर पड़ा असर
  • मुश्किल में प्रकाशक, खुले स्कूल, बढ़ेगी समस्या

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कागज के भाव क्या बढ़े बच्चों की किताबों के दामों पर इसका सीधा असर पड़ने लगा। इसके अलावा स्कूली बच्चों के काम आने वाली पेंसिल, रबर और अन्य सामान पर भी 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उधर, एनसीईआरटी की ओर से किताबों को छापने के निर्देश दिये जा रहे हैं, लेकिन पब्लिकेशन संचालकों के पास कागज उपलब्ध नहीं है।

कागज की शोर्टेज के कारण वह किताबे नहीं छापने रहे। कागज अगर मिल भी रहा है तो उसके दाम पिछले साल के मुकाबले इस साल दोगुना दामों में मिल रहा है, जिसे लेकर संचालक परेशान है। उधर, महंगाई का असर अब स्कूली बच्चों के बस्तों पर भी पड़ना शुरू हो गया है।

बता दें कि किताबों को छापने के लिये स्याही, केमिकल के साथ-साथ कागज की विशेष रूप से आवश्यकता होती है। स्याही पर इस समय 18 प्रतिशत की जीएसटी लग रही है और जैसे-जैसे दाम बढ़ रहे हैं, समस्याएं और भी बढ़ती जा रही है। उधर, रद्दी महंगी होने के कारण पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कापियों के दाम भी 25 से 30 प्रतिशत तक महंगे हो गये हैं।

सेंट्रल मार्केट स्थित गर्ग स्टेशनरी संचालक अमित ने बताया कि कापियों की कीमत में दो तरीके से वृद्धि हुई है। ब्रांडेड कंपनियों ने कापियों के दाम बढ़ाने की अपेक्षा उनके कागज में कमी कर दी है। जबकि कुछ कंपनियों ने तो कॉपी की लंबाई और चौड़ाई तक कम कर दी है। जैसे पहले 128 पेज का रजिस्टर था तो वह अब 120 पेज का आ रहा है और उसके दाम वही है। पहले 64 पेज की कॉपी जो 10 रुपये में आती थी, वह अब 15 रुपये की हो गई है।

एनसीईआरटी के आदेश किताबें छापों, लेकिन उपलब्ध नहीं है कागज

चिल्डर्न बुक्स पब्लिशर्स मेरठ के पंकज जैन ने बताया कि कागज के दाम पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो गया हैं। पहले जो कागज 70 रुपये प्रति किलो के आसपास आ रहा था। वह अब 100 रुपये से ऊपर आ रहा है। जिस कारण किताबों के दामों में वृद्धि हुई है। उधर, एनसीईआरटी किताबों के छापने के लिये बोल रहा है, लेकिन यहां कागज ही उपलब्ध नहीं है। कागज पीछे से आ ही नहीं रहा है और उसके दाम अधिक होने के कारण अब वह उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

जिस कारण किताबों के दामों पर असर पड़ रहा है। कागज पर 12 प्रतिशत की जीएसटी अलग से लगती है। जिस कारण समस्याएं और अधिक बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि अभी तो स्कूल पूरी तरह खुले नहीं है। केवल शहर में बड़े स्कूल खुलने शुरू हो गये हैं। देहात में जैसे-जैसे स्कूल और खुलेंगे तो महंगाई और भी तेजी के साथ बढ़ेगी। इसका असर किताबों पर पड़ेगा बच्चों के लिये किताबों की कमी भी पड़ेगी।

प्रिंटिंग और इंक पर 18 प्रतिशत जीएसटी

वैसे तो किताबें जीएसटी से मुक्त हैं, लेकिन इसकी प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाली इंक और अन्य केमिकल जीएसटी के साथ आता है। जिसका असर किताबों दामों पर पड़ रहा है। कागज की बात की जाये तो उस पर 12 प्रतिशत जीएसटी और स्याही की बात की जाये तो उस पर 18 प्रतिशत की जीएसटी लगती है। ऊपर से मार्केट में कागज उपलब्ध नहीं है। जिस कारण किताबे कम छप रही हैं। जिसके कारण इसका असर इसके दामों पर भी पड़ रहा है। स्कूली कॉपी किताबों के दामों में 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। जिस कारण बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP: मुरादाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई कार, चार युवकों की मौत

जनवाणी ब्यूरो । नई दिल्ली: भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी।...

सिलेंडर बिन जलाए रोटी बनाने की कला

मैं हफ्ते में एक दिन आफिस जाने वाला हर...

सुरक्षित उत्पाद उपभोक्ता का अधिकार

सुभाष बुडनवाला हर वर्ष 15 मार्च को विश्व भर में...

पुराना है नाम बदलने का चलन

अमिताभ स. पिछले दिनों, भारत के एक राज्य और कुछ...
spot_imgspot_img