जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने चण्डीगढ़ विश्वविद्यालय, पंजाब के दीक्षान्त समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधितकरते हुए राज्यपाल ने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिभावकों को बधाई दी और कहा कि अभिभावकों के अथक योगदान ने आप सभी को यह उपाधि एवं पदक प्राप्ति का अवसर प्रदान किया।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि चण्डीगढ़ विश्वविद्यालय न केवल स्वयं, बल्कि अन्य विश्वविद्यालयों को भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान निभा रहा है। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा सभी के लिए सस्ती और सुलभ होनी चाहिए। यह तभी सम्भव है जब शिक्षा में नवाचार और शोध के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के प्रयास किये जाये।
राज्यपाल ने छात्रों को विशेष रूप से सम्बोधित करते हुए ने कहा कि देश के युवा दुनिया को बदलने और एक राष्ट्र के रूप में हमारे सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए सक्रिय रूप से काम करें। उच्च लक्ष्य रखें, खुद को अपने उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित करें। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के तहत कार्यान्वयन योग्य पेटेंट को अधिक महत्व देना चाहिए और यह तभी सम्भव है, जब उद्योगों और संस्थानों के बीच शोध परिणामों को लेकर बेहतर सामंजस्य हो।
श्रीमती पटेल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र अथवा सभ्यता का विकास उसके शिक्षा केन्द्रों में होता है। विशेष रूप से विश्वविद्यालय राष्ट्र की सतत् विकासशील, चिन्तनशील-वैश्विक संवेदना एवं सम्पन्न अन्तर-आत्मा के प्रतीक हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि चण्डीगढ़ विश्वविद्यालय 50 अन्य विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति को सही तरीके से लागू करने और राज्य के विश्वविद्यालयों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरन्तर प्रयासरत है, जिनमें गुजरात के विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चांसलर एस. सतनाम सिंह संधु, विश्वविद्यालय के वाइस प्रेसिडेंट प्रो एमएस हिमानी सूद, रजिस्ट्रार प्रो देविन्दर सिंह, विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

