- 50 हजार रुपये के अर्थदंड से भी किया दंडित
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: न्यायालय विशेष न्यायाधीश अपर जिला जज एससी एसटी एक्ट मेरठ मोहम्मद गुलाम उल मदार ने हत्या करने के आरोपी रामचंद्र पुत्र हरदेवा निवासी ग्राम निलोहा मेरठ को दोषी पाते हुए 10 साल के कारावास व 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
एडीजीसी क्रिमिनल निशांत गर्ग ने बताया कि वादी मुकदमा शांति स्वरूप ने थाना मवाना में रिपोर्ट दर्ज कराई की। वह अपने भाई खड़क सिंह व उसकी पत्नी गंगा देवी के साथ ट्रैक्टर पर बैठकर अपने निवास स्थान ग्राम नचया थाना रामराज जिला मुजफ्फरनगर से अपने भाई खड़क सिंह के ससुराल मवाना में आ रहे थे।

ट्रैक्टर वादी का भाई खड़क सिंह चला रहा था शाम करीब 5:00 बजे ट्रैक्टर मवाना से खेड़ी जाने के लिए फलावदा मोड़ पर मुड़ा तो फलावदा मोड़ पर एक दुकान के सामने बुग्गी जाते हुए आरोपी व अन्य खड़े हुए थे। जिनसे ट्रैक्टर का पहिया वहा खड़े हुए महिंद्र से छू गया था।
जिस पर आरोपी व उसके साथ खड़े हुए लोग गाली-गलौज करते हुए खड़क सिंह पर खलवे से सिर पर वार करना शुरू कर दिया। जिससे खड़क सिंह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया।
न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से 6 गवाहों को परीक्षित कराया। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य को देखते हुए आरोपी को 10 वर्ष के कारावास व 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
दोहरे हत्याकांड में आठ आरोपियों को उम्रकैद
मेरठ: पांच साल पहले थाना फलावदा क्षेत्र के गांव सनोता में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में न्यायालय अपर जिला जज कोर्ट संख्या-15 मेरठ हर्ष अग्रवाल ने आठ आरोपियों को दोषी पाते हुए उम्रकैद व प्रत्येक को आठ-आठ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
एडीजीसी क्रिमिनल मुकेश मित्तल ने बताया कि वादी मुकदमा कलीम ने थाना फलावदा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि ग्राम सनोता में गत 14 सितंबर 2017 को शाम 6:00 बजे उसका भाई मनसाद और दिलशाद मारुति कार से फलावदा से अपने गांव सनोता वापस लौटे थे। जब वह गांव में घर के पास पहुंचे तो उन्होंने पंचायती भवन सनोता में खाली पड़ी जगह पर कार खड़ी की तो इस पर वहां धर्मवीर पुत्र दरियाव, अशोक पुत्र दरियाव, दरियाव पुत्र बादाम, हाजी गुलफाम पुत्र वहीद, रवि पुत्र धर्मवीर, मदन पुत्र दुर्गा, शाहिद पुत्र यासीन और आसिफ पुत्र जफीरा सहित अन्य लोग पहुंचे और उन्होंने वहां से गाड़ी हटाने के लिए कहा जिस पर आपस में कहासुनी हो गई।
इन लोगों ने एक राय होकर उसके भाइयों मनसाद और दिलशाद पर अंधाधुंध गोलियां चला दी। जिससे दिलशाद और मनसाद की मौके पर ही मौत हो गयी और बाकी लोग भी मौके पर अपनी जान बचाकर भागे। मुकदमा दर्ज कराते हुए कलीम ने आरोपियों के साथ पुरानी रंजिश और पार्टी बाजी होने का भी आरोप लगाया। न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से वादी सहित कुल नौ गवाह पेश किए। न्यायालय ने गवाहों व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आठों आरोपियों को दोहरे हत्याकांड का दोषी पाते हुए सभी को उम्रकैद व प्रत्येक को आठ-आठ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

