Friday, March 27, 2026
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जिपं अध्यक्ष पद: भाजपा की साख व अन्य दलों की नाक का सवाल ?

सहारनपुर में जिपं अध्यक्ष पद अन्य पिछड़ा वर्ग में शुमार

दमदार प्रत्याशियों पर दांव लगाने को शुरू हो गई माथापच्ची


अवनीन्द्र कमल |

सहारनपुर: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां बढ़ गई लगती हैं। शुक्रवार दूसरे पहर शासन स्तर से जिला पंचायत के आरक्षण की सूची जारी हुई तो सियासी प्याले में मानो तूफान उठ गया। दिलचस्प ये है कि सहारनपुर में जिपं अध्यक्ष पद अन्य पिछड़ा वर्ग में आ गया है, लिहाजा सभी दलों में दमदार उम्मीदवारों को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है।

इस चुनाव को लेकर भाजपा के कारकुन कुछ ज्यादा ही संजीदा हैं। बेचैनी कांग्रेस, रालोद, सपा और बसपा में भी है। फिलहाल, सियासी परिसर के अलावा कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी यह चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण है।

त्रिस्तरीय पंचयात चुनाव को लेकर शासन स्तर से तैयारियां पिछले कई महीनों से चल रही थीं। हालांकि, अभी भी चुनाव की तिथि घोषित नहीं की गई है। लेकिन, मार्च-अप्रैल में चुनाव होना ही है।

फिलहाल, शुक्रवार को आरक्षण सूची जारी कर दी गई। सहारनपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद (अन्य पिछड़ा वर्ग) में शामिल कर लिया गया है। इसको लेकर सभी प्रमुख दलों में माथापच्ची तेज हो गई। सूत्रों का कहना है कि भाजपा एक पूर्व ब्लाक प्रमुख समेत कई और नामों पर विचार कर रही है।

अन्य दलों में भी जिपं अध्यक्ष पद को लेकर पहाड़ा पढ़ा जाने लगा है। हालांकि, यह चुनाव कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी बेहद चुनौतीपूर्ण है। क्योंकि त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अक्सर रंजिशें परवान चढ़ती रही हैं। रंजिश और शिकायतों के मामले लगातार बढ़ते रहे हैं।

हर बार की तरह इस बार भी खून-खराबे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। पश्चिम में हालांकि, अभी गनीमत है लेकिन, पूर्वांचल में पिछले कुछ महीनों में कई प्रधानों और बीडीसी तक की हत्या हो चुकी है।

कुछ महीने पहले पूरब के गाजीपुर जनपद में जिला पंचायत सदस्य की हत्या, महोबा जिले के अकौना में ग्राम प्रधान की हत्या, जौनपुर के सरपतहा के शहीद बाजार में प्रधान की हत्या, आजमगढ़ के नवादा में बीडीसी सदस्य की हत्या और इसी जिले के बांसगांव के प्रधान का कत्ल सरीखी ऐसी घटनाएं हैं जो पंचायत चुनाव के पहले रंजिश का दुष्परिणाम हैं।

सबसे जघन्य घटना अमेठी मेें हुई, जहां कुछ माह पहले प्रधान पति को जिंदा जला दिया गया। जाहिर है कि इस लिहाज से पश्चिम भी काफी संवेदनशील है। ऐसे में कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार के लिए भी परीक्षा की घड़ी है। पुलिस-प्रशासन के लिए तो है ही।

दरअसल, मौजूदा प्रधानों के खिलाफ लगभग हर गांव में लामबंदी शुरू हो गई है। एसएसपी डाक्टर एस चिनप्पा का कहना है कि पुलिस पूरी तरह चौकस है। संवेदनशील गांवों पर नजर रखी जा रही है। उधर, भाजपा के पंचायत चुनाव के प्रदेश प्रभारी विजय बहादुर पाठक का सहारनपुर दौरा जल्द हो सकता है।

मीडिया प्रभारी गौरव गर्ग ने कहा कि भाजपा दमदारी से चुनाव लड़ेगी। पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता पूरी तरह तैयार हैं। उधर, कांग्रेस, सपा समेत अन्य दलों में भी चुनावी खदबदाहट तेज हो गई है।

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