- तीन से 13 साल आयु वर्ग के आधा दर्जन मासूम भी संक्रमण की चपेट में
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना संक्रमण की रफ्तार एक बार फिर बेकाबू हो गयी है। संक्रमितों का आंकड़ा 15 हजार को पार कर गया है। मेरठ में अब संक्रमितों की कुल संख्या 15198 पर जा पहुंची है। जबकि तीन संक्रमितों की मौत के साथ ही मरने वालों का आंकड़ा मंगलवार को 341 पर जा पहुंचा है।
सीएमओ डा. राजकुमार ने कोरोना अपडेट जारी करते हुए उपचार के दौरान तीन संक्रमितों की मौत तथा 225 संक्रमण के नए केसों की जानकारी दी है। मंगलवार को मिले संक्रमितों में बेहद कम आयु वर्ग के केसों के मिलने से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चिंतित हैं।
ऐसे संक्रमितों में शताब्दी नगर निवासी तीन वर्षीय बालिका, सरस्वती विहार निवासी पांच वर्षीया बालिका, कुंडा वेदपुरम निवासी 7 वर्षीय बालक, पल्लवपुरम फेज-2 निवासी नौ वर्षीया बालिका तथा 13 वर्षीय सदर दाल मंडी निवासी बालिका व मुलतान नगर निवासी शामिल हैं। इनके अलावा संक्रमितों में जिन इलाकों के कैदी संक्रमित पाए गए हैं उनमें मवाना रोड नेहरू नगर, कल्याण सिंह मवाना, राधा कुंज, वैशाली कालोनी, कोरल स्प्रिंग किला रोड काबली गेट मवाना शामिल हैं। संक्रमित पाए गए कैदियों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करा दिया गया है।
जो इनके संपर्क में दूसरे कैदी आए हैं उनका भी कोरोना जांच के लिए सैंपल लिए गए हैं। तीन शिक्षक भी संक्रमितों की सूची में शामिल हैं। ये श्रद्धापुरी कंकरखेड़ा, गंगानगर मवाना रोड व राधा अपार्टमेंट देव लोक कालोनी वैशाली के रहने वाले हैं। पीटीएस से संक्रमण के तीन केसों की पुष्टि सीएमओ ने की है।
आर्मी से भी संक्रमण के तीन केस मिले हैं। आठ हेल्थ केयर वर्कर भी संक्रमित हो गए हैं। इनमें तीन दयानंद अस्पताल, एक एलएलआरएम, एक वार्ड 15 हस्तिनापुर व एक शास्त्री नगर तथसा एक खड़ौली का है। सदर हिल स्ट्रीट निवासी एक चार्टेड एकाउंटेंट भी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।
एमडीए का जेई कोरोना संक्रमित, मेट की मौत
कोरोना का कहर शहर में थम नहीं रहा है। मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के जेई सोमेन्द्र कोरोना संक्रमित हो गए हैं। इसके अलावा प्राधिकरण के मेट अनिल यादव को चार दिन बुखार रहा, जिसके बाद उसे यशलोक हॉस्पिटल में भर्ती कराने ले गए, लेकिन वहां पर चिकित्सकों ने पहले कोरोना की जांच कराने के चक्कर में पीड़ित को भर्ती नहीं किया। करीब एक घंटे तक पीड़ित अस्पताल के वेटिंग रूम में ही तड़पता रहा, जिसके बाद उसकी हृदय गति रुकने से मौत हो गई। इस बीच चिकित्सकों ने अनिल यादव को यदि उपचार दे दिया होता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। इसमें हॉस्पिटल के डॉक्टरों की सीधे लापरवाही रही है। अनिल यादव के परिजनों के अनुसार पिछले चार दिन से अनिल यादव को बुखार हो रहा था, जिसका ट्रीटमेंट एक स्थानीय चिकित्सक से लिया जा रहा था। सोमवार को उनकी हालत बिगड़ने पर यशलोक हॉस्पिटल में ले जाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देने की बजाय मरीज को तब तक भर्ती नहीं किया, जब तक कोरोना की जांच नहीं कराई। करीब एक घंटे तक अनिल यादव हॉस्पिटल में होने के बावजूद तड़पता रहा, मगर उसे भर्ती नहीं किया। इस दौरान अनिल यादव की मृत्यु हो गई।

