Thursday, February 19, 2026
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जानिए, सप्त गीता के प्रवचन श्रृंखला में क्या बोले महामंडलेश्वर ?

जनवाणी ब्यूरो |

लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान गोमती नगर लखनऊ के प्रेक्षागृह में पिछले 3 दिनों से चल रहे श्रीरामचरितमानस में वर्णित सप्त गीता के प्रवचन श्रृंखला में 2022 को लक्ष्मण गीता पर चिंतन किया गया। सत्संग के कथा व्यास महानिर्वाणी अखाड़ा के वरिष्ठ आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य पाद अनंत विभूषित स्वामी अभयानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि इतिहास हमेशा तीन लोगों का बनता है शूरवीर, ज्ञानी और भक्त। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास की अपनी अनुभूति जुड़ी हुई है। जब वह प्रथमज अपनी महिमा को बिना भूले, भक्तो के प्रेम के वशीभूत अपने त्रिगुणातीत रूप से जब नीचे उतरकर भगवान प्रकट होते हैं उसी को अवतार कहते हैं।

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जीव के दुख का कारण उसकी बहिर्मुखता है। मानस के अरण्यकांड में दोहा संख्या 89 के बाद दोहा संख्या 93 तक वर्णित लक्ष्मण गीता में लक्ष्मण जी ने निषादराज को समझाते हुए बताया कि इस संसार में कोई भी व्यक्ति किसी भी अन्य व्यक्ति के सुख-दुख का हेतु नहीं है, यहां सभी अपने अपने कर्मों का फल भोग रहे हैं। असल में हमें जो कुछ भी दिखाई देता है वह सब स्वप्नवत है पर यह दृष्टि अभिमान को त्याग कर ज्ञान प्राप्त करने से ही प्राप्त होती है। सत्संग का आयोजन मुख्य यजमान श्री आर सी मिश्रा एवं श्री आर एस त्रिपाठी जी के सौजन्य से किया गया एवं व्यास पूजन श्री मानिक चंद्र निगम जी द्वारा किया गया। इस श्रृंखला में आगे क्रमशः राम गीता, विभीषण गीता, पुरजन गीता एवं गरुड़ गीता पर सारगर्भित प्रवचन राजधानी वासियों को आगे प्राप्त होता रहेगा।

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