- चरक स्कूल आफ फार्मेसी की ग्राउंड प्लस वन फ्लोर इमारत का तेजी से हो रहा निर्माण कार्य
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में पहली ग्रीन बिल्डिंग का पहला हिस्सा जल्द बनकर तैयार होगा। निर्माणकर्ताओं का दावा है कि यह इमारत पर्यावरण संरक्षण में मैत्रीपूर्ण और सहयोगी भूमिका निभायेगी। इमारत में फिलहाल फिनिशिंग का कार्य चल रहा है और इसे फरवरी तक विभाग को हैंड ओवर किया जाना है, लेकिन इधर दावा है कि यह कार्य समय से पहले ही पूरा कर लिया जायेगा।
करीब 3000 स्क्वायर मीटर में तैयार की जा रही चरक स्कूल आॅफ फार्मेसी की बिल्डिंग को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त और हरियाली से परिपूर्ण इमारत के रूप में तैयार किया जा रहा है। इमारत के भूतल और प्रथम तल पर क्लासरूम, लैब, फैकलटी रूम, शौचालय और स्नानागार बनाये गये हैं। साथ ही मुख्य द्वार पर पोर्श भी बनाया गया है। इंजीनियर अरुण कुमार के अनुसार इमारत में ग्रीन बिल्डिंग के मानकों को पूरा किया गया है। केमिकल फ्री बायोटिक पेंट्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे रासायनिक रंगों से होने वाले पर्यावरण के नुकसान को कम किया जा सके।
बताया कि इस इमारत को ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित करने के पीछे का मूल विचार विवि के इंजीनियर मनीष मिश्रा का है। अभी तक मेरठ में इस तरह की यह पहली इमारत होगी। बताया कि मेरठ से बाहर नोएडा, गाजियाबाद में जो इमारते बनाई गई हैं उन्हें ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित करने के लिये उनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये गये हैं।
ये हैं ग्रीन बिल्डिंग के मुख्य कारक
- वर्षा जल संचयन: इमारत के विभिन्न स्थानों पर बारिश के पानी को इकट्ठा कर उसे भविष्य में गार्डिनिंग और अन्य कार्यों में प्रयोग किया जाता है।
- गार्बेज फ्री एरिया: इमारत की बाहरी और अंदरूनी साज-सज्जा के लिये ऐसी निर्माण साम्रगी का इस्तेमाल होगा जो रीसाइकिल हो सके।
- पेड़ों का होगा संरक्षण: इमारत के आसपास के लगे पेड़ों को उचित प्रकार से संरक्षित किया जाता है।
- रंग रोगन: इमारत की दीवारों और दरवाजों पर उच्च गुणवत्ता वाला रसायन रहित जैविक रंग और पेंट का प्रयोग किया जाता है।
- ग्लास मेटिरियल: खिड़कियों पर लगने वाली कांच पराबैंगनी किरण रोधी होगा, जिससे अंदर का वातावरण अनुकूल रहेगा।
अब नहीं हो सकेगी गड़बड़ी, बायोमैट्रिक आथेंटिकेशन के बाद मिलेगी छात्रवृत्ति
मेरठ: शासन की ओर से छात्र-छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति में अब किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हो सकेगी। अब छात्रवृत्ति की धनराशि उसी छात्र या छात्रा के बैंक खाते में जाएगी, जिसकी फॉर्म फॉरवर्ड करने के समय बायोमैट्रिक होगी। इतना ही नहीं, छात्रवृत्ति के नोडल अधिकारी और प्रधानाचार्यों की भी ई-केवाईसी और बायोमैट्रिक की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ऐसे में छात्रवृत्ति की धनराशि पादर्शिता और बिना किसी गड़बडी के सीधे विद्यार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
छात्रवृत्ति में पारदर्शिता लाने के लिए शासन स्तर से नियमों में बदलाव किया गया है। अब छात्रों को आधार बेस बायोमैट्रिक आॅथेंटिकेशन कराने के बाद ही छात्रवृत्ति मिल सकेगी। छात्रों की बायोमैट्रिक आॅथेंटिकेशन के बिना आवेदनपत्र अग्रसारित नहीं हो पाएंगे। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि 2024-25 से सभी शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं, नोडल अधिकारी, शिक्षण संस्थाओं के प्रमुख/प्राचार्य, जिला समाज कल्याण अधिकारी और राज्य नोडल अधिकारी की आधार बेस ई-केवाईसी कराए जाने के शासन से निर्देश मिले है।
उन्होंने बताया कि सभी शिक्षण संस्थानों को पत्र भेजा जा चुका है, जिसमें उन्हें ई-केवाईसी कराने के आदेश दिए गए है। उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी होने के बाद विद्यालय के छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी और प्रधानाचार्य/प्राचार्य की भी बायोमैट्रिक कराई जाएगी। जिसके लिए उन्हें संस्थान के प्रबंधक या विवि से अनुमोदन कराना होगा। इसके बाद ही उनकी आधार बेस बायोमैट्रिक की जाएगी।
जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि नोडल अधिकारी और प्रधानाचार्य/प्राचार्य की बायोमैट्रिक होने के बाद छात्र-छात्राओं की बायोमैट्रिक फॉर्म को फॉरवर्ड करने के दौरान कराई जाएगी। जिसमें उनका आधार कार्ड लगेगा। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया से पारदर्शिता आएगी। जो छात्र-छात्रा विद्यालय और महाविद्यालयों में पंजीकृत होगा, उसकी ही बायोमैट्रिक हो सकेगी, क्योंकि उसका कोड आदि भी उसमें डाला जाएगा।

