Wednesday, April 29, 2026
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भारत सरकार ग्राम प्रधानों को ’कर्मयोगी’ पुरस्कार से करेगी सम्मानित

जनवाणी ब्यूरो |

लखनऊ: प्रधानमंत्री के न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के विजन को साकार करने के लिए ऐसे स्मार्ट गांव, जो जमीनी स्तर पर सेवा और रोजगार देने के लिए स्वतंत्र हों। लखनऊ में गुरुवार को “स्मार्ट विलेज पंचायत : ग्रामीण समुदायों का सशक्तिकरण, कोई भी पीछे न छूटे” विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह और केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुये केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश के प्रधानों को फंड से आगे सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के कर्मयोगी ग्राम प्रधानों को ग्रीन एनर्जी, बायोगैस, नेचुरल फार्मिंग, ई-लाईब्रेरी, ई-फार्मिंग, ई-रोजगार, स्वयं सहायता समूह, जनभागीदारी और अन्य तकनीक के माध्यम से ग्राम पंचायतों को स्मार्ट बनाने की आवश्यकता है। श्री सिंह ने कहा कि देश के प्रधानों को मध्य प्रदेश, केरल, चंडीगढ और कोयंबटूर के कर्मयोगी प्रधानों से सीख लेनी चाहिये जिन्होंने धन के अभाव और तमाम दिक्कतों के बावजूद तकनीक का प्रयोग कर अपने गांवों को सिर्फ स्मार्ट ही नहीं बनाया बल्कि राज्य सरकार से एग्रीमेंट कर, बिजली बेचकर व अन्य माध्यमों से गांव की आमदनी में सालाना 10 से 15 लाख रुपये की वृद्धि कर पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को शिक्षा युक्त, पोषण युक्त, ग्रीन एनर्जी युक्त, सड़क युक्त और पूर्ण रोजगार पंचायत बनाने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा एसे ग्राम प्रधानों को जो अपने गांवो को तकनीक का प्रयोग कर स्मार्ट बनायेंगे, भारत सरकार उन्हें आने वाले समय में ‘’कर्मयोगी’’ पुरस्कार देकर सम्मानित करेगी।

केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री ने कहा कि ‘’स्मार्ट पंचायत’’ सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि देश की आत्मा है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट पंचायतों से ही प्रधानमंत्री का 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का सपना साकार होगा।देश तभी आगे बढ़ेगा जब ग्राम पंचायतें मजबूत होगी,जिससे भारत का एक्सपोर्ट बढेगा।श्री सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतो को नेचुरल फार्मिंग पर बल देने की आवश्यकता है।इससे देश के नागरिक अस्पतालों से दूर रहेंगे और कैंसर जैसी बीमारी में कमी आयेगी।उन्होंने कहा कि फंड देने में केंद्र सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है,पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश को पचास हजार करोड़ रुपये का फंड दिया गया है।

इस अवसर पर केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने कहा कि “स्मार्ट विलेज पंचायत : ग्रामीण समुदायों का सशक्तिकरण, कोई भी पीछे न छूटे” विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन से प्रधानों को हौंसला मिलेगा। उन्होंने कहा कि फंड के अभाव में दम दिखाने की आवश्यकता है। श्री पाटिल ने कहा कि हर ग्रामवासी को आदर्श बनाने की आवश्यकता है। दो दिवसीय सम्मेलन में डिजिगांव, ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता, केरल में एकीकृत स्थानीय शासन प्रबंधन प्रणाली, स्मार्ट विलेज पंचायतों का वित्तीय विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल नेटवर्क कवरेज बढ़ाना, कुशल शासन और आर्थिक विकास के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी, ग्रामीण कनेक्टिविटी के लिए प्रौद्योगिकी विकल्प, स्मार्ट विलेज पंचायतों में स्मार्ट कनेक्टिविटी की भूमिका, स्मार्ट विलेज पंचायतों में सामुदायिक एकजुटता और भागीदारी पर प्रस्तुतीकरण दिए गए।

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