जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में पहुंचे, जहाँ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा से मुलाकात की। बातचीत के दौरान दोनों नेता हंसते दिखे, जिसने बैठक के माहौल को सकारात्मक बनाया।
ट्रंप और पुतिन सम्मेलन से दूर रहे
दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की इस बैठक से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हिस्सा नहीं लिया। ट्रंप द्वारा दक्षिण अफ्रीका पर ‘एंटी-व्हाइट’ नीतियों का आरोप लगाने के बाद अमेरिका ने सम्मेलन का बहिष्कार किया, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया। इसके बावजूद बैठक अपने एजेंडे के साथ आगे बढ़ती रही।
कौन-कौन से मुद्दों पर होगी चर्चा?
दक्षिण अफ्रीका इस सम्मेलन में विशेष रूप से निम्न मुद्दों पर सहमति की उम्मीद कर रहा है— जलवायु आपदाओं से जूझ रहे गरीब देशों के लिए वित्तीय सहायता, विदेशी कर्ज से राहत, हरित ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, विकासशील देशों की आवाज को मजबूत बनाना। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने विकसित देशों के सामने इन मुद्दों को स्पष्ट और मजबूती से रखा है।
ट्रंप की अनुपस्थिति पर फ्रांस का बयान
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप की गैरमौजूदगी पर अफसोस व्यक्त किया, लेकिन कहा कि “इतने बड़े वैश्विक संकटों के बीच काम रुकना नहीं चाहिए। दुनिया को समाधान चाहिए।” G20 में 19 देश, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ शामिल हैं, जो मिलकर दुनिया की 85% अर्थव्यवस्था और लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
घोषणापत्र पर मतभेद, सहमति बड़ी चुनौती
G20 आमतौर पर सर्वसम्मति से फैसले करता है। जोहान्सबर्ग में आयोजित शिखर सम्मेलन में यह सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। दक्षिण अफ्रीका ने आरोप लगाया कि अमेरिका मेजबान देश पर दबाव डाल रहा है कि— अंतिम घोषणा को कमजोर किया जाए या इसे सिर्फ मेजबान देश का बयान घोषित किया जाए। राष्ट्रपति रामाफोसा ने स्पष्ट कहा कि दक्षिण अफ्रीका किसी दबाव में नहीं आएगा और अंतिम घोषणा सभी सदस्यों की सहमति से ही जारी की जाएगी।
अगली अध्यक्षता अमेरिका के पास
सम्मेलन समाप्त होने के बाद G20 की घुमंतू अध्यक्षता दक्षिण अफ्रीका से अमेरिका के पास चली जाएगी। लेकिन ट्रंप प्रशासन पहले ही— जलवायु परिवर्तन, वैश्विक असमानता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने से पीछे हट चुका है। इस कारण अगले वर्ष G20 के रुख में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि अमेरिका केवल एक दूतावास अधिकारी को अध्यक्षता हस्तांतरण समारोह में भेजेगा। दक्षिण अफ्रीका ने इस कदम को अपमानजनक बताया।
पहले अफ्रीकी G20 सम्मेलन से बड़ी उम्मीदें
राजनीतिक तनावों और मतभेदों के बीच दक्षिण अफ्रीका कोशिश कर रहा है कि पहला अफ्रीकी G20 सम्मेलन दुनिया के गरीब व विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक मोड़ साबित हो। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सदस्य देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हो पाएँगे या नहीं।

