- एसटीएफ ने 50 हजार के इनामी को दिल्ली से पकड़ा
- 2015 में कचहरी से पेशी के दौरान हुआ था फरार
- दिल्ली में संजय शर्मा बनकर चला रहा था होटल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सात साल पहले कचहरी में पेशी पर आये तांत्रिक और 50 हजार के इनामी बदमाश नजाकत अलवी को एसटीएफ ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। नजाकत दिल्ली में नाम बदलकर एक होटल चला रहा था। अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि सूचना मिली थी कि 2015 से पेशी के दौरान फरार हुआ इनामी बदमाश नजाकत अलवी गोल मार्केट पर अपने भाई से मिलने के लिए आने वाला है। वहीं पर टीम ने नजाकत को गिरफ्तार कर लिया।
नजाकत ने बताया कि वर्ष 1998-99 में उसने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। उसके बाद सब्जी मंडी में एक सब्जी की दुकान ली और दो वर्ष तक सब्जी बेचने का काम किया। उसके बाद प्रॉपर्टी का काम करने लगा और टीवी न्यूज चैनल भी चलाता था। उसने बताया कि आजाद न्यूज का जनपद ब्यूरो हेड रहा था। वर्ष 2007 से 2012 तक मोहल्ला रसीदनगर का पार्षद रहा। तभी पहली बार जेल गया।
जमानत के बाद में पैसे कमाने के लिए अपने साथी के साथ मिलकर तांत्रिक बनकर लोगों को गढ़ा धन निकालने व दोगुना धन करने तथा पुत्र प्राप्ति आदि का लालच देकर लोगों को ठगना शुरु कर दिया। इस ठगी से लाखों रुपये कमाये। वर्ष 2007 में ब्रह्मपुरी के रहने वाले रामकुमार ने एक ठगी का मुकदमा लिखाया था। जिससे उसने 50 हजार की ठगी की थी।
इसी वर्ष हरियाणा के हिसार में चार लाख रुपये की ठगी की थी। वर्ष 2008 में सरकारी कार्य में बाधा डालने सम्बन्धी मुकदमा दर्ज हुआ था। वर्ष 2013 में राजस्थान में पांच लाख की ठगी का मुकदमा दर्ज हुआ था। वर्ष 2013 में लिसाड़ी गेट के रहने वाले बिलाल से झगड़ा हो गया था। जिसमें उसकी हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में जेल चला गया था। जेल में इसकी मुलाकात दुष्कर्म के आरोपी शाकिर से हुई थी।

नजाकत ने शाकिर की जमानत करायी थी। 20 अगस्त 2015 को नजाकत जेल से न्यायालय में पेशी पर आया था। कोर्ट में पेश होने के बाद उसने पुलिसकर्मियों से सेटिंग की और उनके साथ महामंडलेश्वर राजेन्द्र प्रसाद उर्फ बबलू निवासी फूलबाग कालोनी के यहां गया था। जहां पर उसकी महिला मित्र इंतजार कर रही थी।
महिला मित्र से मिलने के लिए अलग कमरे में चला गया तथा पुलिस वाले बाहर बैठे थे। नजाकत पीछे वाले दरवाजे से निकल कर शाकिर के साथ फरार हो गया और शाकिर को छोड़कर अपने एक परिचित के पास आगरा चला गया था। नजाकत ने बताया कि आगरा में तीन महीने छिपकर रहने के बाद में मामा के लड़के के पास शिमला चला गया। उसके बाद हरियाणा के हिसार, राजस्थान के सीकर, मिर्जापुर, सोनभद्र चला गया।
यहां कुछ समय रहने के बाद इलाहाबाद में एक मन्दिर में बाबा के पास लगभग एक वर्ष रहा। उसके बाद बनारस की रहने वाली पूजा पत्नी नेपाली के पास रहा। कोरोना काल में पश्चिम बंगाल रहा। फरारी के दौरान ही एक महिला मित्र से सेटिंग करके विरोधियों के विरुद्ध वर्ष 2019 में प्रतापगढ़ में दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। जिन व्यक्तियों के विरुद्ध दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया ये सभी व्यक्ति मेरे खिलाफ हत्या के मुकदमे में गवाह थे।
हालांकि बाद में पुलिस ने मुकदमे को झूठा पाकर खत्म कर दिया था। उसके बाद वर्ष 2020 में दिल्ली आ गया। दिल्ली आकर रोहिणी के अनुभव अपार्टमेंट में एक फ्लैट अपनी पत्नी नसरीन के नाम खरीदा और संजय शर्मा बनकर इस मकान में रहने लगा।
संजय शर्मा के नाम से ही एक गाड़ी तथा दूसरी गाड़ी साढू शिराज के नाम से खरीदी। दिल्ली के करोलबाग में इंटरनेशनल होटल लीज पर लिया और उसी की कमाई से जीवनयापन चलता रहा। इस दौरान में अपने परिचितों के पास इधर-उधर आता-जाता रहता था। पुलिस ने नजाकत के पास से एक मोबाइल, 750 रुपये बरामद किये हैं।

