- लंबा फैला है सट्टे का काला कारोबार, हर जगह मौजूद गुर्गे
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रेलवे रोड थाना के मछेरान पूर्वा हाफिज अब्दुल करीम बर्फ वाली गली में सट्टे की पर्ची लिखने के एक वीडियो ने हड़कंप मचा दिया है। इस वीडियो के बाद अब सवाल पूछा जा रहा है कि वीडियो में नजर आ रहे सट्टा किंग के कारिंदों के आगे रेलवे रोड पुलिस बेबस है या फिर सट्टे की पर्ची बनाकर देने वालों के आगे पुलिस बेबस है, इसी के चलते कार्रवाई नहीं की जा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो गुरुवार को डाला बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सट्टा किंग एक महिला के मकान में खुलेआम सट्टे की पर्चियां लिखा रहा है।
ऐसा नहीं कि रेलवे रोड पुलिस को सट्टा किंग के इस ठिकाने का पता नहीं है या पुलिस बेखबर है। आरोप है कि सब कुछ पुलिस के संरक्षण में चल रहा है। जानबूझ कर पुलिस इस ठिकाने से अंजान बनी हुई है। शाम ढलते ही इस ठिकाने पर सट्टा लिखवाने वालों की आवाजाही शुरू हो जाती है। हालांकि जब इंस्पेक्टर रेलवे रोड से इसको लेकर जानकारी मांगी गयी तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की।
पहले भी बदनाम रहा है मछेरान
सट्टे की पर्ची को लेकर मछेरान इलाके का बदनाम होना कोई नहीं बात नहीं है। जानकारों की मानें तो यह इलाका पहले भी बदनाम रहा है। इससे पहले थाना ब्रह्मपुरी के शेर सिंह सट्टे वाला नामचीन माना जाता था। जानकारों की माने तो शेर सिंह सट्टे वाले के नाम से ब्रहमपुरी थाना के जाटवगेट केश् समीप ईश्वरपुरी इलाके की कुम्हारों वाली गली पहचानी जाने लगी थी। वो दौरान साल साठ से सत्तर के दशक के बीच का बताया जाता है।
जानकार बताते हैं कि उसके बाद सट्टे की पर्ची का कारोबार मछेरान में उठकर आ गया। जानकारों की मानें तो मछेरान में सट्टे का काला कारोबार उठकर आया था तो उस वक्त सलीम के हाथों में सारा कामकाज था। सुनने में आया है कि कुछ साल तक सलीम ने भी शेर सिंह सट्टे वाले की तर्ज पर ही मेरठ ही नहीं आसपास के इलाकों में सट्टे का साम्राज्य फैलाया।
ये है बदनाम इलाके
शहर में सट्टेबाजी को लेकर यदि बदनाम इलाकों की बात की जाए तो सट्टे की पर्ची लिखवाने को लेकर सबसे ज्यादा बदनाम इलाके ब्रह्मपुरी क्षेत्र का भगवतपुरा इलाका। इस इलाके में सट्टा कारोबार के चलते लोगों ने पलायन तक के पोस्टर चस्पा कर दिए थे। भगवतपुरा के इलावा लिसाड़ीगेट क्षेत्र और नौचंदी थाना क्षेत्र भी बदनाम रहे हैं।
लिसाड़ीगेट थाने का जो इलाका बदनाम हुआ करता था वो अब लोहिया नगर थाना क्षेत्र में शुमार कर लिया गया है। जहां तक रेलवे रोड थाना क्षेत्र की बात है जिसको लेकर वीडियो भी वायरल हो रहा है, उसी यदि बात की जाए तो वो पहले भी सलीम के दौरान में भी बदनाम रहा है।

ऐसे करते हैं काम
सट्टे के काले कारोबार में लगे लोगों का धंधा काफी विस्तार से फैला होता है। जरूरी नहीं कि मेन अड्डे पर जाकर ही पर्ची लिखवायी जाए। शायद ही कोई ऐसा इलाका होगा जहां इनके गुर्गे ना सक्रिय हों। पॉश इलाका हो या फिर स्लम एरिया इनमें इनका गुर्गा मिल जाएगा। इसके अलावा शहर के तमाम मुख्य बाजारों व माल तक में इनके गुर्गों की मौजूदगी बतायी जाती है। जानकारों की मानें तो इनके गुर्गो में सफेदपोश तक शामिल हैं। ये अपना मुख्य कारोबार करते हुए साइड बिजनेस के रूप में सट्टे की पर्चियां जमा करने का काम करते हैं।
ऐसे लोगों पर कोई शक तक नहीं कर सकता है, सिवाय पÞुलिस के मुखबिरों के। दरअसल पुलिस के मुखबिरों को इस काले धंधे में लगे तमाम लोगों की जानकारी होती है। उनकी कुंडली मुखबिरों की जेब में होती है। जिस प्रकार रोजाना सट्टे की पर्चियां जमा की जाती हैं उसी तर्ज पर पुलिस के मुखबिर भी रोजाना उगाही कर ले जाते बताए जाते हैं। इस काले धंधे का सबसे चौंकाने वाला खुलासा सुनने में आया है कि सट्टे के नंबर पर दांव लगाने वालों में केवल रिक्शा चालक, मजदूर, पंक्चर लगाने वाले या फिर इसके आसपास के तबके ही लोग नहीं होते,
बल्कि नंबरों पर दांव लगानों वालों में बड़े न नामचीन कारोबारी में शामिल सुने जाते हैं। जानकारों का कहना है कि जिस प्रकार से एमसीएक्स का खेल चलता है, उसी तर्ज पर सट्टे की पर्चियों पर भी दांव लगाया जाता है। सुनने में यह भी आया है कि जिस नंबर पर दांव लगाया जाता है यदि वो नंबर खुल जाए तो एक ही रात में वारे के न्यारे हो जाते हैं। लगायी गयी रकम का सौ गुना तक मिलने की बात सुनी जाती है। इसमें िकितनी सच्चाई है यह तो पुलिस ही बता सकती है, लेकिन फिलहाल सट्टे का कारोबार तेजी से शहर में पांव पसार रहा है, जिसका गवाह आज वायरल हुई बतायी जा रही थाना रेलवे रोड क्षेत्र की यह वीडियो है।
हैरत भरी जानकारी
नंबरों पर दांव खेलने वालों के बारे में सबसे ज्यादा हैरत भरी जानकारी जो मिली है वो यह कि जो लोग सट्टे का नंबर लगाने के शौकीन है या जिन्हें इसकी लत पड़ गयी है वो अपना लंकी नंबर जानने के लिए तमाम प्रकार के टोने टोटके करते हैं। जैसे किसी फकीर या साधु बाबा को पकड़ लेते हैं। उ
सकी खूब आवभगत करते हैं। यह सब लकी नंबर जानने के लिए किया जाता है। यह भी सुना जाता है कि कई बार ऐसे लोग किसी विक्षिप्त को भी पकड़ लेते हैं उससे भी लकी नंबर जानने का प्रयास किया जाता है। साधुओं में पीर फकीरों में शÞुमार नशेड़ी व भंडेÞडियों की परिक्रमा भी ऐसे लोग लगाते देखे जा सकते हैं।
- जांच के आदेश
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। उसमें जांच के आदेश दिए गए हैं। जो भी कसूरवार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। -आयुष विक्रम सिंह, एसपी सिटी

