Thursday, March 5, 2026
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डंपिंग ग्राउंड के बाद भी थानों में वाहनों का अंबार

  • कई थानों में अभी मौजूद हैं मुकदमे से जुड़े वाहन
  • डंपिंग ग्राउंड में इस वक्त 1500 से अधिक वाहन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जनपद में स्थित थाने वाहनों के ढेर से अटे पड़े हैं। थाना परिसर के अलावा थानों के बाहर कबाड़ के वाहन लोगों के लिये परेशानी का सबब बन रहे हैं। हालांकि शहर के अधिकांश थानों से कबाड़ के वाहनों को परतापुर स्थित डंपिंग ग्राउंड में भेजा जा चुका है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के थाने वाहनों के डंपिंड ग्राउंड बनते जा रहे हैं। थानों और डंपिंग ग्राउंड में करोड़ों की कीमत के वाहन धूल फांक रहे हैं।

मुकदमाती वाहनों से अटे पड़े थानों के परिसर और पुलिस लाइंस के मैदान को कबाड़ के वाहनों से राहत मिल गई है। पूर्व एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने परतापुर में डंपिंग ग्राउंड बनवा कर थानों में खड़े कबाड़ के वाहनों के लिये जगह मुहैय्या करवा दी है। परतापुर थाना क्षेत्र में पुलिस विभाग के लिए भूमि का आवंटन हो गया है।

इस भूमि पर बाउंड्री वाल बनाकर इन वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था की गई है। यहां सुरक्षा में रहने वाले पुलिसकर्मियों के लिए गारद कक्ष भी बना हुआ है। परतापुर थाना प्रभारी रामफल सिंह का कहना है कि इस वक्त डंपिंग ग्रांउड में 1500 के करीब वाहन है। इसमें सीसी कैमरे लगे हुए हैं और 24 घंटे की निगरानी के लिये गारद लगी हुई है।

दरअसल, शहर से देहात तक थानों के परिसर में वाहनों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि इन्हें सड़क किनारे खड़ा करना पड़ रहा है। पुलिस लाइंस मैदान में भी काफी वाहन खड़े थे। उनको भी डंपिंग ग्राउंड भेजा गया है। तत्कालीन एसएसपी अजय साहनी ने दिल्ली-देहरादून हाईवे पर भूमि देखी थी। इसके बाद एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने खरखौदा क्षेत्र में भूमि देखी थी, वहां भी योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी।

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थानों में रखे कबाड़ के वाहन आजकल परेशानी का सबब बन रहे हैं। अप्रैल में गंगानगर थाने में आग लगने की घटना हुई थी। इसमें थाना परिसर के अंदर और बाहर खड़े काफी वाहन जल गए थे। गत वर्ष नौचंदी थाने के निकट लगी आग इतनी भीषण थी कि थाने के आसपास जब्त किए हुए वाहन भी इस आग की चपेट में आ गए थे। इस दुर्घटना में यहां खड़े दर्जनों वाहन आग में जल गए थे। खरखौदा थाने के बाहर खड़ी गाड़ियों में अचानक आग लग गई थी।

आग लगने से 16 वाहन जल गये थे। दरअसल जो वाहन हादसे या किसी घटना से जुड़े होते हैं वो मुकदमे से जुड़े होते हैं। जब तक मुकदमा चलता है, ये वाहन थाने में ही खड़े रहते हैं। इसके अलावा लावारिस और सीज वाहनों को भी थानों में खड़ा किया जाता है। नोटिस जारी करने के बाद इनकी नीलाम की जाती है, जिसमें काफी समय लगता है।

शहर के अधिकांश थानों से वाहनों को डंपिग ग्राउंड में रखवा दिया गया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के थानों में वाहनों के अंबार लगे हुए है। हाल ही में सरधना थाने में लगी आग में काफी संख्या में वाहन जलकर नष्ट हो गए थे। किठौर, खरखौदा, मवाना, सरुरपुर, जानी, मुंडाली, इंचौली आदि थानों में वाहनों का ढेर लगा हुआ है।

गगोल सहकारी दूध संघ अल्पमत में, भंग की सिफारिश

मेरठ: गगोल सहकारी दूध उत्पादक संघ अल्पमत में आ गया है। प्रबंध कमेटी अल्पमत में आने से एक तरह से भंग की कार्रवाई कर दी गई है। वर्तमान में प्रबंध समिति का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो गया। इसको लेकर क्षेत्रीय दुग्ध शाला विकास अधिकारी एपी सिंह ने आला अफसरों को पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा गया है दुग्ध उत्पादक हित संस्था हित एवं न्याय हित में उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा 29(4) के अधीन पर संगत गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड मेरठ के प्रबंध संचालन के लिए यथा आवश्यक अग्रसर विधिक कार्रवाई करें।

दरअसल, गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादन संघ लिमिटेड निर्वाचन के लिए कुल 10 क्षेत्रों निर्वाचित सदस्य के जीते थे, जिसमें तीन संचालक श्रीमती प्रिया, चंद किरण, अरुण कुमार, रणवीर सिंह ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद ही वर्तमान में 4 निर्वाचित सदस्य योगेंद्र सिंह अध्यक्ष, अजीत सिंह सदस्य, श्रीमती बृजेश कुमारी सदस्य, श्रीमती सुधा तोमर सदस्य शेष बचे हैं, जो अल्पमत में पहुंच गए हैं। प्रबंध कमेटी के अनुपात में आने के बाद ही वर्तमान में इस कमेटी का अस्तित्व समाप्त हो गया है।

बता दे कि कुछ सदस्यों ने तमाम भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए अध्यक्ष पर निशाना साधा था। एक के बाद एक जिस तरह से इस्तीफे हुए हैं, उसके बाद ही प्रबंध कमेटी अल्पमत में आई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हाल ही में ‘जनवाणी’ ने विशेष रिपोर्ट में खुलासा किया था कि गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादन संघ घाटे में चल रहा है। इसकी वजह कोई भी हो, लेकिन अधिकारियों के स्तर से इसकी छानबीन नहीं की जा रही है।

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