जनवाणी संवाददाता |
मोरना : शिक्षा ऋषि, ब्रह्मलीन वीतराग स्वामी कल्याणदेव जी महाराज की 149वीं जयंती के उपलक्ष्य में स्वामी कल्याणदेव अनुराधा धर्मार्थ चिकित्सालय में आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर में चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर का शुभारंभ
पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने फीता काटकर किया। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम प्रांगण में आयोजित शिविर में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द महाराज ने कहा कि वर्तमान संघर्षपूर्ण जीवन में भागदौड़, पर्यावरण का प्रदूषण, प्रदूषित खाद्य सामग्री, कुपोषण, गरीबी, भुखमरी, लाचारी, बीमारी ने मानव स्वास्थ्य के लियॆ संकट खड़ा किया हुआ है। स्वास्थ्य से जुड़ी सभी उम्मीदें सरकार, समाजसेवी संघटनों एवं चिकित्सक वर्ग पर टिकी हुई हैं। समाज ऐसे चिकित्सकों का ऋणी और आभारी है, जो अपनी सुख-सुविधा को त्याग कर, निजी चिंताओं को एक तरफ कर अपने तन, मन, धन, समय, ईमानदारी, परिश्रम और निःस्वार्थ भाव से रोगों से पीड़ित मनुष्यों को आवश्यक चिकित्सीय सेवाएं देकर उनके जीवन को बचाने का पुनीत कार्य करते हैं। स्वास्थ्य सेवा एक जीवन दान यज्ञ है, जो संसार का सबसे बड़ा परमार्थ है। ईश्वर के बाद रोगी के लियॆ चिकित्सक ही जीवन दाता तथा भगवान का दूसरा रुप होता है।
उन्होंने कहा कि स्वयं प्रसन्नचित एवं संवेदनशील रहकर मरीज के प्रति सहानुभूति रखना, सकारात्मक विचारों से उसे भरे रखना, उसमें हौसला हिम्मत बनाये रखना और पूर्वाभास रखना चिकित्सक के ऐसे गुण हैं, जो मरीज की जीवन रक्षा में तो सहायक हैं ही इसके साथ चिकित्सक को उन्नति और प्रसिद्धि के शिखर पर ले जाते हैं। अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की पहली आवश्यकता तथा जीवन की संपत्ति है। स्वस्थ नागरिक राष्ट्र की संपत्ति है और चिकित्सक अच्छे स्वास्थ्य का आधार हैं।
शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. राजेश्वर सिंह, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. रेखा सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ डा. अभय बंसल, डा. शिमलेश कुमार, डा. ओमकार सिंह, डा. सत्यवीर, डा. सहदेव आर्य आदि चिकित्सकों ने तीर्थ के साधु,महात्मा, भागवत पीठ में दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश से कथा में पधारे श्रद्धालुओं सहित हजारों रोगियों का परीक्षण कर निःशुल्क दवा वितरित की।
इस अवसर पर ट्रस्टी एवं कोषाध्यक्ष डा नरेंद्र शर्मा, ट्रस्टी रामपाल सिंह, कथाव्यास अचल कृष्ण शास्त्री, सुमन कृष्ण शास्त्री, पंजाब के कथाव्यास चुन्नी लाल शांडिल्य, दीपक मिश्रा, डा. अनवर, डा. राजेंद्र, गीता भाटी, ठाकुर प्रसाद आदि का सहयोग रहा।

