- 24 अक्तूबर को मनायी जाएगी महानवमी
जनवाणी ब्यूरो |
बिजनौर: इस वर्ष अष्टमी, नवमी और दशहरा की तिथियों को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस भ्रम को दूर करते हुए धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि सूर्योदय व्यापिनी आश्विन शुक्ल अष्टमी को दुर्गाष्टमी कहा जाता है।
दुर्गाष्टमी सूर्योदय के बाद कम से कम एक घंटा व्यापिनी तथा नवमी तिथि से युक्त होनी चााहिए। सप्तमीयुता अष्टमी को सर्वथा त्याग देना चाहिए। इस वर्ष आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि 24 अक्तूबर को एक घड़ी से कम है। जिन नगरों में सूर्योदय प्रात 6 बजकर 35 मिनट या इससे पहले होगा, वहां दुर्गाष्टमी 24 अक्तूबर को ही ग्राह्ण होगा।
नवमी तिथि 24 अक्तूबर की सुबह छह बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 25 अक्तूबर की सुबह सात बजकर 42 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
25 अक्तूबर की सुबह दशमी तिथि लग जाने के कारण दशहरा पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। दशहरा हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार है। दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व आश्विन मास की शुक्ल पक्ष को दशमी तिथि को मनाया जाता है।
इस साल यह पर्व 25 अक्तूबर का मनाया जाएगा। पंडित ललित शर्मा ने बताया कि शरदीय नवरात्रि की दशमी तिथि के शुभ मुहूर्त का प्रारंभ 25 अक्तूबर की सुबह सात बजकर 42 मिनट से हो रहा है, जो कि 26 अक्तूबर की सुबह नौ बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि विजय मुहूर्त दोपहर एक बजकर 55 मिनट से दो बजकर 40 मिनट व पूजा मुहूर्त एक बजकर 11 मिनट से तीन बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिष्विद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि इस दिन मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था। राम के रावण पर विजय प्राप्त करने के कारण ही इस दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। दशहरा सर्वसिद्धिदायक तिथि मानी जाती है। इसलिए इस दिन सभी शुभ कार्य शुभफलदायी माने जाते है।

