Sunday, March 15, 2026
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जाम की खास खबरें

बारिश का मौसम शुरू हुआ नहीं कि चारों तरफ से जाम की खबरें बरसने लगती हैं। वैसे जाम का कोई खास मौसम नहीं होता। आजकल छोटे बड़े सभी शहरों में बिन बारिश भी जाम पर जाम लगना आम है। खास खबर निकलकर आ रही है कि नेताजी का दौरा जाम में फँसने के कारण निरस्त हो गया है। नेताजी जाम में क्या फंसे कि चारों तरफ शोर मच गया। हालांकि नेताजी कौन से जाम में फंसे हैं, कहां फंसे हुए हैं! इसकी किसी को कोई खबर न थी। अखबारों को रोज खबरें चाहिए। उनकी भूख आम खबरों से नहीं मिटती है। आज की यह खास खबर थी कि नेताजी जाम में फंसे हुए हैं। आम जनता आए दिन जाम में फंसी रहती है। नेता कभी-कभी जा फँसते हैं। जब नेता फँसते हैं तो खबर भी खास हो जाती है।

अभी-अभी ब्रेकिंग न्यूज आ रही है कि नेता जी डाक बंगले में अपने साथियों के साथ मिलकर जाम पर गहन चिंतन कर रहेहैं। यह खबर सुनते ही समर्थकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। दूसरी ब्रेकिंग न्यूज आ रही है कि नेताजी के जाम में फंसे होने की खबर एक कोरी अफवाह थी। दरअसल किसी मसखरे ने बारिश के आनंद में जाम लगाकर नेताजी के जाम में फंसने की अफवाह उड़ा दी थी। वह जाम का कोई दूसरा ही अर्थ लगा बैठा था। मसखरे कभी भी, कहीं भी, कुछ भी कर सकते हैं। मसखरे कहीं भी अपना हुनर दिखा सकते हैं।

यह तो आए दिन की आम खबर है कि जनता जाम में फंसी हुई है। कभी नेताजी के दौरे के कारण। कभी बारिश के कारण। कभी जुलूस। कभी रैली। कभी यात्रा कभी प्रदर्शन और कभी दर्शन के कारण। सड़कों और जाम का संबंध चोली दामन जैसा है, रहती सड़कों तक यह संबंध कायम रहेगा। एक बार जाम में फँसा बंदा फिर कहीं का नहीं रहता। वह जाम का एक अदद हिस्सा बनकर रह जाता है।

एक और खबर आ रही है कि एक्स्प्रेस वे पर लंबा जाम लग गया है। आसपास के चाय के खोमचे वालों ने आपदा को अवसर में बदल दिया है। चाय पकौड़े खूब बिक रहे हैं। उन्हें कुछ दिनों के लिए ही सही अच्छा रोजगार मिल गया है। बरसात का सीजन धंधे के सीजन में तब्दील हो गया है। धंधा खूब चल निकला है। जितनी डिमांड है उतना सप्लाय करना मुश्किल पड़ रहा है। जाम में फंसी जनता चाय पकौड़े का लुत्फ उठा रही है। रोजमर्रा की समस्याएँ कुछ पलों के लिए चाय के प्यालों में डुबकियां लगा रही हैं। कई जाम में फंसे मौका मिलते ही मोबाइल में जा फंसे हैं, कुछ सड़कों पर फंसे हैं, कुछ भरपेट बतिया रहे हैं, भरे पेट गरिया रहे हैं।

लोगों ने देखा आगे की गाड़ियां थोड़ा खिसकी हैं। शायद जाम थोड़ा ढीला हो रहा है। उन्हें ऐसा लगा मानो गर्मी की भरी दोपहरी में अचानक ठंडी हवा का एक झौंका आ गया हो। किंतु गाड़ियां थोड़ा रेंगने के बाद फिर थम गर्इं। फिर भी उनमें आशा की एक उम्मीद जगा गई। जाम में फंसा आम आदमी इसी उम्मीद के सहारे घंटों तक फंसा रह सकता है।

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