
अस्पतालों में प्रसव में पिछले 15 साल में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, मगर फिर भी मातृ व नवजात मृत्यु का सिलसिला नहीं थमा है। गर्भवती और धात्री महिलाएं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल से बुरी तरह वंचित हैं। उनमें से कई स्थानीय आंगनवाड़ी या स्वास्थ्य केंद्र में कुछ बुनियादी सेवाएं (जैसे टेटनस इंजेक्शन और आयरन की गोलियां) प्राप्त करते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं से बहुत कम मिलता है। दर्द या खर्च या दोनों के मामले में छोटी बीमारियां आसानी से एक बड़ा बोझ बन जाती हैं। प्रसव के समय, जटिलताएं होने पर अक्सर महिलाओं को निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। लेबर रूम में असभ्य, शत्रुतापूर्ण या क्रूर व्यवहार की भी रिपोर्ट करता है। घर के करीब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल के आमूल-चूल विस्तार की तत्काल आवश्यकता है।