Wednesday, March 4, 2026
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दुनिया भर में जारी है ‘आधुनिक गुलामी’

Nazariya 22


AMIT BAIJNATH GARGअंंग्रेजों के चले जाने के बाद भी भारत में दास प्रथा खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है कि भारत में गुलाम देखने को मिलते हैं। ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स के मुताबिक, दुनियाभर में करोड़ों लोग आधुनिक गुलामी के शिकार हैं। इनमें भारत में भी गुलाम देखने को मिलते हैं। मसलन दास प्रथा आज भी जारी है, लेकिन एक नए नाम के रूप में। आजकल के दास मॉडर्न स्लेव्स या आधुनिक गुलाम कहे जाते हैं। भले ही दुनिया चांद पर पहुंच गई हो, भले ही भारत आजाद हो गया हो, भले ही दुनिया के अधिकतर मुल्कों ने स्वतंत्रता का स्वाद चख लिया हो, फिर भी दुनिया गुलामी की जंजीरों से मुक्त नहीं हो पाई है। भारत में लोगों के पास मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। पेट पालने के लिए बच्चे बचपन से ही काम करने लगते हैं। भारत में करीब 80 लाख गुलाम हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों में लोगों के अधिकारों का कितना सम्मान होता है, उसी के आधार पर यह इंडेक्स तैयार किया जाता है। इसके अलावा बंधुआ मजदूरी, जबरन वेश्यावृत्ति, जबरन भीख मांगना, जबरन सशस्त्र संस्थाओं में झोंक दिया जाना, जबरन शादी भी आधुनिक गुलामी के दायरे में शामिल है। इसी आधार पर तैयार किए गए ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स में भारत सबसे ऊपर है।

आॅस्ट्रेलिया के मानवाधिकार समूह वॉक फ्री फाउंडेशन की तरफ से जारी ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स के अनुसार, दुनियाभर में महिलाओं-बच्चों समेत करीब साढ़े तीन करोड़ लोग आधुनिक गुलामी की गिरफ्त में हैं। इनमें करीब 80 लाख लोग भारत में हैं। सभी 167 देशों में आधुनिक गुलाम पाए जाते हैं, इसमें शीर्ष पांच देश एशिया के हैं। भारत का स्थान इनमें 53वां है। दासता का स्तर उत्तर कोरिया में सबसे ज्यादा तथा जापान में सबसे कम है।

सर्वे के लिए दासता की जिस परिभाषा का इस्तेमाल किया गया है, उसके मुताबिक किसी की आजादी छीन लेना और हिंसा, दबाव या छल के जरिए उसका आर्थिक या यौन शोषण करना उसे दास बनाना है। एक ओर जहां पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण एशिया में आज भी कुछ लोग पैदा होते ही गुलाम बन जाते हैं, वहीं भारत समेत अन्य गरीब देशों में बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी, देह व्यापार और जबरन विवाह के जरिए गुलामी कराई जाती है। आज की तारीख में दुनिया के 167 देशों में आधुनिक गुलामी पाई गई है। जनसंख्या के अनुपात में लग्जम्बर्ग, आयरलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड, आॅस्ट्रिया, स्वीडन और बेल्जियम में सबसे कम लोग गुलाम हैं।

दुनियाभर में आधुनिक युग के गुलामों की तरह जीने वालों की तादाद करोड़ों में है। इनसे बिना पैसे दिए काम करवाया जाता है। सेक्स बंधक के रूप में बेचा जाता है। अपने आदेशों पर चलने वाले दास की तरह रखा जाता है। कई बार बाल सैनिकों के रूप में युद्ध में झोंक दिया जाता है। इस तरह की दासता झेल रहे सबसे ज्यादा लोग भारत में रहते हैं। भारतीय घरों में घरेलू नौकर, बंधुआ मजदूरों, भिखारियों और सेक्स वर्करों के रूप में इन्हें मजबूरी और गुलामी का जीवन जीने पर मजबूर किया जाता है।

भारत अंग्रेजों से तो आजाद हो गया, लेकिन आज भी यहां के लोग गुलामी में जीवन बिता रहे हैं। इन्हें गुलाम बनाने वाले बाहर से नहीं आए, यहीं के हैं। हालात ये हैं कि देश में लोगों के पास आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं। पेट भरने की मजबूरी के चलते लोग बच्चों को बचपन से ही काम पर लगा देते हैं। बाल मजदूरी, सेक्स स्लेव और बच्चों से भीख मंगवाना, ये सब छिपकर हो रहा है। इन आंकड़ों से भारत की वह तस्वीर दुनिया के सामने आई है, जो बेहद भयावह है। यहां गुलाम देश नहीं, बल्कि देश में रहने वाले लोग हैं। जिस दिन इन लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने की आजादी मिल जाएगी, उसी दिन समझा जाएगा कि देश सही मायनों में आजाद है।

दुनियाभर में महिलाओं-बच्चों समेत करीब साढ़े तीन करोड़ लोग आधुनिक गुलामी की गिरफ्त में हैं। दुनियाभर के आधुनिक गुलामों में से 58 प्रतिशत सिर्फ एशिया में रहते हैं और भारत इसमें सबसे ऊपर है। भारत के बाद चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और उज्बेकिस्तान आते हैं। हालांकि पिछले दो सालों में भारत में आधुनिक गुलामों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2014 में भारत में 1 करोड़ 40 लाख गुलाम थे, वहीं 2016 में यह संख्या बढ़कर एक करोड़ 83 लाख 50 हजार हो गई। 2018 में यह संख्या घटी है, जो 80 लाख रह गई।

उत्तर कोरिया में हर 20 में से एक व्यक्ति आधुनिक गुलाम है। मसलन कुल आबादी का करीब 4.3 प्रतिशत हिस्सा। उत्तर कोरिया में नागरिकों से राज्य समर्थित बेगारी करवाई जाती है। इनमें से कई राजनीतिक बंदी हैं और कई ऐसे लोग हैं, जो बाहर के देशों से श्रमिक के रूप में लाए गए। विश्व के 124 देशों में मानव तस्करी को अपराध माना जाता है और 96 देशों में इससे निपटने के लिए नेशनल एक्शन प्लान भी बने हैं। हालांकि मानव तस्करी से निपटने के उपाय करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भारत की प्रशंसा भी की गई है।


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