Friday, May 15, 2026
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खुद से पूछिए आपको जाना कहां है

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जीवन में सफलता पाने के लिए साहस का होना भी अनिवार्य गुणों में शुमार होता है। साहस के अभाव में हम प्राय: लक्ष्य प्राप्ति की राह में आई कठिनाइयों का सामना नहीं कर पाते हैं और उस लक्ष्य का ही त्याग कर देते हैं। विश्व विख्यात बॉक्सर मुहम्मद अली ने एक बार कहा था, ‘वह व्यक्ति जो जीवन में जोखिम उठाने का साहस नहीं रखता है वह जीवन में कुछ भी पाने में असफल रहता है।’

आठवीं कक्षा की बारह साल की एक स्टूडेंट अपनी एक क्लासमेट के साथ एक दिन मेरे आॅफिस में अपने हॉस्टल के अटेन्डन्स रजिस्टर पर मेरे सिग्नेचर लेने आई। आॅफिस से वापस लौटते हुए उसके पांव अकस्मात रुक गए और मुझसे डरते हुए बोली, ‘सर क्या मैं आप से दो मिनट बात कर सकती हूं?’ मेरी सहमति पाकर वह घबराते हुए बोली, ‘सर, मुझे कभी-कभी पढ़ने में बिल्कुल मन नहीं लगता है। मैं डिस्ट्रैक्ट हो जाती हूं। फिर मुझे खुद को सीरीअस स्टडी में वापस लाने में काफी वक्त लग जाता है। इस तरह के भटकाव से बचने का कोई उपाय बताइए सर।‘

मैं उस लड़की के इस प्रश्न पूछने में उसकी मासूमियत से काफी अभिभूत हुआ और बड़े सरल ढंग से समझाने की कोशिश किया, ‘मानव का मन बड़ा ही चंचल होता है। इसकी भटकने की गति तेज आंधी की गति से भी अधिक होती है। यदि मन को इसकी दशा पर छोड़ दिया जाए तो यह बेशुमार तबाहियां ला सकता है। मन ही हमारे स्वास्थ्य और सफलता का मूल होता है। हम खुद के बारे में जैसा सोचते हैं हम वैसा ही बन जाते हैं। खुद को हमेशा कमजोर समझनेवाला इंसान कभी भी दंगल नहीं लड़ सकता है। इसके विपरीत यदि एक कमजोर शख्स का मन मजबूत है तो वह दुनिया की किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है और कामयाबी हासिल कर सकता है।’ वह लड़की मेरी इस बात से संतुष्ट नहीं हुई और उसने अगला प्रश्न किया, ‘सर यदि मन के भटकने से ही समस्या जन्म लेती है तो फिर मन को भटकने से रोका कैसे जाए?’

‘मन को भटकने से रोकने के लिए मन पर कठोर नियंत्रण अति आवश्यक है। मानव मन सबसे अधिक नेगटिव विचारों से प्रभावित होता है और यही कारण है कि हम क्या सोचते हैं सबसे पहले इसे नियंत्रित करने की जरूरत है। मन के कहे और सोचे हुए के अनुसार खुद को ढालने से हमारे जीवन जीने की राहें काफी कठिन हो जाती हैं और हम समस्याओं में उलझते जाते हैं। किसी कार्य में ध्यान का भटकाव भी मन के कारण ही होता है। जब हम किसी लक्ष्य की सिद्धि के लिए कार्य कर रहे होते हैं तो मन में उसकी पूर्णता या गुणवत्ता को लेकर उठे संदेह के कारण मन विचलित होता है और हम निराशा के भंवर में फंसते जाते हैं।

इसलिए निराश करनेवाली बातों से मन को महफूज रखना जरूरी है। कभी यदि मन न भी करे तो भी धीरे ही सही अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहने चाहिए। निराश होकर यदि हम प्रयास करना छोड़ देंगे तो फिर वही हमारी हार का कारण बन जाता है। और जीवन में कभी भी अनुकूल वक्त नहीं आता है, वक्त को मन के विपरीत अनुकूल बनाना होता है।’ इस बार उस स्टूडेंट को यह लगा कि वास्तव में उसके साथ ऐसा ही कुछ होता है और जिसके वशीभूत वह निराश हो जाती है और फिर वह मन लगाकर अध्ययन नहीं कर पाती है।

ब्रिटिश लेखक लूइस कैरॉल के प्रसिद्ध नॉवेल ‘एलिस इन वॉन्डरलैंड’ में एलिस नाम की एक लड़की अपना रास्ता खो जाती है और एक बिल्ली से पूछती है, ‘क्या तुम बता सकती हो मुझे यहां से कौन- सा रास्ता जाना चाहिए?’ बिल्ली ने उत्तर दिया, ‘इस प्रश्न का उत्तर सबसे अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि तुम जाना कहां चाहती हो?’ एलिस बोली, ‘मुझे खुद नहीं पता है कि मुझे जाना कहां है।’ बिल्ली बिना देर किए जवाब दिया, ‘फिर तब यह भी महत्वपूर्ण नहीं है कि तुमको कौन-सी राह जाना चाहिए? कोई भी रास्ता तुमको कहीं भी पहुंचा सकता है।’

एलिस और बिल्ली की इस छोटी-सी कहानी में जीवन में कामयाबी हासिल करने का एक अहम संदेश छुपा हुआ है और वह यह है कि हमें सफल होने के लिए मिहनत ही नहीं करते रहना है बल्कि हमें यह भी जानना जरूरी है कि आखिर हम मिहनत किस लिए कर रहे हैं। जब हम किसी खास लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मिहनत करते हैं तो फिर हमारा भटकाव नहीं होता है और हम देर से ही सही अपने मुकाम पर पहुंच जाते हैं।

ब्राजील के प्रसिद्ध फुटबॉल प्लेयर पेले ने जीवन में सफलता के लिए कई महत्वपूर्ण कारकों को इस एक कथन में बहुत अच्छी तरह से बताने का प्रयास किया था, ‘सफलता अकस्मात घटने वाली घटना नहीं है। यह कठिन मेहनत, अध्यवसाय, सीखने की प्रवृत्ति, स्वाध्याय, त्याग और सबसे अधिक जो आप कर रहे हैं या सीखने की कोशिश कर रहे हैं उससे प्रेम करने पर निर्भर करता है।’ इस सच्चाई में कोई शक नहीं है कि जीवन के किसी क्षेत्र या विधा में पूर्ण सिद्धि के लिए कठोर परिश्रम सबसे बड़ी अनिवार्यता है।

बिना कठिन परिश्रम के सफलता के लिए आवश्यक गुणों और स्किल्स का विकास संभव नहीं होता है। लेकिन कठिन मेहनत के साथ धैर्य का होना भी जरूरी होता है। ऐसा नहीं है कि हम आज किसी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सोचें और उसे पाने के लिए आज ही कठिन मेहनत करें और आज ही सफलता के लिए अधीर हो जाएं। ऐसी स्थिति में हम कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं। सफलता के लिए अपने लक्ष्य की प्राप्ति के प्रति दृढ़ता भी बहुत जरूरी होती है। दृढ़ता का आशय सफल होने के लिए निरंतर कोशिश करते रहने से है। प्राय: हम सफल होने की कोशिश में मिली असफलता से घबरा उठते हैं और फिर प्रयास करना ही छोड़ देते हैं।

लेकिन असफलताओं के बावजूद जब हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करना नहीं छोड़ते हैं तो यही हमारी कामयाबी की राह को प्रशस्त करता है। दुनिया में अपने झ्र अपने क्षेत्रों में जिन महापुरुषों ने कालजयी कामयाबियाँ हासिल की हैं उन सबों में कठिन मिहनत करने के अतिरिक्त एक गुण जो सबसे अधिक कॉमन थीं वो है अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ता। उन्होंने विफलताओं के बावजूद कभी भी हिम्मत नहीं हारा, प्रयास करना नहीं छोड़ा, निराश नहीं हुए और अभ्यास करते रहे और नतीजा यही हुआ कि वे अंतत: कामयाब हुए।

विश्व प्रसिद्ध बास्केटबॉल प्लेयर माइकल जॉर्डन की ऐतिहासिक उपलब्धियां भी आसान नहीं थीं। अपने प्रोफेशनल लाइफ की बेशुमार विफलताओं के बावजूद हिम्मत नहीं हारने और लगातार कोशिश करते रहने के बारे में उन्होंने लिखा है, ‘मैं अपने प्रोफेशनल कॅरियर में 9000 से अधिक शॉट्स में असफल रहा हूं, मैंने प्राय: 300 खेलों में असफलता पाई हैं, 26 बार मैं जीतते-जीतते हारा हूँ। मैं अपने जीवन में बार-बार असफल हुआ हूं, और यही कारण है कि मैं अंतत: सफल हो पाया हूं।’

जीवन में सीखना कभी भी पूर्ण नहीं होता है। हम सभी अपने जीवन के अंतिम सांस तक सीखते रहते हैं। यही कारण है कि कामयाबी के लिए अपनी विधा में निरंतर सीखते रहने जरूरी है। एक बार कामयाबी मिलने के बाद हम सीखना बंद कर देते हैं और यह मान लेते हैं कि सीखने की राहें यहीं बंद हो जाती हैं। सच पूछिए तो इससे बड़ी खतरनाक चीज कुछ भी नहीं है। लिहाजा हमें अपने विधा में हमेशा सीखते रहना चाहिए। लेकिन इसके लिए त्याग जरूरी है। जब पूरी दुनिया सो रही होती है तो सफलता के मुरीद व्यक्ति अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए कठिन मिहनत कर रहे होते हैं। सफलता की इच्छा रखनेवालों का जीवन कष्ट और त्याग से भरा होता है और यही उनकों असफल व्यक्तियों से अलग करती हैं।

महान चीनी दार्शनिक कन्फ़्यूशियस ने एक बार कहा था, ‘यदि आप अपने लिए ऐसे कार्य का चुनाव करते हैं जिससे आप प्रेम करते हैं तो आपको एक दिन भी काम नहीं करना पड़ेगा।’ आशय यही है कि हम जिस भी लक्ष्य को पाना चाह रहे हैं या किसी हुनर को सीखना चाह रहे हैं तो उसके प्रति हमारी रुचि और लगाव अवश्य होनी चाहिए। इसके लिए खुद की प्रतिभा को पहचानने की जरूरत है। हमें उसी क्षेत्र में सफलता के लिए प्लान बनाने चाहिए जिसके लिए हममें टैलेंट हो और जिसके प्रति हम पैशनेट हो।

एलिएनर रूजवेल्ट का मानना था, ‘मैं आज जो भी हूं और जैसा भी हूं, उन सभी निर्णयों की वजह से हूं जो मैंने कल लिए थे।’ अर्थात खुद की अंतर्निहित टैलेंट को पहचाने बिना जीवन के लक्ष्य के निर्धारण मंद एक मामूली झ्र सी गलती से हम खुद का सबसे बड़ा नुकसान कर सकते हैं।

जीवन में सफलता पाने के लिए साहस का होना भी अनिवार्य गुणों में शुमार होता है। साहस के अभाव में हम प्राय: लक्ष्य प्राप्ति की राह में आई कठिनाइयों का सामना नहीं कर पाते हैं और उस लक्ष्य का ही त्याग कर देते हैं। विश्व विख्यात बॉक्सर मुहम्मद अली ने एक बार कहा था, ‘वह व्यक्ति जो जीवन में जोखिम उठाने का साहस नहीं रखता है वह जीवन में कुछ भी पाने में असफल रहता है।’ किंतु जोखिम उठाने की क्षमता अपने आप नहीं आती है, इसका धीरे-धीरे विकास करना होता है।

बेकार के भय और आशंकाओं से मन को महफूज रखना जरूरी होता है। वॉल्ट डिज्नी वर्ल्ड के संस्थापक वॉल्ट डिज्नी का मानना था, ‘हमारे सभी सपने साकार हो सकते हैं बशर्ते कि हममें उन सपनों का पीछा करने का साहस हो।’ आशय यही है कि यदि हम अपने कुदरती हुनर और टैलेंट को पहचान लेते हैं तो कठिन मेहनत, साहस, धैर्य और अध्यवसाय से उस हुनर और टैलेंट को निखारते हुए खुद के जीवन को हीरा सरीखा अनमोल बना सकते हैं।

                                                                                                            -श्रीप्रकाश शर्मा


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