- न तो फायर एनओसी, न ही एमडीए से मानचित्र स्वीकृत, लिंग निर्धारण की जतायी आशंका
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अग्नि शमन विभाग की एनओसी तथा एमडीए से बिल्डिंग का मानचित्र भी स्वीकृत नहीं। जिसके चलते सीएमओ ने मंगलवार को सिविल लाइन स्थित सुशीला जसवंत राय स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। इसके अलावा यहां लिंग निर्धारण की भी आशंका जतायी जा रही है।
कोरोना संक्रमण काल में सुशीला जसवंत राय सरीखे बडे अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करना स्वास्थ्य सेवाओं की लिहाज से एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर जिस प्रकार की खामियां इस अस्पताल को लेकर सामने आ रही हैं वो भी बेहद गंभीर मानी जा रही हैं।
आग हादसों के चलते कई अस्पतालों में अब तक मरीजोें की जान जा चुकी हैं। इसके अलावा बिल्डिंग का नक्शा स्वीकृत न कराया जाना भी कम गंभीर नहीं है, लेकिन सबसे ज्यादा गंभीर सुशीला जसवंत राय में लिंग निर्धारण को लेकर लगाए जा रहे आरोप हैं। लिंग निर्धारण के आरोप यदि सही हैं तो फिर इसको चलाने वाले तमाम सीनियर चिकित्सकों पर भी कानूनी शिकंजा कसना तय है। लिंग निर्धारण को लेकर सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं।
ऐसे मामलों में गैर जमानती धाराओं में एफआईआर का प्रावधान है। हालांकि कुछ लोग इस पूरे विवाद को डा. राजीव अग्रवाल व डा. मलय शर्मा के बीच चल रही घमासान से भी जोड़कर देख रहे हैं। सुशीला जसवंत राय स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की चेयरमैन शीला गुप्ता ने सीएमओ को एक पत्र लिखा था।
इस पत्र में सीएमओ कार्यालय के 30 सितंबर के पत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अशोक गुप्ता ने अस्पताल में कुछ अतिरिक्त निर्माण कार्य कराए हैं। इन निर्माण कार्य की वजह से अग्नि सुरक्षा से बचाव के रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं। इसकी जानकारी 19 अक्तूबर को सीएमओ कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय तथा जिला अग्निशमन अधिकारी को दी गयी है। इन खामियों के चलते अस्पताल में बडे हादसे की आशंका जताते हुए सभी प्रकार के मेडिकल लाइसेंस निरस्त किए जाने का आग्रह अधिकारियों से किया गया है।
मंगलवार को सुशीला जसवंत राय स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का लाइसेंस का निरस्त किया जाना इसी परिपेक्ष्य में देखा जा रहा है। इसकी पुष्टि सीएमओ डा. राजकुमार ने की है। सुशीला जसवंत राय स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त करने की जानकारी सीएमओ ने जनवाणी से बातचीत में की है। बताया कि अस्पताल परिसर में मानकों के अनुरूप कार्य नहीं किया जा रहा था, जिसके चलते ये कदम उठाया गया है। वहीं, चर्चा ये भी है कि अस्पताल का एक भाग का ही लाइसेंस निरस्त हुआ है।

