Friday, May 1, 2026
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योगी सरकार की मंशा पर पलीता लगा रहे आरटीओ अफसर

  • स्कूली वाहनों के नाम पर बड़ा खेल, राजस्व की जमकर चपत लगा रहा परिवहन महकमा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों की धज्जियां आरटीओ विभाग किस तरीके उड़ा रहा है, इसकी बानगी शहर के कई बडेÞ स्कूलों पर देखने को मिली। इस काम में एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। इनका सीधा जुड़ाव आरटीओ विभाग के अफसरों से है। मजे की बात यह है कि जो स्कूल इस नेटवर्क से दूर हैं, उन स्कूलों के मालिक परेशान रहते हैं। इसकी सच्चाई परखने के लिए जनवाणी टीम ने एक मुहिम शुरू की है, जिसके तहत शहर के तमाम नामचीन स्कूलों पर जाकर देखा गया तो हैरान और परेशान कर देने वाले नजारे कैमरे में कैद हुए। इसको देखने के बाद कोई भी बरबस कह देगा कि यह खेल बिना आरटीओ विभाग के अफसरों की मिलीभगत से संभव नहीं हो सकता।

बात शुरू करते हैं शहर के पॉश इलाके की। जहां सेंट मैरी, सोफिया और दीवान पब्लिक स्कूल जैसे तमाम हाईप्रोफाइल विद्यालय चल रहे हैं। इन विद्यालयों में सुबह सात बजे से बच्चों को लेकर वाहन पहुंचते हैं। बड़े नाम वाले विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को लाने ले जाने के लिए स्कूल प्रबंधन ने वाहनों की व्यवस्था तो बना रखी है, मगर उन वाहनों की हालत इतनी दयनीय है कि कभी कुछ भी हादसा हो सकता है। वाहनों की जर्जर हालत से लगता है कि फिटनेस तो बिल्कुल नहीं होगी। स्कूल तक पहुंचते और वापसी में घर तक आते-आते वाहन में बैठे मासूमों की हालत खराब हो जाती है।

बताया तो यहां तक जा रहा है कि कई बार स्कूली वाहनों के हादसे होते होते भी बचे हैं। अब हम बात करेंगे एक दूसरे खेल की। जिस खेल में स्कूल मैंनेजमेंट, निजी वाहनों के स्वामी और आरटीओ विभाग के अफसरों के शामिल होने की चर्चा आम है। इस पूरे षड्यंत्र में आरटीओ विभाग के अफसर राज्य सरकार को जहां लाखों के राजस्व की चपत लगा रहे हैं तो वहीं बताया जा रहा है कि एक मोटी रकम का बंदरबांट भी किया जा रहा है। इस खेल में स्कूल का मैनेजमेंट कुछ चुनिंदा एरिया में बच्चों के अभिभावकों को बता देता है कि वहां स्कूली वाहन नहीं जाता है, हां!

एक निजी वाहन वाला है जिससे बात कर लीजिए और वहां से कई बच्चे आते हैं। कहते हैं कि अभिभावक उनके इस मकड़जाल में फंसकर बच्चों के जीवन से खिलवाड़ कर बैठता है। यह बात सच तब साबित हुई लगी जब टीम जनवाणी इन स्कूलों पर पहुंची। स्कूल गेट पर खड़े तमाम निजी वाहनों को देखा और उसमें भूसे की भरे हुए बच्चों को देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। हालांकि कैमरा देखते ही निजी वाहनों के ड्राइवर बिलबिला पड़े, लेकिन जैसे तैसे उन्हें समझाते और बात करते हुए वहां से फिर दूसरे स्कूल पर पहुंचे तो ऐसा ही नजारा देखने मिला।

आरटीओ से सेटिंग है तो परमिट जरूरी नहीं

टीम जनवाणी ने कुछ निजी वाहनों के ड्राइवर्स से बात करने की कोशिश की तो कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। इतने में एक दो अभिभावक सामने आए और स्कूल से दूर ले जाकर आपबीती तो बताई, लेकिन इस शर्त पर कि उनका फोटो और नाम प्रकाशित ना किया जाए। कारण, स्कूल में बच्चों को परेशान किया जा सकता है। एक अभिभावक की बात सुनकर टीम जनवाणी को पक्का यकीन हो गया कि बिना आरटीओ से मिलीभगत किए इस खेल को नहीं किया जा सकता। यहां बताया गया कि आरटीओ महकमे के अफसर स्कूली मैनेजमेंट के संपर्क में निरंतर रहते हैं और स्कूली मैनेजमेंट निजी वाहन मालिकों के संपर्क में रहता है।

इस बड़े खेल में निजी वाहन स्वामियों को अपने वाहनों की परमिट, फिटनेस बनवाने कोई जरूरत नहीं पड़ती। इसके एवज में तीनों मिलकर एक बड़े खेल को अंजाम दे रहे हैं। जिले में तैनात संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन और सहायक संभागीय अधिकारी प्रवर्तन किस आधार पर ऐसे वाहनों को फिटनेस दे देते हैं, इस पर कई सवाल भी खड़े होते हैं। आखिर जब प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने ऐसे वाहनों की जांच पड़ताल के लिए निर्देश दिए हैं तो फिर मेरठ शहर में अधिकारियों के नाक के नीचे यह खेल धड़ल्ले से कौन संचालित कर रहा है। कहीं किसी बड़ी घटना की इंतजारी तो आरटीओ महकमा नहीं कर रहा है। फिलहाल टीम जनवाणी का यह अभियान उन मासूमों की सुरक्षा और जनहित में जारी रहेगा।

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