Wednesday, March 4, 2026
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पैरों में घुंघरु की छम-छम, मुख पर भोले की बम-बम

  • उमस वाली गर्मी में कांवड़ियों को हो रही परेशानी, हरियाणा और दिल्ली के कांवड़ियों की भी हुई दस्तक

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों के जोश से गंगनहर पटरी पूरी तरह भक्तिमय हो चुकी है। शनिवार को उमस भरी गर्मी ने कांवड़ियों की खूब परीक्षा ली। चटक धूप और जमीन से निकलती उमस के चलते दिन में कांवड़ियों ने आराम किया। जिसके चलते पटरी खाली नजर आई। इस बार भगवान आशुतोष भक्तों की खूब परीक्षा ले रहे हैं। कुछ देर की बारिश और उसके बाद धूप से हो रही उमस ने कांवड़ियों की परेशानी बढ़ा रखी है। मगर इसके बाद भी कांवड़िये पूरे जोश के साथ गंतव्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

जिनमें युवाओं से लेकर महिला, बुजुर्ग और बच्चें भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। समय के साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश के कांवड़ियों ने अपनी चाल तेज कर दी है। वहीं पटरी से अब हरियाणा और दिल्ली के कांवड़िये भी गुजरने शुरू हो गए हैं। गंगनहर पटरी केसरिया रंग से रंग गई है। श्रद्धालु कांवड़ियों की सेवा करके धर्म लाभ उठा रहे हैं। उधर, शनिवार को कालंद रजवाहे के निकट छुर गांव के सेवा शिविर का शुभारंभ किा गया। एसडीएम महेश प्रसाद दीक्षित व भाकियू एनसीआर उपाध्यक्ष विनेश प्रधान ने विधिवत रूप से फीता काटकर शिविर का शुभारंभ किया। इस मौके पर रंजीत, प्रह्लाद प्रजापति, पप्पू प्रजापति, बबलू, रोशन, संजीव, सुरेंद्र, भगत जी, सुभाष सोनी, पिंटू, चंद्रपाल, नितिन आदि मौजूद रहे।

माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा धर्म

लावड़: माता-पिता के प्रति श्रद्धा और उनकी सेवा का धर्म निभाने का संदेश देते हुए लावड़ कस्बे का राजन हरिद्वार से कांवड़ में एक तरफ मां और एक तरफ गंगाजल लेकर गंतव्य की ओर बढ़ रहा है। कहते हैं कि संसार में मां को सबसे ऊंचा दर्जा दिया गया है, लेकिन वर्तमान पीढ़ी संस्कार से भटक रही है और अपने बूढ़े माता-पिता की सेवा करने की बजाए उन्हें दुत्कार रही है। माता-पिता की सेवा के धर्म से युवा पीढ़ी ना भटके इसको लेकर लावड़ के 21 वर्षीय राजन हरिद्वार से कांवड़ लेकर आ रहे है।

राजन के पिता कल्लू सैनी किसान है और मां राजेश गृहिणी है। राजन विद्युत निगम में ठेके पर कार्य करता है। राजन का कहना है कि माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। वह मां राजेश को कांवड़ में बैठाकर ला रहे हैं। एक तरफ मां व दूसरी तरफ 51 लीटर गंगाजल है। राजन के अनुसार वह कांवड़ के माध्यम से लोगों को संदेश देना चाहते हैं कि जो माता-पिता पढ़ा लिखाकर बच्चों को बड़ा करते हैं। वह भी उनके बुजुर्ग अवस्था में आने के बाद उनकी सेवा करें। यह हर बच्चे का धर्म है कि वह माता-पिता की सेवा करे।

आज की पीढ़ी संस्कारों से भटक रही है और बच्चे सोशल मीडिया पर इस कदर खोए हैं कि उन्हें माता-पिता से कोई मतलब ही नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी यह कांवड़ माता-पिता के नाम है। राजन कस्बे के पहले युवा है, जो मां को कांवड़ में बैठाकर ला रहे हैं। राजन की इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए कस्बे के लोग बैचेनी से इंतजार कर रहे है। शनिवार को राजन कांवड़ लेकर मुजफ्फरनगर से आगे निकल चुके थे।

बम-बम भोले की गूंज शिवभक्तों की राह कर रही आसान

मोदीपुरम: हाइवे पर कांवड़ यात्रा धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगी है। शिवभक्त सुंदर एवं आकर्षक झांकियां लेकर मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। उमस भरी गर्मी में शिवभक्तों की डगर कठिन जरूर हो रही है, लेकिन शिवभक्तों की आस्था के आगे कठिन डगर भी शिवभक्तों को आगे बढ़ने से नहीं रोक पा रही है। पैर में छाले और मुंह में बम-बम का उद्घोष लेकर शिवभक्त आगे बढ़ रहे हैं। दिल्ली निवासी शिवम का कहना है कि वह पिछले पांच वर्ष से कांवड़ ला रहे हैं। उनके कारोबार में सफलता मिली है। जिसके चलते उन्होंने कांवड़ लाने की ठानी है। दिल्ली रोहिणी के रहने वाले सुनील का कहना है कि दो दिन पहले हरिद्वार से जल उठाया है और उनकी इस बार मन्नत थी कि अगर उसे नौकरी मिली तो वह कांवड़ लाएगा। उसे कामयाबी मिली और वह इस बार कांवड़ लाए।

शिवभक्तों में बढ़ा कलश में गंगाजल लाने का क्रेज

रोहटा: शिवभक्तों ने कलश को भोलेनाथ की तस्वीर, सितारे, झालर आदि से सुंदर तरीके से सजा रखी है। श्रद्धालु कंधों पर कलश में गंगाजल भरकर गंतव्य को जोश के साथ बढ़ रहे हैं। किसी कांवड़िये के कंधे पर 51 लीटर गंगाजल है तो किसी के कंधे पर 20, 30 या 40 लीटर गंगाजल है। गंगाजल से भरे वजनी कलश को कंधों पर लेकर कांवड़िए पूरे जोश और आस्था के साथ लगातार गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। कारण चाहे जो भी हो, लेकिन इस बार की कांवड़ यात्रा पर कलश या कांवड़ यात्रा का खुमार चढ़ा हुआ है। कलश कांवड़ यात्रा इस बार शिव भक्तों की पहली पसंद बनी हुई है।

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श्रद्धालु राजस्थान के मोहित ने बताया कि वे परिचितों के साथ हरिद्वार गंगाजल ला रहे हैं। वह 51 लीटर गंगाजल लेकर गंतव्य जा रहे हैं। 30 लीटर गंगाजल लेकर जा रहे सोनीपत के हरमीत ने कहा कि सावन के महीने में भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करना विशेष फलदायी होता है। दिल्ली के द्वारका से आए श्रद्धालु संजीव बताते हैं कि वह हरिद्वार से 51 लीटर गंगाजल भरकर ले जा रहे हैं। वह हरिद्वार से दिल्ली तक करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। वहीं, हरियाणा से आए शिवभक्त रोहित ने कहा कि वह हरिद्वार से 30 लीटर गंगाजल लेकर तक करीब 320 किलोमीटर पैदल यात्रा करेंगे।

कठिन है डगर, भोले की आस्था से कट जाएंगी कठिनाइयां

मेरठ: कांवड़ यात्रा को प्रारंभ हुए एक सप्ताह हो गया है। इस समय कांवड़िये हरिद्वार, गंगोत्री से जल उठाकर अपने-अपने गणतंव्यों की ओर एक-एक कदम बढ़ा रहे हैं। इन दिनों शहर, हाइवे की सड़कें भगवा रंग के रंग में रंगने लगी है। यह एक ऐसी यात्रा है, जब जिसमें शिव भक्त पद, प्रतिष्ठा, जाती इन सबसे ऊपर बढ़कर हर कांवड़ियां भोला होता है। कांवड़ लाने के कई नियम है, जोकि बहुत कठिन है। इसलिए कांवड़ लेने अत्यधिक पुरुष जाते थे, लेकिन जैसे-जैसे समय बदल रहा है। वैसे ही कांवड़ यात्रा का रंग रूप भी बदल रहा है। आज सभी क्षेत्रों की तरह ही आधी आबादी कांवड़ यात्रा में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। पिछले कुछ सालों में कांवड़ यात्रा का रंग सिर चढ़कर बोलने लगा है।

10 साल की मानवी पहली बार ला रही कांवड़

दिल्ली की रहने वाली मानवी पहली बार कांवड़ लेकर आ रही है। मानवी के पिता बताते हैं कि वह दिल्ली में फाइनेंस का काम करते हैं। वह पिछले 23 सालों से कांवड़ ला रहे हैं। उन्हीं को देखते हुए इस बार मानवी ने भी साथ जाने की जिद की और बोली मुझे बाबा ने बुलाया है।

तीन बहनें ला रहीं कांवड़

दिल्ली चांदनी चौक निवासी कविता सोनी ( 21), दीपांशी सोनी (20) व श्रेया सोनी (17) पिकाचु ग्रुप के साथ कांवड़ ला रही है। के ग्रुप में मोहल्ले के ही 17 से 18 लोग हैं। तीनों बहनें बताती है कि इस बार बाबा के नाम की कांवड़ बोल रखी थी। तीनों बहनें परिवार की सुख समृद्धि के लिए कांवड़ ला रही है। उन्होंने कहा कि डगर कठिन जरूर है, लेकिन भोले की शरण के आगे सारी कठिनाइयां कट जाएगी। दिल्ली शकरपुर निवासी काजल बताती है कि वह इस बार तीसरी कांवड़ ला रही है। भोलेनाथ ने पहले उनकी मनोकामना पूर्ण की थी। परिवार में सात बहने हैं तब उन्होंने भाई के लिए कांवड़ बोली थी, जिसके बाद उनका भाई हुआ। इस बार बेटे के लिए बोली कांवड़ ला रही है।

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