- वैक्सीनेशन कोरोना संक्रमण पर लगाम की गारंटी नहीं, ज्यादा वैक्सीनेशन से ही रोक संभव
- युवा, बच्चों को वैक्सीनेशन में देरी बन सकती है कोरोना विस्फोट का कारण
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लापरवाही पुलिस प्रशासन या फिर स्वास्थ्य विभाग अथवा सिस्टम को चलाने वालों के स्तर पर की जाए या फिर आम पब्लिक के स्तर पर, लेकिन यह सच है कि इसी लापरवाही ने कोरोना रिटर्न के हालात पैदा किए हैं। कोरोना रिटर्न के हालात से ज्यादा कोरोना के सेकेंड वेव कहा जा रहा है।
चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो जिस सेकेंड वेव की आशंका जतायी जा रही है, उसकी मारक क्षमता पहले से कहीं ज्यादा है। सेकेंड वेव की बात सरकार के स्तर पर भी स्वीकार की गयी है। इसके बाद कम से कम इतना तो साफ हो गया है कि कोरोना अभी कहीं गया नहीं है। कोरोना हमारी सोसाइटी के बीच ही मौजूद है। सबसे ज्यादा घातक इस जानलेवा वायरस का लगातार मुटेशन कर धोखा देना है।
वैक्सीन क्लीनचिट नहीं
कोरोना संक्रमण से बचाव की वैक्सीन को चिकित्सा विशेषज्ञ संक्रमण की रोकथाम के लिए क्लीनचिट नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि वैक्सीन से सिर्फ वो शख्स सुरक्षित है जिसने वैक्सीन ली है, लेकिन उसके जिस्म में मौजूद वायरस ऐसा नहीं कि दूसरे को शिफ्ट नहीं होंगे। वैक्सीनेशन के बाद भी कोई भी वायरस का कॅरियर बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि परिवार में सभी को वैक्सीन दी जाए।
दोनों डोज के बाद भी संक्रमित
इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वैक्सीन के दोनों डोज के बाद भी संक्रमण शरीर पर असर नहीं करेगा। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें दोनों डोज लिए जाने के बाद भी जब सैंपल टेस्ट कराया तो रिपोट पॉजिटिव आयी। चिकित्सकों का कहना है कि कई बार इंसान के जिस्म में उतनी एंटी बॉडी नहीं बन पाती जो वायरस के पार्टिकल को डेमज कर सके या उन्हें पनपने से रोक सके। इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन के बाद भी मास्क का प्रयोग व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए।
वैक्सीनेशन से वायरस तेज
फिलहाल वैक्सीनेशन की जो स्पीड दिखाई देती है, विशेषज्ञ नए वायरस को उससे काफी तेज मानकर चल रहे हैं। दरअसल पिछले एक सप्ताह के दौरान संक्रमित केसों के जो नंबर आ रहे हैं वो काफी डराने व चौंकाने वाले हैं। औसतन प्रतिदिन 25 हजार का नेशनल रेट चल रहा है।
आईएमए के यूपी प्रेसीडेंट डा. महेश बंसल ने बच्चों और युवाओं में वैक्सीनेशन में की जा रही देरी को बेहद खतरनाक बताया है। उनका कहना है कि यह धारणा एकदम गलत है कि पहले बड़ों को वैक्सीन दी जाए। जबकि होना चाहिए कि वैक्सीनेशन को बढ़ाकर पूरी सोसाइटी को इससे कवर करना होगा। वायरस अभी भी सोसाइटी में मौजूद है।
लापरवाही से लौटा वायरस
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के यूपी प्रेसीडेंट डा. महेश बंसल का कहना है कि वायरस की सेकेंड वेव के लिए सिर्फ लापरवाही जिम्मेदार है। वैक्सीनेशन की जो स्पीड होनी चाहिए वो नजर नहीं आती। एलएलआरएम मेडिकल के प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि वायरस के रिटर्न के खतरे के देखते हुए सभी तैयारियां पूरी की गयी है। सीएमओ डा. अखिलेश मोहन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग तो अपनी ओर से बेहतर प्रयास कर रहा है, लेकिन वायरस से तभी निपटा जा सकात है जब सोसाइटी यानि आम आदमी जागरूक हो।
कोरोना संक्रमण के 13 नए केस
कोरोना संक्रमण थमता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को संक्रमण के 13 नए केस मिले हैं। वहीं, दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की ओर सिटी स्टेशन पर चलाए गए अभियान में यहां उतरे वाले यात्रियों खासतौर से महाराष्ट्र से जो यात्री आ रहे हैं उनके सैंपल लेकर जांच को भेजे गए।
इनमें 85 एंटीजन व 14 सैंपल आरटीपीसीआर के लिए गए हैं। इसके अलावा महानगर में अलग-अलग स्थानों पर ई-रिक्शा व आटो चालकों के सभी सैंपल लिए गए हैं। कुल 1708 सैंपल में से एक भी संक्रमित नहीं पाया गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के नियमित अभियान में शनिवार को 4221 के सैंपल लेकर टेस्ट के लिए भेजे गए हैं। जिनमें से 13 सैंपल संक्रमित पाए गए हैं।
1367 सैंपल की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। मेरठ में अब संक्रमण का आंकड़ा 21500 जा पहुंचा है। जिन इलाकों में संक्रमित पाए गए हैं। उनमें इंद्रा नगर ब्रह्मपुरी विश्न चौक, हनी गोल्फ, चंद्र लोक लल्लापुरा, शंभु नगर बागपत रोड यहां दो केस पाए गए हैं। मंगल पांडे नगर में भी दो केस मिले हैं। कल्याण नगर, पचपेड़ा, पल्स रेजीडेंशियल, शाहपीर गेट कोतवाली आदि भी शामिल हैं।

