नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक टूट गए, जिससे निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
दोपहर करीब 2:20 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 1,784 अंक लुढ़ककर 76,396 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 50 541 अंक की गिरावट के साथ 23,900 के नीचे कारोबार करता दिखा। इस तेज गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 472 लाख करोड़ रुपये रह गया।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला इंडिया VIX करीब 26 प्रतिशत उछलकर 14.67 पर पहुंच गया। निफ्टी बैंक, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब 2 प्रतिशत तक टूट गए। एनएसई पर कारोबार के दौरान केवल 694 शेयरों में तेजी, जबकि 2,525 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ अंतरिम समझौते को समाप्त घोषित किए जाने और नए प्रतिबंधों के संकेत से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। इससे वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा कमजोर हुई।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 78.09 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
3. वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट
यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में भी बिकवाली देखने को मिली। ब्रिटेन का FTSE, फ्रांस का CAC और जर्मनी का DAX करीब 2 प्रतिशत तक टूट गए। वहीं दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 6 प्रतिशत तक लुढ़क गया।
4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.565 प्रतिशत और 30 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.068 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे निवेशकों का रुझान शेयर बाजार से हटकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा।
5. रुपये पर दबाव
मजबूत डॉलर और महंगे कच्चे तेल के कारण भारतीय रुपया 95.50 प्रति डॉलर के पार पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में यह कमजोरी विदेशी निवेश और आयात लागत पर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट का कहना है कि अमेरिका-ईरान तनाव ने फिलहाल घरेलू बाजार की सकारात्मक गति पर ब्रेक लगा दिया है। हालांकि, वैश्विक चिप व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का भारत की ओर रुझान बना हुआ है, जो लंबी अवधि में सकारात्मक संकेत है।
उन्होंने कहा कि यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तथा कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनानी चाहिए।

