Tuesday, June 16, 2026
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खामोशी से हो रहा है दिल पर आघात

Nazariya 1


GEETA YADAVभारत में हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो गत दस वर्षों में देश में करीब सवा दो लाख लोगों की मौत हार्ट अटैक से हो चुकी है। इनमें 25 से 60 साल के आयु वर्ग के लोग, इस बीमारी से सबसे ज्यादा जान गंवा रहे हैं। यदि हार्ट अटैक से होने वाली मौत के आंकड़ों पर प्रतिशत में गौर करें तो पूरी दुनिया में हुई मौत का 32 प्रतिशत हिस्सा अकेले हार्ट अटैक का है। आंकड़ों का विश्लेषण यह भी बताता है कि करीब पौने दो करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनको अचानक दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। बीते दिनों कई बड़ी हस्तियों का निधन भी दिल की बीमारियों की वजह से ही हुआ है। दिल की बीमारी के चलते डांस करते, बात करते, जिम में वर्कआउट करते लोगों को दिल का दौरा पड़ रहा है और उनकी मौत हो रही है। हार्ट अटैक को लेकर डॉक्टरों का मानना है कि बीते कुछ सालों में साइलेंट हार्ट अटैक के केस बढ़ रहे हैं। ये एक गंभीर समस्या है, जिसमें कई मामलों में आपको इतना भी मौका नहीं मिलता कि आप अस्पताल पहुंच पाएं। डॉक्टरों के मुताबिक, मेडिकल की दुनिया में हार्ट अटैक को साइलेंट किलर कहा जाता है। नाम के अनुसार ही यह साइलेंट होता है। इसके लक्षण आम अटैक की तरह नहीं होते हैं। जैसे आप डायबिटिक हैं, आपको बहुत हल्का सा दर्द हुआ और आपको पता ही नहीं चला। आपने उसे नजरअंदाज कर दिया और डॉक्टर के पास गए ही नहीं। तीन महीने बाद डॉक्टर ने ईसीजी की तो बताया कि आपको हार्ट अटैक हुआ है। डॉक्टरों का यह भी मानना है कि साइलेंट हार्ट अटैक इतने सामान्य होते हैं कि मरीज उन पर ध्यान ही नहीं देता। यही कारण है कि मरीज को डॉक्टरी सहायता मिलने में भी देरी हो जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों में हुआ नुकसान ही मरीज के जान गंवाने का कारण बन जाता है। इन मामलों में ज्यादातर लोगों की मौत उनकी इसी नासमझी के कारण होती है।

साइलेंट हार्ट अटैक में आम अटैक की तरह सीने में तेज दर्द और जलन नहीं होती है। डॉक्टरों के अनुसार, हार्ट अटैक आने का सबसे बड़ा कारण है हार्ट तक ब्लड पहुंचाने वाली धमनियों में वसा के थक्के जम जाना, जिससे ये ब्लड को उस तक नहीं पहुंचा पाते। ब्लड का सरकुलेशश्न रुक जाने से मांसपेशियों में आॅक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसे में यदि सही समय पर ब्लड का सरकुलेशन ठीक नहीं किया जाता तो हार्ट की मांसपेशियों में खून की गति रुक जाती है। हार्ट अटैक से होने वाली ज्यादातर मौतें इसी थक्के के फट जाने से होती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि हार्ट अटैक के लक्षण यदि आम लोग समझ सकें और समय पर सीपीआर करें तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, लोगों को लगता है कि दिल की बीमारी अधिक उम्र में होती है परंतु बदलती जीवन-शैली, कामकाजी तनाव और शारीरिक सक्रियता के अभाव से नौजवानों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ी है। इसके लक्षणों में गैस्टिक प्रॉब्लम, पेट की खराबी, बिना वजह सुस्ती और कमजोरी, थोड़ी सी मेहनत में थकान लगना, अचानक ठंडा पसीना आना, बार-बार सांस फूलना होता है। डॉक्टरों के अनुसार, फिजिकल एक्टिविटी न करना, मधुमेह और मोटापा, तनाव, ज्यादा आॅयली, फैटी और प्रोसेस्ड फूड खाना दिल के मरीजों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इससे बचाव के लिए मरीज को अपनी जीवन-शैली में बदलाव लाना चाहिए। यह हृदय रोग से बचने के लिए सबसे बेहतरीन उपाय है।

जीवन-शैली में सुधार लाने के साथ ही दिल के मरीजों को अपने हृदय की नियमित जांच करानी चाहिए। अपनी आहार शैली में सुधार, वजन पर नियंत्रण और सक्रिय जीवन प्रक्रिया पर ध्यान देते हुए हृदय रोगों को टाला जा सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि जीवन-शैली में सुधार लाने के लिए डाइट में सलाद और सब्जियां अधिक मात्रा में शामिल करें। नियमित रूप में एक्सरसाइज और योगासन करें। सिगरेट, शराब और नशे से दूर रहें। खुश रहें और तनाव से बचें। साइकिल की सवारी करें, कुछ दूर पैदल चलें। विशेषज्ञ मानते हैं कि शारीरिक श्रम, जो कभी हमारे जीवन की जरूरत थी, अब वो हम नहीं करते। यही वजह है कि मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा रहे हैं।

ब्लड प्रेशर के मरीजों को बिना डॉक्टरी परामर्श के वजन उठाने वाली कसरत नहीं करनी चाहिए। हृदय रोग की आशंका वाले व्यक्ति को भी एक दिन में 30 मिनट से अधिक व्यायाम नहीं करना चाहिए। इसके अलावा दिल के मरीजों को पैकेट बंद खाने की वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। तंबाकू जनित पदार्थ-बीड़ी, सिगरेट, खैनी, गुटका आदि का सेवन बंद कर देना चाहिए। खाने की तली वस्तुओं, चिकनाई वाले पदार्थ जैसे मक्खन, घी, वनस्पति, मलाई, तेल, मीट आदि का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए। दिन में तीन बार के भरपेट भोजन के स्थान पर थोड़ा-थोड़ा पांच या छह बार अल्प मात्रा में खाना चाहिए।

चीनी, मिठाई, चॉकलेट, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, मैदा, अचार का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि इससे इससे मधुमेह और रक्तचाप प्रभावित होता है। शाम के समय नाश्ते में समोसा, पकौड़ी, कचौड़ी, हलवा या अन्य तली वस्तुओं के स्थान पर फल, सब्जी का सूप आदि का सेवन करें। टोंड दूध का सेवन अच्छा है। फुल क्रीम दूध हृदय के लिए हानिकारक होता है। अंडे की जर्दी, पनीर, आइसक्रीम आदि में संतृप्त वसा का स्तर अधिक होता है, इसलिए इसका कम मात्रा में सेवन करें। डॉक्टर मानते हैं कि जीवन-शैली में सुधार करके साइलेंट हार्ट अटैक के जोखिम को टाला जा सकता है।


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