Wednesday, March 4, 2026
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बजट को लेकर काफी उत्सुक दिखे नगर के लोग

  • दुकानों पर खड़े हो कर देखा बजट और चर्चा की

जनवाणी संवाददाता |

नजीबाबाद: नगर मे बजट को लेकर आम आदमी मे काफी उत्सुकता दिखाई दी। राह चलते लोगो ने सड़क पर रूककर या दुकानो के अंदर खड़े हो कर बजट को सुना। लोगो ने बजट पर चर्चा भी की। नगर मे बजट को लेकर आपस मे काफी चर्चा करते देखे गए।

सोमवार को दोपहर बाद रेलवे स्टेशन पर बाजार मे दुकानों में कई लोग बजट देखने को काफी उत्साहित नजर आए। बजट मे आय कर की सीमा बढ़ने की जब घोषणा नहीं की गई तो टैक्स स्लैब नहीं बढ़ने पर लोगों में निराशा के भाव उत्पन्न हो गए। कुछ लोगो ने बजट की सराहना की तो कछ लोगो ने बजट को सामान्य बताया।

बजट में इंफ्रा स्टार्ट अप में टैक्स से एक साल की छूट मिलने पर युवाओं में नौकरी के कुछ अवसर दिखने पर राहत देखी गई। वहीं लघु उद्योग के लिए प्रावधान नहीं होने, बिजली की दरो में कमी नहीं होने, बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगने के प्रावधान से भी लोग आशंकित दिखे।

जबकि व्यापारी नेता संजीव अग्रवाल व इंद्राणी गोयल का कहना था कि इस बजट मे सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है,इसमे स्वास्थ्य के लिये धनराशि का आवंटन करतें हुए 137% की वृध्दि की गयी,वहीं सड़को का जाल बिछाने और हाईवे के निर्माण कोभी ध्यान में रखा गया है।

वहीं सरकारी बैंकों को घाटे से उबरने को 20000 करोड़ रुपए दिये गये। रेलवे की गुणवत्ता बढाने को 1.10 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान देश को विकास के लिए बनाया गया बजट है। किसानों को लागत का डेढ गुना मूल्य ,100 नये सैनिक स्कूल सहित अनेक शिक्षा सुधार, बिना कोई नया कर लगाए भी यह बजट आत्मनिर्भर तथा नये कल्याणकारी भारत की और कदम बढाता एक सरहनीय बजट है।

जिसमे सभी वर्गो के कल्याण का भाव है इसलिए स्वागत योग्य है। वहीं इस बार भी बजट में कुलियों को नजर अंदाज किया गया। लाक डाउन के बाद से नजीबाबाद में रेलवे स्टेशन से कुली अब लगभग ट्रेन बंद होने के चलते लगभग पलायन कर चुके हैं।

नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पर अब से लगभग डेढ दशक पूर्व 66 कुली का स्टाफ काम कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था परंतु समय के साथ साथ सरकार की अनदेखी के कारण नगर के रेलवे स्टेशन पर मात्र 11 कुली रह गए थे। बता दे कि कुलियों को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल मे गैंगमैन के पद पर समायोजित करने का काम शुरू किया था।

जिसमे उस समय नजीबाबाद के मात्र 22 कुली ही गैंगमैन के पद पर समायोजित हो सके और शेष को उनके भाग्य के भरोसे छोड़ दिया गया था। जिसमे उस समय काफी कुली तो अन्य जगह चले गए परंतु जो रह गए थे उनमे अब मात्र 11 कुली ही इस काम से भरण पोषण कर रहे थे परंतु लाकडाउन के बाद वे भी लगभग पलायन कर चुके हैं।

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