- पूरे प्रकरण पर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी साधी चुप्पी
- पूरा प्रकरण चेयरमैन के संज्ञान में, लेकिन बोलने को तैयार नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कहने को मनसबिया अरबी कॉलेज। यहां तालीम हासिल करने के लिए भी बड़ी संख्या में तलबाओं (छात्रों) की मौजूदगी। इनकी पढ़ाई के लिए क्लास से लेकर रहने के लिए हॉस्टल और खाने के लिए मैस तक की सुविधा। लेकिन इन सब सुविधाओं के बावजूद कॉलेज के छात्र आखिर फिजिकल एक्टिविटी के लिए जाएं तो जाएं कहां। दरअसल, मनसबिया कॉलेज में छात्रों के लिए जो खेल का मैदान है, आरोप है कि खेल खेल में ही उस मैदान की तस्वीर बदल कर पार्किंग में तब्दील कर दी गई। दलील भले ही वक्फ की आमदनी बढ़ाने की दी गई हो
लेकिन आरोप लगाने वाले साफ कह रहे हैं कि जब यह वक्फ खुद इतनी बड़ी जायदाद का मालिक है तो फिर बच्चों के हक (खेल का मैदान) क्यों छीने गए। इस संबंध में बाकायदा एडीएम सिटी को एक ज्ञापन सौंपकर शिया कम्यूनिटि के कई लोगों ने आरोप लगाया कि मनसबिया परिसर में जो पार्किंग है वो पूरी तरह से अवैध है, क्योंकि यह असल में मनसबिया अरबी कॉलेज का क्रीड़ा स्थल है जिसका अवैध रूप से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। आरोप यहां तक है कि मुतवल्ली दानिश जाफरी ने संबधित व्यक्ति को पार्किंग के लिए जो जगह उपलब्ध कराई वो 31 माह के लिए दी गई है
जबकि कानूनन एक बार में11 माह से अधिक समय के लिए जगह नहीं दी जा सकती। एडीएम सिटी को जो ज्ञापन पूर्व में सौंपा गया उस पर शिया समुदाय के कई लोगों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। कुछ लोगों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि जब उक्त पार्किंग के संचालन का ठेका शाहपीर गेट एवं खैरनगर निवासी कुछ लोग एक लाख और डेढ़ लाख रुपए तक मे लेने को तैयार थे तो यह ठेका वर्तमान ठेकेदार को 75 से 80 हजार रुपये में क्यों दिया गया।
चेयरमैन की चुप्पी पर सवाल !
हालांकि इस संबंध में जब शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया और न ही छोड़े गए मैसेज का कोई जवाब दिया। यहां यह भी गौरतलब है कि मेरठ की मनसबिया चूंकि पूरी तरह विवादों के शिकंजे में बुरी तरह फंस चुकी है। लिहाजा शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन पर भी अंगुली उठने लगी है। सूत्र बताते हैं कि मुतवल्ली दानिश जाफरी को चेयरमैन अली जैदी का मौन समर्थन हासिल है

