जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B Visa शुल्क में भारी बढ़ोतरी के फैसले ने वैश्विक IT और टेक उद्योग में खलबली मचा दी है। शुक्रवार को ओवल ऑफिस में घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि H-1B Visa के लिए अब सालाना शुल्क $100,000 (लगभग 83 लाख रुपये) कर दिया गया है। इस फैसले से अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
माइक्रोसॉफ्ट और जेपी मॉर्गन ने कर्मचारियों को दी एडवाइजरी
ट्रंप के इस एलान के बाद, कई अमेरिकी कंपनियों ने अपने H-1B Visa और H-4 वीजा धारक कर्मचारियों को त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने एक आंतरिक ईमेल के जरिए अपने वीजा धारक कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे जल्द से जल्द अमेरिका लौट आएं। ईमेल में साफ तौर पर कहा गया है कि “हम कड़े तौर पर सलाह देते हैं कि आप कल ही अमेरिका में वापसी सुनिश्चित करें।”
इसी तरह, जेपी मॉर्गन के इमिग्रेशन काउंसल ने भी वीजा धारकों को अमेरिका में ही रहने और अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचने की सलाह दी है, जब तक कि सरकार की ओर से कोई नई दिशा-निर्देश न जारी हो।
भारतीयों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2023 के बीच स्वीकृत एच-1बी वीजा में 73.7% भारतीय नागरिकों को जारी किए गए थे। दूसरे नंबर पर चीन (16%), फिर कनाडा (3%), ताइवान और दक्षिण कोरिया (1.3%), और नेपाल, ब्राजील, पाकिस्तान व फिलीपींस (0.8%) शामिल हैं।
व्हाइट हाउस का तर्क: वीजा का दुरुपयोग रोकना है मकसद
व्हाइट हाउस स्टाफ सचिव विल शार्फ ने कहा कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम “सबसे अधिक दुरुपयोग की जाने वाली प्रणाली” बन गई है। उन्होंने कहा, “हमारे देश को बेहतरीन, अत्यधिक कुशल कामगारों की जरूरत है, और नया शुल्क यह सुनिश्चित करेगा कि केवल टॉप टैलेंट को ही प्रवेश मिले।”
ओवल ऑफिस से ट्रंप का बयान?
ट्रंप ने कहा, “हम निचले चतुर्थक को भर्ती करना बंद करेंगे। अब केवल वही लोग अमेरिका आएंगे जो अमेरिकी श्रमिकों से नौकरियां नहीं छीनेंगे, बल्कि नए रोजगार सृजित करेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह नया वीजा शुल्क सरकारी राजस्व बढ़ाने, करों में कटौती और राष्ट्रीय कर्ज चुकाने में मदद करेगा। प्रशासन का दावा है कि इससे अमेरिका को 100 अरब डॉलर से अधिक की राशि मिलेगी।
उद्योग जगत में गहराई चिंता
इस फैसले से अमेरिका में काम कर रही भारतीय आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स, और तकनीकी पेशेवरों में गहरी चिंता फैल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वैश्विक प्रतिभा के अमेरिका आने में बाधा बन सकता है, जिससे टेक्नोलॉजी सेक्टर की प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा।
बता दें कि, एच-1बी वीजा शुल्क में इस अभूतपूर्व बढ़ोतरी ने न सिर्फ भारतीय पेशेवरों और कंपनियों को झटका दिया है, बल्कि यह अमेरिका की आव्रजन नीति और वैश्विक प्रतिभा की भूमिका पर भी गंभीर बहस छेड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन इस नीति को लागू करने में कितनी तेजी लाता है और उद्योग जगत इसके मुकाबले में क्या रणनीति अपनाता है।

