- 30 करोड़ की लागत से आधुनिक कमेला संचालित होने की दी गई थी जानकारी
- सीएम के आईजीआरएस पोर्टल पर कह चुके हैं कमेला न संचालित होने की बात
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आधुनिक कमेले पर हाईकोर्ट में झूठ बोलकर नगर निगम प्रशासन के बडे अफसर फंस गए हैं।इन अफसरों पर हाईकोर्ट द्वारा बड़ी कार्रवाई की आशंका से विधि विशेषज्ञ इनकार नहीं कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इसी के चलते आठ फरवरी को हाईकोर्ट मेंं प्रस्तावित सुनवाई को लेकर प्रशासन व नगर निगम के बडे अफसरों की नींद उड़ी हुई है। यह पूरा ममला पशुओं के अवैध कटान तथा वध के बाद पशुओं के अवशेषों को नाले नालियों में बहाए जाने की वजह से बढ़ रहे प्रदूषण से जुड़ा है।
दो फरवरी को हुई थी सुनवाई
दो फरवरी को हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर हुई सुनवाई में निगम अफसरों ने अपने वकील की मार्फत कहा कि साल 2013 में हापुड़ रोड स्थित निगम द्वारा संचालित पुराना कमेला ध्वस्त कर दिए जाने के बाद 30 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक कमेला स्थापित कर दिया गया है। पशुओं के अवैध कटान की बात को एक सिरे से खारिज कर दिया गया।
सीएम पोर्टल से खुली पोल
नगर निगम अफसरों के हाईकोर्ट में बोले गए झूठ की पोल सीएम के आईजीआरए पोर्टल पर पशु वधशाला को लेकर दिए गए जवाब ने खोल कर रख दी। दरअसल, आईटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना से अवैध कटान की वजह से नाले नालियों के चौक होने तथा प्रदूषण व गंदगी फैलने की शिकायत सीएम पोर्टल पर की थी।
इस शिकायत के उत्तर में सीएम पोर्टल पर निगम अफसरों के जवाब में कमेला न संचालित होने की बात कही गई है। लोकेश खुराना ने बताया कि इसी बात को हाईकोर्ट में आधार बनाया गया है। कोर्ट को निगम अफसरों के झूठ की जानकारी दी गई है।

30 करोड़ मिले मिट्टी में
आधुनिक कमेले के नाम पर 30 करोड़ की रकम खर्च करने का जो दावा निगम प्रशासन के आला अफसरों की ओर से कोर्ट में किया गया है दरअसल वो रकम तो पूरी तरह से मिट्टी में मिल चुकी है। इतनी भारी भरकम रकम खर्च किए जाने के बाद भी निगम प्रशासन का अत्याधुनिक पशु वधशाला को लेकर उदासीनता भरा रवैया ही सारे फसाद की जड़ है। इतनी भारी भरकम रकम खर्च किए जाने के बाद भी निगम अफसर घोसीपुर स्थित वधशाला का संचालन नहीं करा सके। 30 करोड़ का खर्चा करने के बाद वहां बजाय पशुओं के कटान के झाड़ियों को जंगल बन गया है।
डैमेज कंट्रोल में जुटे अफसर
सीएम पोर्टल और हाईकोर्ट में दो अलग-अलग जानकारी देकर गर्दन फंसती देखकर बडेÞ अफसर अब डेमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। दरअसल आठ फरवरी को इस मामले में होने जा रही सुनवाई ने अफसरों की नींद उड़ा कर रख दी है। आईजीआरएस पोर्टल पर अफसरों की ओर से दिए गया गया जवाब उनके गले की फांस बन गया है। इससे होने वाले नुकसान की भरपाई पाई के लिए विधि विशेषज्ञों की राय लेने के बाद भी मामले को लेकर मोर्चा खोलने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट खुराना के सामने भी झोली फैलाई है। नगरायुक्त के कैंप कार्यालय पर बुधवार को उन्हें अफसरों से बातचीत के लिए बुलाया था।
ये कहना है आरटीआई एक्टिविस्ट का
लोकेश खुराना का कहना है कि पशु वधशाला पर निगम अफसरों ने कोर्ट में झूठ बोला है। उनकी ओर से जो कुछ कहा गया है वह सीएम के आईजीआरएस पोर्टल पर दी गई जानकारी के एकदम उलट है। निगम अफसरों की वजह से ही पूरे जनपद में घनी आबादी के बीच पशुओं का अवैध कटान चल रहा है।

