Tuesday, April 21, 2026
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निगम को सिर्फ आवास ट्रांसफर, अस्पताल अब भी कैंट सीमा में

  • जनता को होगी परेशानी महापौर ने कैंट बोर्ड को सुधार के दिये निर्देश

जनवाणी संवाददता |

मेरठ: कहने को तो काम जनता की सुविधा के लिए किया गया है, लेकिन जनता के लिए ऐसी दुविधा खड़ी हो जायेगी। जिससे सालों साल जनता परेशान होती रहेगी। समस्या के लिए जनता इधर से उधर भटकती रहेगी और सिवाये परेशानी के कुछ हाथ नहीं लगेगा। आप भी जान लीजिये कि कैंट बोर्ड की ओर से जो क्षेत्र नगर निगम को हस्तांतरित किया जा रहा हे, उसमें सिर्फ आवासीय क्षेत्र का हस्तांतरण हो रहा है।

जबकि उस क्षेत्र के अस्पतालों का संचालन सैन्य क्षेत्र के ही हाथों में रहेगा। इससे जनता टैक्स तो नगर निगम को भरेगी और अपना इलाज कराने के लिए कैंट बोर्ड के दफ्तर में पाबंदी से चक्कर काटेगी। महापौर ने इस समस्या को समझते हुए कैंट बोर्ड और सेना के अधिकारियों को पत्र लिखकर कैंट क्षेत्र की आबादी के साथ-साथ अस्पतालों का स्वामित्व भी नगरीय क्षेत्र में हस्तांतरित करने को कहा है।

कैंट के आवासीय क्षेत्र निगम में शामिल करने का खाका तैयार कर लिया गया है तथा इसे सरकार को सौंपा गया है। मेरठ छावनी में रहने वाले लोगों की उम्मीद अब बढ़ गई हैं। उन्हें लग रहा है कि नगर निगम में आने से उनकी कई परेशानियां दूर हो जाएंगी। रक्षा मंत्रालय ने जो प्रस्ताव तैयार कर सेना मुख्यालय से जवाब मांगा है, उसकी खबर ने ही छावनी के लोगों के चेहरे पर खुशी बिखेर दी है। ऐसे में जिस दिन यह योजना धरातल पर उतरेगी, तब लोगों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहेगा। अगर रक्षा मंत्रालय की योजना स्वीकृत होती है

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तो मेरठ छावनी में करीब 4600 संपत्तियों का स्वामित्व बदल जाएगा, कैंट बोर्ड के प्रबंधन से निकलकर सभी राज्य सरकार के पास आ जाएगा। मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार कैंट के ओल्ड ग्रांट और लीज की प्रापर्टी का स्वामित्व बदला जाएगा। मेरठ कैंट में कुल 436.196.2 एकड़ में रह रहे 41078 लोगों को लाभ मिलेगा। यह एरिया जो राज्य सरकार को ट्रांसफर होगा। छावनी में अभी फ्री होल्ड का भी नक्शा आसानी से पास नहीं होता। इससे न चाहते हुए भी अवैध निर्माण की स्थिति बनती है।

कैंट में शमन शुल्क लेकर अवैध निर्माण को कंपाउंड करने की प्रक्रिया भी केवल कागजों में है। रक्षा मंत्रालय के प्रस्ताव में सड़क प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। राज्य सरकार और नगर निकाय को कैंट क्षेत्र की प्रमुख सड़कों को मेंटेन कराने की जिम्मेदारी रहेगी। कैंट क्षेत्र की सड़कों पर बहुत अधिक ट्रैफिक, भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित रखा जाएगा। इस प्रक्रिया में जनता के लिए सुविधा की जगह दुविधाएं अधिक उत्पन्न होने वाली हैं। क्योंकि कैंट बोर्ड ने जो प्रस्ताव बनाकर प्रदेश सरकार को सौंपने का निर्णय लिया है।

उसमें उसने नगर निगम की सीमा से मिले हुए कैंट क्षेत्र के आबादी क्षेत्र को नगर निगम को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। लेकिन यह आबादी क्षेत्र अपने स्वास्थ्य व चिकित्सा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कैंट बोर्ड तथा सैन्य क्षेत्र में स्थित अस्पतालों में जाती है। कैंट बोर्ड ने इन अस्पतालों व स्वास्थ्य केन्द्रों को अपने कैंट क्षेत्र में ही शामिल रखा है। इससे जो लोग खुश हो रहे हैं कि अब वह शहर वासी कहलायेंगे। लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि वह दो नाव की सवारी करने को मजबूर होंगे।

महापौर ने कैंट बोर्ड अध्यक्ष को पत्र लिखकर व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा

महापौर हरिकांत अहलूवालिया द्वारा रक्षा मंत्री को छावनी परिषद को नगर निगम, मेरत में विलय के प्रस्ताव का स्वागत एवं साधुवाद दिया है। महापौर द्वारा रक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि जो कैण्ट बोर्ड द्वारा सिविल क्षेत्र को नगर निगम मेरठ में विलय करने का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया है उसमें कुछ क्षेत्र जैसे अस्पताल, स्कूल एवं नागरिकों से सम्बन्धित निजी, सरकारी प्रतिष्ठान आदि के विलय का प्रस्ताव सम्मिलित नहीं किया गया है जबकि केवल सैन्य क्षेत्र छोड़कर शेष समस्त क्षेत्र नगर निगम में हस्तांतरित करने की आवश्यकता है।

सम्पूर्ण सिविल क्षेत्र नगर निगम को हस्तांतरित न होने से छावनी परिषद की जनता को सुविधा के स्थान पर असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। महापौर द्वारा यह भी जानकारी दी गयी है कि छावनी परिषद के क्षेत्र में सड़क सुधार, नाला, नाली, जलभराव आदि की समस्या अत्यंत ही दयनीय और खराब है, जिससे वहां रहने वाली जनता को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड रहा है। इसलिए सही आंकलन कराकर यह सब भी नगर निगम को हस्तांतरित किया जाये।

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