- कुछ सदस्यों और प्रसाद चव्हाण के करीबी ठेकेदारों की रही पौबारह, कुछ के लिए अन्याय पूर्ण फैसले
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सीईओ के तौर पर प्रसाद चव्हाण का कार्यकाल बोर्ड के कुछ सदस्यों के हाथ की कठपुतली तथा ठेकेदारों के स्वर्ण काल तौर पर भी याद किया जाएगा। इसके अलावा अवैध निर्माण पर ऐक्शन मोड के बजाए टालमटोल के लिए भी उन्हें याद किया जाएगा।
कायदे कानून ताक पर रखकर संपत्तियों के मुटेशन व नक्शों का पास किया जाना सरीखे ऐसे कई फैसले हैं, जिनको लेकर जाने के बाद भी सवाल खडे किए जाएंगे। उनके कार्यकाल में कुछ सदस्यों की पौबारह रही तो कुछ के प्रति अन्याय पूर्ण फैसले भी लिए गए। बीना वाधवा और मंजू गोयल को लेकर लिए गए फैसलों को लेकर कसक बनी रहेगी।
अवैध निर्माणों पर रहा रिपोर्ट का इंतजार
चार्ज संभालने के बाद अवैध निर्माण को लेकर जिस प्रकार ऐक्शन मोड में प्रसाद चव्हाण नजर आते हैं। उनको वो जोश वक्त के साथ जाता रहा। 600 अवैध निर्माणों पर रिपोर्ट तलब करने के बाद पूरे कार्यकाल में इसको भुलाए बैठे रहे। जबकि 29 मई 2019 को हुई बैठक में बीना वाधवा तथा अनिल जैन ने इस मुद्दे पर नींद से जगाने की कोशिश भी की।

मुस्ताफ महल ग्रांड कैसल व्यू पर चुप्पी
वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला 210 व 210 ए मुस्ताफ महल उर्फ ग्रांड कैसल व्यू पर सबसे हैरानी भरी चुप्पी साध ली गयी। इस बंगले में चेज आॅफ परपज से लेकर साइट आॅफ सब डिवीजन सरीखी तमाम खामियां रहीं, लेकिन कार्रवाई पर चुप्पी साध ली गयी। चर्चा ओपन हुक्का बार की है।
जॉली स्टोर के अवैध निर्माण पर भी साधी चुप्पी
सदर शिव चौक स्थित जॉली स्टोर पर किए जा रहे अवैध निर्माण तथा सदर और दाल मंडी के अवैध निर्माण पर जिस प्रकार से हैरानी भरी चुप्पी साध ली गयी उसको लेकर भी तमाम तरह की चर्चाएं सुनने में आ रही हैं। इनके अलावा ओल्ड ग्रांट के बंगलों में भाजपाई सदस्यों के अवैध निर्माणों की मीडिया में चर्चा के बाद भी बोर्ड में सन्नाटा ही पसरा रहा।
दर्जनभर संपत्तियों का विवादित मुटेशन
करीब दर्जन भर ऐसी संपत्तियों के विवादित मुटेशन के लिए भी कार्यकाल याद किया जाएगा। जानकारों की मानें तो ये तमाम ऐसी संपत्तियां थीं जिनका मुटेशन कायदे कानून का वायलेंस कर किया गया है। नियमानुसार नहीं किया जा सकता था।
टोल ठेके में करोड़ों के राजस्व का फटका
टोल ठेके में करीब 8.5 करोड़ के राजस्व के फटका भी सरकारी खजाने को लगा। दरअसल टोल मुद्दा हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के चलते लीगल एडवाइजर ने किसी प्रकार के निर्णय लेने से साफ मना किया था। लीगल एडवाइजर की न के बाद भी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के चक्कर में खजाने को फटका लगा दिया।
प्रमोशन पर एडोप
प्रसाद चव्हाण का प्रमोशन बतौर डायरेक्टर हुआ है। उनको पूना भेजा गया है, लेकिन प्रमोशन आदेश पर एडोप बेसिस की शर्त लगा दी गयी है। दरअसल सीएजी में राजीव श्रीवास्तव का एक विवाद 1055/2019 चल रहा है। इसमें शीघ्र ही फैसला आने की उम्मीद जतायी जा रही है। साथ ही आशंका है कि डायरेक्टर के प्रमोशन को एडिशन के बदला जा सकता है। कई अन्य प्रमोशन जो अभी किए गए हैं, उन पर एडिशन की तलवार लटक रही है।
पूर्व में बतौर डीईओ रह चुके हैं नागेंद्र नाथ
प्रसाद चव्हाण के स्थान पर जम्मू कमांड से मेरठ छावनी में भेजे गए डायरेक्टर नागेन्द्र नाथ पूर्व में यहां 2013 से 2016 तक बतौर रक्षा संपदा अधिकारी रह चुके हैं। उस दौरान कैंट बोर्ड में उपाध्यक्ष पद पर सुनील वाधवा हुआ करते थे। दोनों में अच्छी टयूनिंग भी बतायी जाती है।
रिपोर्ट तलब कर भूले
29 मई 2019 की बैठक में अवैध निर्माणों पर रिपोर्ट अलगी बोर्ड बैठक में तलब की गयी थी, लेकिन डेढ़ साल के दौरान एक दिन भी अवैध निर्माणों पर रिपोर्ट की याद नहीं आयी। जबकि इस दौरान बड़ी संख्या में छोटे बडेÞ अवैध निर्माण कर लिए गए।
आबूलेन बंगला 173 पर गलत नोटिस
आबूलेन स्थित बंगला 173 के रिज्यूम का मामला चल रहा है, लेकिन में बड़ी कारगुजारी अंजाम दी गयी। कोर्ट में मामला पक्ष में होते भी बजाए 173 पर पते पर नोटिस दिए जाने के 173-बी आबूलेन के पते पर नोटिस दिए जाने पर भी सवाल उठे।
सर्कुलर रोड 267 में खेल
हनुमान चौक सर्कुलर रोड स्थित बंगला 267 में जहां बार बनाए जाने की तैयारी की जा रही थी, उसको लेकर किया गया खेल भी जगजाहिर है। यह बात अलग है कि बाद में इसके पार्टनरों में ही विवाद हो गया। इससे पहले प्रसाद चव्हाण ने खुद छापा मारकर वहां अवैध निर्माण पकड़ा, लेकिन उसके बाद मामला शांत हो गया।

