जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों नए कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में चार सदस्य हैं।
इसमें भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन के अनिल घनवट और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और डा प्रमोद जोशी को शामिल किया गया है।
भूपिंदर सिंह मान
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऑल इंडिया किसान को-आर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन हैं। 1990 में राज्यसभा सांसद बने, नॉमिनेटेड थे। किसानों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे हैं।
प्रमोद कुमार जोशी
कृषि अर्थशास्त्री और खाद्य नीति विशेषज्ञ हैं। साउथ एशिया इंटरनेशल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक हैं। भारत सरकार में राइट टू फूड कमेटी के सदस्य रह चुके हैं। कृषि क्षेत्र के प्रशासन में काम करने का लंबा अनुभव है।
अशोक गुलाटी
अशोक गुलाटी कृषि अर्थशास्त्री हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुझाव देने वाली कमेटी CACP के चेयरमैन रह चुके हैं। 2015 में पद्मश्री से सम्मानित किए जा चुके हैं। फिलहाल आईसीआरआईईआर संस्था में इंफोसिस चेयर प्रोफेसर ऑफ एग्रीकल्चर हैं।
अनिल घनवट
किसानों के संगठन शेतकारी संगठन के अध्यक्ष हैं। शेतकारी संगठन किसानों के बीच काम करती है। ये महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। किसानों के बीच काम करने का इनका लंबा अनुभव है।
किसान संगठनों की प्रतिक्रिया
किसान नेताओं ने तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मंगलवार को स्वागत किया, लेकिन कहा कि जब तक कानून वापस नहीं लिए जाते तब तक वे अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त किसी भी कमेटी के समक्ष वे किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं लेकिन इस बारे में औपचारिक निर्णय मोर्चा लेगा।

