Friday, May 15, 2026
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मोदी के तरकश में कितने तीर?

Samvad 51


RAVINDRA KUMAR SAMBHAVभारतीय जनता पार्टी के मूल इश्यूज में से प्रमुख तीन-धारा 370 निर्मूलन, तीन तलाक और राम मंदिर का मसला हल हो चुका है। यक्ष प्रश्न यह है कि अब इसके बाद क्या? अभी भाजपा के थैले में दो और महत्वपूर्ण मसले हल होने के इंतजार में पड़े हैं। पहला है समान नागरिक संहिता एवं दूजा सम्पूर्ण गोवंश निषेध। इन पर अभी मोदी सरकार ने अपना स्पष्ट स्टैंड नहीं दिखाया है । समान नागरिक संहिता के लिए तो माना जा सकता है कि उसे लागू करने में कानूनी, संवैधानिक एवं धार्मिक बाधाएं हैं, किंतु गोवध निषेध में ऐसा कुछ विरोध नहीं है। मोदी सरकार को अब पूर्णरूपेण जिस समस्या पर ध्यान देने की आवश्यकता है वह है बेरोजगारी का भयावह संकट। आटोमेशन, इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण पहले ही मानव श्रम में भारी कटौती हो चुकी है और अब सार्वजनिक क्षेत्र तथा सेना में मिलने वाले रोजगार पर भी आंच आ रही है। निजीकरण एवं अग्निवीर योजना पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता आ चुकी है और केंद्र सरकार को इससे मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। सरकारी कार्यालयों एवं कारपोरेट सेक्टर में निरंतर नौकरियों में कटौती होने से यह समस्या भयावह हो चुकी है। अपना रोजगार स्थापित करने के लिए जोरशोर से लायी गयी स्टार्ट अप योजना लगभग फेल हो गयी है और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का अरबों रूपया इसमें फंस गया है। इस बात का डर है कि लगातार बेरोजगारी कहीं युवाओं को अपराध एवं अराजकता की दुनिया में मजबूरन न धकेल दे। भारी मात्रा में औद्योगीकरण एवं निर्माण उद्योग को मजबूती देकर इस समस्या को कुछ कम किया जा सकता है। इसका एक और उपाय कृषि क्षेत्र के संरक्षण का भी है। शहरीकरण एवं सड़क निर्माण के कारण लगातार कम होते जा रहे कृषि योग्य रकबे के कारण ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ रही है जिसपर नियंत्रण लगाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही कृषि में मानव श्रम के महत्व को समझा जाना चाहिए और पश्चिमी देशों की नकल पर यहां स्वचालित यंत्रों का अंधानुकरण नहीं करना चाहिए। छोटे दुकानदारों की आर्थिक सुरक्षा हेतु बेलगाम आनलाइन व्यापार को नियंत्रित करने की भी आवश्यकता है।

मुफ़्त राशन बांटना चुनावी लोकप्रियता की दृष्टि से तो एक लाभदायक योजना हो सकती है किंतु व्यवहारिक एवं आर्थिक दृष्टि से यह एक अस्वाभाविक योजना है जो देशवासियों को निकम्मा एवं लालची बनाती है तथा खजाने पर भी इसका भारी बोझ पड़ता है। इसकी एवज में सरकारों को महानरेगा की तरह की कोई रोजगार गारंटी योजना लानी चाहिए जहां साल में कुछ न्यूनतम दिवस व्यक्ति विशेष को उसकी योग्यता अनुसार कार्य दिया जा सके और पारिश्रमिक दे दिया जाए।
एक ऐसा भी क्षेत्र है जहां मोदी सरकार को और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है और वह है हमारे वैदेशिक संबंध। भारत के पिछले कुछ वर्षों में पड़ोसी और दूर के अनेक देशों से संबंध अकारण ही खराब हुए हैं। नवीनतम उदाहरण मालदीव है। श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, म्यांमार , तुर्की, कनाडा, ब्राजील, यूक्रेन आदि से संबंध बिगड़े हैं, जिस कारण भारत की स्ट्रेटेजिक स्थिति बिगड़ी है। रूस और अमरीका से भारत के संबंध कभी गरम और कभी नरम वाले हो गए हैं। आज चीन के मामले में पहली बार भारत अकेला पड़ा हुआ है।

एक भी देश उसके साथ खड़ा नहीं है। चीन के मामले में तो विदेश और रक्षा मंत्रालय दोनों ही बेहद कमजोर और नकारा साबित हुए हैं। चीन की सीमाई आक्रमकता का न तो हम जमीन पर और न ही कूटनीतिक एवं वैश्विक स्तर पर माकूल जवाब दे पाए हैं। भारत सरकार कितना ही खंडन करले किंतु यह हकीकत है कि हमारी सेनाएं लद्दाख क्षेत्र में आज उन पोस्टों तक गश्त नहीं कर पा रही हैं, जहां तक वे 1947 से 2020 तक निर्बाध रूप से कर रही थीं। यह बहुत गंभीर बात है और भारत सरकार की एक बहुत बड़ी असफलता भी। प्रधानमंत्री को विदेश मंत्री एवं रक्षामंत्री पद पर बदलाव के बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। रक्षा शोध एवं अनुसंधान के बजट का एक बड़ा हिस्सा रखा जाना चाहिए तथा भविष्य के स्पेस एवं मिसाइल युद्ध के लिए अपने संसाधनों में शक्तिशाली वृद्धि करनी चाहिए। निश्चित ही सरकार इसपर कार्य कर रही होगी। सरकार को देश में उपलब्ध रक्षा एवं वैदेशिक मामलों के गंभीर विशेषज्ञों से भी समय समय पर राय मशविरा लेना चाहिए।

एक और क्षेत्र जहां केंद्र सरकार एवं संबंधित राज्य सरकारों को सम्मिलित रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है, वह है हिमालय क्षेत्र का पारिस्थितिकी पर्यावरण। यह तेजी से विनाश की ओर बदलता जा रहा है और यदि बुद्धिमत्ता से इसपर रोक नहीं लगाई तो भारत के लिए स्थिति विनाशक हो सकती हैं। इसके लिए सबसे पहले जरूरी है कि इस क्षेत्र में अंधाधुंध पर्यटन पर अंकुश लगाया जाए तथा ऊपरी क्षेत्र में होटल, बांध, सुरंग तथा हाईवे निर्माण बंद किए जाएं। सदियों से हिमालय हमारे मौसमी एवं सीमा रक्षा तंत्र को सुरक्षित रखता आया है। जहां एक ओर अफगानिस्तान सीमा पर हिंदुकुश पर्वत ने विदेशी आक्रांताओं को भारत सीमा में लगातार घुसाया था, वहीं दूसरी ओर महान हिमालय ने उन सबको रोक कर रखा। इसे समझा जाना चाहिए।

एक सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है स्वास्थ्य। सरकार की बेहतर स्वास्थ्य योजना में मुफ्त इलाज एवं दवाएं तो शामिल हैं, किंतु उन्हें उपलब्ध कराने वाले सरकारी अस्पतालों की भारी कमी है। अभी भी भारत सरकार के स्वास्थ्य बजट का एक बेहद मामूली हिस्सा ही स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाता है। इसे बढ़ाना होगा तथा इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान देना होगा। यह बहुत जरूरी है कि पंचायत स्तर पर प्रसूति सुविधा सहित 20 बिस्तर वाले अस्पताल हों और तहसील स्तर पर सभी बड़ी बीमारियों के इलाज की सरकारी सुविधा हो। इनमें चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ भी पर्याप्त मात्रा में एवं नियमित रूप से रहे। उच्च सुविधा युक्त मेडिकल कॉलेज खोलने को भी प्रोत्साहन दिया जाए। भारत सरकार एवं राज्य सरकारों को कानून लाकर निजी क्षेत्र के अस्पतालों में निरंतर महंगी होती तथा आम आदमी के बूते से बाहर होती चिकित्सा दरों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। इस हेतु प्रत्येक राज्य में एक नियामक की नियुक्ति की जा सकती है।

शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में कम होती जा रही छात्र छात्रा संख्या भी एक चिंतनीय विषय है और उसके निवारण के लिए समय अनुसार शिक्षा नीति में परिवर्तन की आवश्यकता है। इस हेतु 10 वीं कक्षा तक अंग्रेजी, विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा को अनिवार्य घोषित करने पर विचार करना पड़ेगा।


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