- देववाणी संस्कृत को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास
- मुक्ताकाश नाट्य संस्थान की ओर से आयोजित हुआ कार्यक्रम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ व मुक्ताकाश नाट्य संस्थान की ओर से विवि के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में नाटक का मंचन किया गया। जिसमें कलाकारों ने देश की आजादी के लिये की गई क्रांति और संस्कृत भाषा को दर्शाया। इस मौके पर कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।
इस मौके पर उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ के अध्यक्ष डा. वाचस्पति मिश्र ने बताया छात्र-छात्राओं को एक महीने तक संस्कृत भाषा, थिएटर और भारतीय रंगमंच के प्रारंभिक और मूलभूत नियमों से अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि संस्कृत रंगमंच का उद्ेश्य देववाणी संस्कृत को जन जन तक पहुंचाना है। इसके उपरांत बच्चों ने नाटक मंचन किया जो अकबर काल से शुरू हुआ।
नाटक में किंग जेम्स, सर थॉमस रो के हिंदुस्तान आने, बेगम नूर जहां से भारत में व्यापार करने की इजाजत आदि का मंचान किया गया। कलाकारों ने रानी लक्ष्मीबाई के किरदार को जीवंत कर दिया। नाटक का मंचन इस प्रकार हो रहा था मानों सब हमारी आंखों के सामने चल रहा हो। कलाकारों ने सन 1857 की क्रांति को दर्शाया।
अंत में देश पर मर मिटने वाली महान आत्माओं को नमन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विवि कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने की। नाटक का निर्दशन सुरेंद्र दत्त व आकाश दीप ने किया। इस मौके पर डा. इंशेंद्र कुमार, भरत कुमार, अरुण, सनी, सत्यव्रत, मोहित, वीनित, अंकुर, विनय, दिलीप, देवेन्द्र, अभिषेक, ईशा, शिवानी, कीर्तिका, माही शर्मा आदि रहे। मुख्य संयोजक कमल दत्त शर्मा रहे।

