Saturday, May 2, 2026
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SC का सख्त आदेश, समय रैना को दिव्यांगों के लिए स्पेशल शो आयोजित करने का निर्देश

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। दिव्यांग व्यक्तियों का मज़ाक उड़ाने से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना और अन्य कंटेंट क्रिएटर्स को विशेष निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान आदेश दिया कि समय रैना सहित पांचों कॉमेडियन्स दिव्यांग लोगों के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करें।

कोर्ट ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों की उपलब्धियों, प्रतिभा और संघर्षों को सामने लाना होना चाहिए — ताकि उन्हें सम्मान और गरिमा मिल सके।

क्या है मामला?

कॉमेडियन समय रैना पर आरोप है कि उन्होंने अपने एक शो के दौरान स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (SMA) से पीड़ित लोगों पर टिप्पणी करते हुए चुटकुला सुनाया था। इस टिप्पणी को अपमानजनक और असंवेदनशील बताते हुए क्यूर SMA इंडिया फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

SMA एक अनुवांशिक विकार है, जिसमें मांसपेशियाँ धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं और उनका क्षय होने लगता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसी टिप्पणियाँ न केवल बच्चों और मरीजों की गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि उनके इलाज और सहायता के लिए होने वाली क्राउडफंडिंग को भी प्रभावित करती हैं।

कौन-कौन कॉमेडियंस शामिल?

सुप्रीम कोर्ट ने जिन कॉमेडियन्स को यह कार्यक्रम आयोजित करने का आदेश दिया है, वे हैं—समय रैना, विपुल गोयल, बलराज, परमारजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर, आदित्य देसाई, निशांत जगदीप तंवर।

याचिकाकर्ता का पक्ष

फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि रैना की टिप्पणी ने SMA से पीड़ित बच्चों का उपहास किया है। उन्होंने कहा, ये बच्चे बेहद प्रतिभाशाली और निपुण हैं। जब बड़े मंचों पर ऐसी बातें कही जाती हैं, तो समाज में उनके प्रति गलत धारणा पैदा होती है और क्राउडफंडिंग जैसी मदद भी कम हो जाती है।

कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ,दिव्यांग व्यक्तियों को आपका पैसा नहीं, गरिमा और सम्मान चाहिए। अपने मंच का इस्तेमाल उनकी उपलब्धियों को उजागर करने के लिए करें। अन्य कंटेंट क्रिएटर्स पर यह निर्भर करता है कि वे दिव्यांग व्यक्तियों को अपने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राज़ी कर पाते हैं या नहीं। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि ये कार्यक्रम सज़ा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा हैं।

अगला कदम

सभी संबंधित कॉमेडियन्स को अदालत के निर्देशों के अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक विशेष शो या कार्यक्रम आयोजित करना होगा। अदालत ने कहा कि इससे न केवल संवेदनशील समुदायों को सम्मान मिलेगा, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी बढ़ेगी।

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