- 13 प्रतिशत बासमती चावल की खपत बढ़ी
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: बासमती के एक्सपोर्ट में इस बार काफी बढ़ोतरी हुई है। 13 प्रतिशत बासमती की खपत बढ़ी है। देश का बासमती विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाता है। इस बार बासमती के एक्सपोर्ट ने अपने नाम कई रिकार्ड कायम किए है। अगर बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो उससे साफ जाहिर हो रहा है कि नौ माह में इस वर्ष 20027 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट हुआ है।
जबकि पिछले वर्ष 17727 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट हुआ था। इस बार बासमती की पैदावार 30.47 लाख टन है। जबकि पिछले वर्ष 23.63 टन थी। यह आंकड़े अप्रैल 2020 से लेकर नवंबर 2020 तक के है। एक्सपोर्ट के बढ़ने का मुख्य कारण इस बार कोविड़ में जहां नॉनवेज से लोगों का मोह भंग हुआ है।
चावल विश्व का मुख्य भोजन होने के कारण इस बार भारत की बासमती को विदेशों में काफी पसंद किया गया है। इस बार कोविड़ के कारण थाइलैंड, चाइना में बासमती की पैदावार में कमी आई है, लेकिन भारत में बासमती की पैदावार ने रिकार्ड कायम किया है।
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम के प्रधान वैज्ञानिक डा. रितेश शर्मा का कहना है कि इस बार बासमती की खपत बढी है। विदेशों में भारत की बासमती को अधिक पसंद किया गया है। कोविड के कारण इस बार नॉनवेज से लोगों का मोहभंग हुआ है। जिसके चलते चावल को ज्यादा पसंद किया गया है। बासमती की डिमांड ज्यादा रही है।
मीट का सेवन करने वालों में आई कमी
भेड़ और बकरी के मीट का सेवन करने वालों में भी इस बार कमी आई है। 5.7 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। जबकि मीट खानों वालों की पांच प्रतिशत की कमी आंकड़ों में देखी गई है। इस बार पॉलेट्री में भी 27 प्रतिशत की कमी एक्सपोर्ट में देखने को मिली है।
हालांकि कोविड़ और बर्ड फ्लू बीमारियों के कारण इसके एक्सपोर्ट में कमी आना देखा जा रहा है। प्रधान वैज्ञानिक डा. रितेश शर्मा का कहना है कि विश्व भर में मांसाहार खाने में कोविड़ को देखते हुए लोगों ने इस समय कम रुचि रखी है। शाकाहार को ज्यादा पसंद किया गया है। जिसके चलते इनमें कमी आई है।

