
जीवन में सफल होने के लिए सपने देखना भी जरूरी है। सपने देखने का आशय जीवन के किसी निश्चित डोमेन में कामयाब होने की चाह रखने से है। अक्सर हम अपना जीवन बिना किसी उद्देश्य के जीते हैं और इस तरह से अपने जीवन का बहुमूल्य समय बर्बाद करते जाते हैं। लिहाजा सफल जीवन के लिए हमें यह जरूर पता होना चाहिए कि आखिर हम पाना क्या चाहते हैं। जब एक बार यह निश्चित हो जाए कि हम पाना क्या चाहते हैं तो हमें उस चाह की प्राप्ति की दिशा में संपूर्ण समर्पण और कठिन परिश्रम के साथ आगे बढ़ते जाना चाहिए।
यूनान की राजधानी शहर एथेंस में 470 ईसा पूर्व में सुप्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात का जन्म हुआ था। सुकरात की जीवन शैली बड़ी अद्भुत थी। उनके जीवन से जुड़ी एक घटना है, जिसके कथ्य अत्यंत प्रेरणादायी हैं। एक बार सुकरात के पास एक व्यक्ति निराश और हताश होकर आया और बड़ी ही विनम्रता से उनसे प्रार्थना किया, ‘मैं अपने जीवन की असफलताओं से परेशान हो गया हूं। मैंने अपने जीवन में जो भी सपने देखे, वो कभी साकार नहीं हुए। आपकी बड़ी कृपा होगी यदि आप मुझे जीवन में सफल होने के लिए कोई गुरु मंत्र बता दें।’ सुकरात थोड़ी देर मौन रहे। फिर वे अपने स्थान पर से उठे और सफलता के मुरीद व्यक्ति को एक नदी के किनारे लेकर आ गए।
देखते-देखते वे दोनों नदी में चलने लगे और अंतत: नदी के मध्य में आ गए। हैरत तब हुई जब नदी के जल का स्तर व्यक्ति के गले तक आ पहुंचा। सुकरात उस व्यक्ति का सिर पकड़ कर नदी में डुबोने लगे। इस कोशिश में हर बार वह व्यक्ति सांस लेने के लिए छटपटाता और अपना सिर पानी से बाहर निकालने की शिद्दत से कोशिशें करता, लेकिन हर कोशिश के साथ सुकरात उसका सिर उतनी ही तीव्रता से नदी में डुबो देते। अंत में सुकरात उसे नदी के किनारे ले आए। बाहर आकर याचक ने खुली हवा में राहत की सांस ली और क्रोधित होते हुए पूछा, ‘आप यह क्या कर रहे थे? ऐसे तो मेरी जान चली जाती क इसमें सफल होने का भला कौन-सा गुरु-मन्त्र छुपा हुआ है?’
सुकरात ने धीर भाव से समझाया, ‘जब नदी के मध्य मैं तुम्हारा सिर पानी में डुबो रहा था तो तुम्हें सबसे अधिक किसकी जरूरत महसूस हो रही थी?’
‘सांस के लिए हवा की’, व्यक्ति ने पल भर देर किए जवाब दिया।
सुकरात और भी गंभीर होते हुए बोले, ‘सफलता के लिए यही गुरु मंत्र है। जीवन में देखे गए सपने को साकार करने के लिए तुममें उसी प्रकार की बेचैनी होनी चाहिए जो नदी के मध्य में तुममें सांस के लिए वायु को पाने के लिए थी। सफल होने के लिए यही छटपटाहट और व्यग्रता सफलता का कालजयी गुरु मंत्र है।’
सच पूछिए तो इस दुनिया में सफल होने का सपना कौन नहीं देखता है? हर शख्स कामयाब होना चाहता है। लेकिन सफलता का मार्ग सफल होने के सपने देखने सरीखा ही आसान नहीं होता है। सपनों को साकार करने के लिए त्याग, कठिन परिश्रम और समर्पण की आवश्यकता होती है और इन सब गुणों के अभाव में हम कामयाब नहीं हो पाते हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की इन दो पंक्तियों में जीवन मे सफल होने के रहस्य छुपे हुए हैं।
नींद कहां उनकी आंखों में जो धुन के मतवाले हैं
पग की तृष्णा और बढ़ती, पड़ते जब पग में छाले हैं
गौतम बुद्ध ने एक बार कहा था, ‘दो घातक गलतियों के कारण जीवन में बड़े काम नहीं हो पाते हैं। एक, पूरा न करना, दूसरा शुरू न करना। अक्सर दोनों के पीछे एक ही वजह होती है-परिपूर्णता की चाह। जीवन में सफल होने के लिए सपने देखना भी जरूरी है। सपने देखने का आशय जीवन के किसी निश्चित डोमेन में कामयाब होने की चाह रखने से है। अक्सर हम अपना जीवन बिना किसी उद्देश्य के जीते हैं और इस तरह से अपने जीवन का बहुमूल्य समय बर्बाद करते जाते हैं। लिहाजा सफल जीवन के लिए हमें यह जरूर पता होना चाहिए कि आखिर हम पाना क्या चाहते हैं। जब एक बार यह निश्चित हो जाए कि हम पाना क्या चाहते हैं तो हमें उस चाह की प्राप्ति की दिशा में संपूर्ण समर्पण और कठिन परिश्रम के साथ आगे बढ़ते जाना चाहिए। यदि हम लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में निरंतर प्रयास करते जाते हैं, विफलताओं के बावजूद बिना निराश हुए आगे बढ़ते जाते हैं तो कोई शक नहीं कि एक दिन हम अपने सपने को साकार करने में सफल हो जाते हैं। लक्ष्य निर्धारण के बाद उसकी प्राप्ति की राह की सही पहचान के साथ धैर्यपूर्वक निरंतर कठिन मिहनत ही जीवन में सफलता का मूल मंत्र है।
-श्रीप्रकाश शर्मा


