जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पद से इस्तीफा देने के बाद देश में नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं। जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।
धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा था, जिसे मंगलवार को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद चुनाव आयोग ने 22 जुलाई को गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर अगला कदम उठाया।
चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारियां
आयोग ने बताया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और 1952 के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम के तहत उसे चुनाव कराने का अधिकार प्राप्त है। आयोग ने बताया कि निर्वाचक मंडल की सूची तैयार की जा रही है, जिसमें राज्यसभा और लोकसभा के निर्वाचित तथा मनोनीत सदस्य शामिल हैं। रिटर्निंग ऑफिसर और सहायक रिटर्निंग ऑफिसरों की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। पूर्व उपराष्ट्रपति चुनावों के रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।
कैसे होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव?
उपराष्ट्रपति चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) के अंतर्गत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम से होता है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के कुल 788 सदस्य (543 लोकसभा सांसद, 233 निर्वाचित राज्यसभा सांसद और 12 मनोनीत सदस्य) मतदान करते हैं।
नामांकन प्रक्रिया के अनुसार प्रत्याशी को कम से कम 20 सांसदों का प्रस्तावक और 20 सांसदों का समर्थन चाहिए। ₹15,000 की जमानत राशि भी जमा करनी होती है।नामांकन पत्रों की जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों की सूची जारी होती है।
राष्ट्रपति चुनाव से अलग कैसे है उपराष्ट्रपति चुनाव?
जहां राष्ट्रपति चुनाव में राज्यों के विधायक और संसद के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं, वहीं उपराष्ट्रपति चुनाव केवल संसद सदस्यों द्वारा किया जाता है। इसमें राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी मतदान करते हैं, जो राष्ट्रपति चुनाव में अयोग्य माने जाते हैं।
जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर
राजनीति की शुरुआत जनता दल से की और 1989 में झुंझुनू से सांसद बने।
वी.पी. सिंह और चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे।
1991 में टिकट कटने पर कांग्रेस में शामिल हुए और 1993 में विधायक बने।
2003 में भाजपा में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में लौटे।
30 जुलाई 2019 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया।
2022 में देश के 14वें उपराष्ट्रपति बने।
अब आगे क्या?
चुनाव आयोग की तैयारियाँ जैसे ही पूरी होंगी, उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की तिथियों की घोषणा कर दी जाएगी। ऐसे में देश की दूसरी सबसे बड़ी संवैधानिक कुर्सी के लिए जल्द ही राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ होने की संभावना है।

