Tuesday, March 24, 2026
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तीन नहीं, अब पांच साल पुराने बैनामों की जांच शुरू

  • 100 करोड़ का आंकड़ा पार करेगा स्टांप घोटाला
  • 950 के खिलाफ दर्ज हो चुके फर्जी स्टांप लगाने के मुकदमे
  • मोस्ट वांटेड चल रहे आरोपी पर 25 हजार का इनाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: स्टांप घोटाले के तार बढ़ते जा रहे हैं। शासन स्तर पर अब तीन नहीं बल्कि पांच साल पुराने बैनामों की जांच शुरू होगी। जिससे यह स्टांप घोटाला 100 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार करेगा। इसके चलते स्टांप अधिकारियों में खलबली मची हुई है। एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि अब पांच साल पुराने बैनामों की जांच होगी। इससे पहले तीन साल पुराने बैनामों की जांच हो चुकी है। अब पांच साल पुराने बैनामों की जांच के लिए मेरठ के छह रजिस्ट्रार अधिकारियों को आदेश कर दिए हैं।

पिछले तीन साल में साढ़े सात करोड़ के स्टांप घोटाला सामने आया है। एआईजी स्टांप ने मेरठ के 950 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए हैं। वसूली के लिए रिकवरी नोटिस जारी किया है। एसएसपी डा. विपिन ताडा ने स्टांप घोटाले में वांटेड चल रहे विशाल वर्मा पर 25 हजार का इनाम रख दिया है। रिकवरी के लिए लोगों को नोटिस भेजा जा रहा है। अब तक 450 लोगों ने अपने रिकवरी नोटिस के रुपये जमा भी कर दिए है। एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि पहले तीन साल पुराने बेनामों की जांच कराई गई। जिसमें साढ़े सात करोड़ के स्टांप घोटाला सामने आया है। अब उससे पहले शासन स्तर पर पांच साल पुराने बैनामों की जांच के आदेश आ गए है।

उन्होंने कहा कि तीन साल पहले की जांच हो चुकी है। अब उससे पहले पांच साल पुराने बैनामों की जांच होगी। एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने पिछले साल जुलाई में कार्यभार ग्रहण किया। इसके बाद उपनिबंधक कार्यालय द्वितीय मोबिल कुमार को बैनामे में लगाए गए कुछ स्टांप पेपर को लेकर शक हुआ। उन्होंने सारे मामले की शिकायत उनसे की। इसके बाद उन्होंने सारे मामले की जानकारी आईजी स्टांप लखनऊ को दी। इसके बाद ही पूरे प्रदेश में बैनामों की जांच शुरू हुई और मामला पकड़ में आया।

पांच हजार से ज्यादा के स्टांप फर्जी

एआईजी स्टांप का कहना है कि बैनामे के लिए पांच हजार से ज्यादा के स्टांप कोषागार से लेने का नियम है। व्यापारियों का कहना है कि अनजाने में लोगों ने यह स्टांप विशाल वर्मा से खरीदे है। जिससे उसने बैनामे में फर्जी स्टांप लगा दिए।

आईफोन चलते हैं रजिस्टार आफिस के अफसर

मेरठ व्यापार मंडल के जीतू नागपाल का कहना है कि मेरठ के रजिस्टार आफिस में तैनात अधिकारी आई फोन चलाते है। यह आई फोन विशाल वर्मा ने ही अधिकारियों को गिफ्ट किए हैं।

चार महीने तक विशाल वर्मा ने कराई रजिस्ट्री

शैंकी वर्मा ने कहा कि एक साल पहले फर्जी स्टांप का मामला सामने आया। जिसमें शासन स्तर पर 950 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। उन्हें रिकवरी नोटिस भेजा गया। इसके बाद भी विशाल चार महीने पहले तक लोगों के फर्जी स्टांप से रजिस्ट्री कराता रहा। उसके खिलाफ किसी भी अधिकारी ने एक्शन नहीं लिया।

स्टांप घोटाले में व्यापारियों ने कोषाधिकारी और एआईजी स्टांप को घेरा

स्टांप घोटाले में व्यापारियों पर हुए मुकदमे, रिकवरी के लिए दिए गए नोटिस और स्टांप की जांच ना होने से गुस्साए मेरठ व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारियों ने हंगामा किया। जिला कोषाधिकारी कार्यालय और एआईजी स्टांप कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान व्यापारियों ने अधिकारियों को लेकर तमाम तरह के सवाल उठाएं। व्यापारियों के सवालों पर दोनों अधिकारी पल्ला झाड़ते नजर आए। उन्होंने कहा कि निर्दोष व्यापारियों को नोटिस भेजने के बजाए मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

मेरठ में साढ़े सात करोड़ के स्टांप घोटाले में उच्चाधिकारियों के आदेश के अनुसार कार्रवाई ना होने के चलते और स्टांप की पहचान (असली-नकली) समेत अन्य सवालों को लेकर मेरठ व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने जिला कोषाधिकारी और एआईजी स्टांप कार्यालय में जमकर हंगामा किया। व्यापारियों ने कहा कि वकीलों से खरीदे गए स्टांप पर रजिस्ट्री कार्यालय में बैनामे किए गए, अब उन्हीं स्टांप को फर्जी बताते हुए व्यापारियों को ही 420 का आरोपी बना दिया गया और मुकदमा दर्ज करा दिया गया। उन्होंने कोषाधिकारी वरुण खरे से सवाल किए कि नकली स्टांप और असली स्टांप की क्या पहचान है?

अब तक स्टांप की जांच क्यों नहीं हुई और क्या कार्रवाई की गई है। इसपर कोषाधिकारी वरुण खरे ने कहा कि स्टांप की जांच इंडियन नासिक प्रेस से होगी। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही स्टांप की पहचान हो सकेगी। उन्होंने कहा कि 997 स्टांप में तीन वजह सामने आ रही है। जिस व्यक्ति ने स्टांप खरीदा है, उसने किसी को स्टांप दे दिया। स्टांप का रियूज किया गया है या फिर स्टांप फर्जी है। इसकी नासिक प्रेस से रिपोर्ट आने के बाद ही जांच होगी। व्यापारियों ने कहा कि स्टांप के नंबरों की जांच क्यों नहीं कराई गई।

इस पर अधिकारी ने कहा कि उनके यहां से सभी नंबर सही है, यह स्टांप कहीं तीसरी जगह से खरीदे गए है। उन्होंने कहा कि पांच हजार से अधिक के स्टांप व्यक्ति को खुद कोषागार से खरीदने पड़ते है। इस पर व्यापारियों ने सवाल उठाया कि कहीं भी रजिस्ट्री कार्यालय में इस बात का सूचना पट नहीं लगाया गया है। एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार के साथ भी व्यापारियों की तीखी नोकझोंक हुई। एआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि मुख्यालय के आदेश पर ही एफआईआर कराई गई है। सब रजिस्टार ने मुकदमा दर्ज कराया है।

इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। व्यापारियों ने कहा कि अगर व्यापारियों को इस कार्रवाई से राहत नहीं दी गई तो वह स्टांप कार्यालयों पर ताला लगा देंगे। इस दौरान शैंकी वर्मा महानगर अध्यक्ष मेरठ व्यापार मंडल, जीतू सिंह नागपाल जिलाध्यक्ष, अर्पित मोगा, संजीव अग्रवाल, मनीष कूपर, प्रवीण जैन, रमन सोनी, अरविंद सिंघल, अश्वनी भारद्वाज, अतुल गुप्ता, राजीव अग्रवाल, सौरभ गुप्ता मौजूद रहे।

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