Thursday, March 12, 2026
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जाग्रत अवस्थ

जापान में एक ऐसा योगी रहता था नित कहता था जागो! नींद को त्यागो, जागो! वहां के सम्राट ने उस योगी की ख्याति सुनी और उसे राजमहल बुलाया, कहा कि हमारे राजकुमार आपके प्रशिक्षण में जीवन की कुछ बातें सीखे तो आप उसे यहीं रहकर सिखाओ। योगी कहता है कि यदि राजकुमार को कुछ सीखना होगा तो उसे मेरे पास आना होगा। मैं उसके पास नहीं आऊंगा। मैं उसे अपने ढंग से सिखाऊंगा। राजा मान जाता है और राजकुमार योगी के आश्रम में पहुंचता है। योगी उसे कहता है कि जो मैं तुमसे कहूंगा वो तुम्हें करना होगा और उसे कहा तुम्हें अपने आप को बचाना है मैं लकड़ी की नकली तलवार से तुम पर वार करूगा और मैं कभी भी वार कर सकता हूं। ये सुनकर राजकुमार घबरा जाता है और कहता है मैं यहां तलवार सीखने नहीं आया हूं। जीवन के पाठ सीखने आया हूं। योगी कहता है यही मेरा ढंग है अगर तुम्हें कुछ सीखना है तो यह करना पड़ेगा अगले एक हफ्ते तक वो राजकुमार इतनी मार खाता है वो लकड़ी की तलवार बार-बार चलती है। धीरे धीरे वो जागृत रहने लगता है कुछ भी करते उसे ख्याल है कि कभी भी वार हो सकता है। अब एक भी वार उसे नहीं लगता है, क्योंकि अब हमेशा जगा हुआ है। गुरु आते हैं कि तुम्हारा पहला पाठ पूरा हुआ, अब दूसरा पाठ है कि अब मैं तब आक्रमण करूंगा जब तुम नींद में होंगे। राजकुमार कहता है सोये हुए मुझे कैसे पता चलेगा?तुम्हें पता करना होगा। वो जैसे सोने जाता है आक्रमण होता है एक हफ्ते तक बहुत बुरी हालत होती है परंतु धीरे-धीरे वो सोते हुए भी जाग्रत है।

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