- इसलिए मेरठ-हापुड़ सीट पर नहीं ली कांग्रेस ने दिलचस्पी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कांग्रेस के लिए इसे खतरे की घंटी कहें या फिर चेतावनी कि पार्टी हाईकमान मेरठ में अपना कैंडीडेट उतारने से ही अब हिचकिचाने सा लगा है। यही कारण है कि इस बार स्थानीय नेताओं की लाख कोशिशों के बावजूद पार्टी हाईकमान ने यहां ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। कांग्रेस चाहती तो मेरठ सीट उसे मिल सकती थी, लेकिन चूंकि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व भी यहां की ‘टांग खिंचाई’ से अच्छी तरह वाकिफ है लिहाजा उसने भी मेरठ सीट के लिए ज्यादा जद्दोजहद करना मुनासिब नहीं समझा।
पार्टी से जुड़े एक बेहद विश्वस्त सूत्र के अनुसार यदि मेरठ सीट कांग्रेस के खाते में आ भी जाती तो पार्टी नेतृत्व यहां किसी स्थानीय नेता की जगह किसी सेलिब्रिटी को चुनाव लड़ाने में ज्यादा दिलचस्पी लेता। दरअसल मेरठ सहित वेस्ट यूपी की कई सीटों पर मुस्लिम मतदाता चूंकि निर्णायक स्थिति में होते हैं तो पार्टी मेरठ सीट पर यदि चुनाव लड़ती तो यकीनन किसी मुस्लिम उम्मीदवार पर दांव खेल सकती थी। दरअसल मुरादाबाद लोकसभा सीट के लिए कोआॅर्डिनेटर बनाए गए मेरठ के डॉ. यूसुफ कुरैशी मुस्लिम नेताओं में पार्टी की पहली पसंद बताए जा रहे थे।
पार्टी हाईकमान के बेहद करीबी सूत्रों के अनुसार यदि पार्टी मेरठ में मुस्लिम चेहरे के आधार पर चुनाव लड़ती तो यूसुफ कुरैशी के चुनाव लड़ने की प्रबल संभावना थी, जबकि गैर मुस्लिम चेहरों में डॉ. प्रदीप अरोड़ा काफी आगे चल रहे थे, लेकिन अब मेरठ में कांग्रेस के लिए जो मौजूदा हालात हैं उनसे पार्टी कहां तक सहमत है वो पार्टी के वर्तमान रवैये को देखते हुए अच्छी तरह समझा जा सकता है। पार्टी हाईकमान ने एक तरह से मेरठ सीट पर दिलचस्पी न लेकर स्थानीय संगठन और स्थानीय नेताओं को एक प्रकार से आईना दिखाते हुए चेतावनी दे दी है कि यदि भविष्य में कुछ चाहिए तो कुछ कर दिखाना होगा।

एमआईएम की सूची पर विपक्षियों की गिद्ध निगाह
लोकसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। चुनावी तारीखों का ऐलान हो गया है। मेरठ में लोकसभा चुनाव दूसरे चरण में 26 अप्रैल को सम्पन्न होना है। इस लोक सभा सीट पर वैसे तो सपा व बसपा उम्मीदवारों के नामों का ऐलान हो चुका है, जबकि भाजपा व एमआईएम में प्रत्याशियों पर मंथन बिल्कुल अन्तिम चरण में है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी बदले जाने की चर्चाएं भी हावी हैं। इसे देखते हुए एमआईएम ने भी अभी अपने प्रत्याशी की घोषणा रोक दी है।
राजनीतिक हल्कों में खबर यह है कि यदि सपा ने अपना प्रत्याशी नहीं बदला तब एमआईएम से चौंकाने वाला नाम सामने आ सकता है। हालांकि एमआईएम से वेस्ट यूपी के अध्यक्ष डा. मेहताब चौहान व मेयर प्रत्याशी रहे अनस का नाम पहले से ही चल रहा है। इसके अलावा जिला अध्यक्ष फहीम चौधरी से लेकर महानगर अध्यक्ष इमरान अंसारी की राजनीतिक जिज्ञासाएं भी हिचकोले मार रही हैं, लेकिन इन सबसे परे कुछ ‘चर्चित’ नामों की भी चर्चा चल रही है। एमआईएम में प्रत्याशी की घोषणा सपा की धुंधली पिक्चर के चलते अभी तक भी अटकी हुई है।
सूत्र बताते हैं कि यदि सपा मेरठ सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं बदलती है तब उस स्थिति में एमआईएम से किसी दलित प्रत्याशी का चौंकाने वालो नाम आ सकता है। हालांकि बसपा से चर्चा में नाम आने के बाद बदर अली की ‘ख्वाहिशें’ भी जोर मार रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा उनके नाम की भी है। मेयर चुनावों में एमआईएम प्रत्याशी की परफॉर्मेंस को देखते हुए भाजपा जैसी पार्टी की भी निगाह एमआईएम प्रत्याशी की घोषणा पर है।

