Saturday, March 14, 2026
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1857 की क्रांति से साक्षात्कार कराती हैं संग्रहालय की पांच गैलरियां

  • शिलालेख पर चर्बी वाले विवादित कारतूस चलाने से इंकार करते हुए विद्रोह करने वाले 85 सिपाहियों के नाम दर्ज

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर के भैंसाली मैदान के निकट शहीद स्मारक परिसर में 30 फीट ऊंचा संगमरमर से निर्मित स्तंभ 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम की वीर गाथा को समर्पित है। इसी के निकट स्थित शिलालेख पर चर्बी वाले विवादित कारतूस चलाने से इंकार करते हुए विद्रोह करने वाले 85 सिपाहियों के नाम दर्ज हैं। शहीद स्मारक परिसर में क्रांतिकारियों के सम्मान में अमर जवान ज्योति प्रज्वलित की गई है। शहीद स्मारक परिसर में 1857 की क्रांति से जुड़ा देश का एकमात्र संग्रहालय है। राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय का औपचारिक लोकार्पण प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 150वीं वर्षगांठ पर 10 मई 2007 को किया गया था।

1995 में प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से बनाए गए संग्रहालय में पांच गैलरियां मौजूद हैं। जिनमें पहली व दूसरी गैलरी में 1857 की क्रांति गाथा का चित्रण डायरोमा से किया गया है। इस संग्रहालय के अंदर प्रत्येक गैलरी में 1857 की क्रांति के समय घटित हुई मुख्य घटनाओं को सहेजा गया है। 1857 की क्रांति के समय हुई प्रमुख घटनाओं का सजीव चित्रण से गैलरी की दीवारों पर उकेरा गया है। इस संग्रहालय में मेरठ के साथ साथ भारत के अन्य भागों में घटित घटनाओं को भी चित्रित किया गया हैं। वर्ष 2022 में दो जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और 10 मई 2023 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहीद स्मारक और संग्रहालय पहुंचकर 1857 की क्रांति के नायकों को नमन करते हुए जानकारी लेने के बाद इसका महत्व काफी बढ़ रहा है।

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शहीद स्मारक पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है। संग्रहालय की आधुनिक गैलरियों में मेरठ के अतिरिक्त 1857 के गदर के समय मेरठ क्षेत्र में हुई स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी प्रमुख यादों को भी एकत्र कर उन्हें संजोने का कार्य किया गया है। संग्रहालय में एक पुस्तकालय भी है जिसमें आजादी की लड़ाई से जुड़ी किताबें मौजूद हैं। इस संग्रहालय में लगे शहीद स्तंभ पर 1857 की क्रांति में शहीद हुए 85 वीरों के नाम अंकित किए गए हैं। विभाग के अनुसार एक करोड़ 72 लाख रुपये की लागत से निर्मित संग्रहालय में बनाई गई पांच गैलरी में 10 सेक्शन को दिल्ली, जयपुर और कोलकाता के चित्रकारों ने तैयार किया है। इसमें झांसी की रानी, वीर कुंवर सिंह की रियासत, कालपी का दृश्य, नाना साहेब, तात्या टोपे जैसे शूरवीरों की गाथा उकेरी गई है।

सदर थाने का गदर और कोर्ट मार्शल भी प्रदर्शित किया गया है। वहीं, अन्य इतिहास को डिजिटल माध्यम से टैब के जरिये दिखाया गया है। संग्रहालय स्थल के प्रमुख द्वार पर मध्य में रिवॉल्विंग प्रोजेक्टर तैयार किया गया है, ये चारों तरफ घूमता है। इसमें प्रमुख घटनाओं की सीनरी लगाई गई हैं। बिजली मोटर से रिवॉल्विंग प्रोजेक्टर को घुमाया जाता है, इसे रात के समय भी देखा जा सकता है। एलईडी लाइट के माध्यम से भी घटनाओं को देख भी सकते हैं। इसके अलावा संग्रहालय में साउंड सिस्टम भी लगाया गया है। जिसके माध्यम से क्रांति की घटनाओं के बारे में साउंड सिस्टम के माध्यम से भी सुना जा सकता है।

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