Sunday, May 10, 2026
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राजौरी में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुआ मेरठ का लाल

  • परिवार में छाया मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, आज सुबह पहुंचेगा पार्थिव शरीर

जनवाणी संवाददाता

गंगानगर: जम्मू कश्मीर के राजौरी में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में मेरठ के सूबेदार राम सिंह गुरुवार सुबह गोली लगने से शहीद हो गए। वह 48 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे और उसी क्षेत्र में बुधवार देर रात से आतंकियों के खिलाफ आपरेशन चल रहा था।

सुबह तक चले आपरेशन में दो आतंकियों को मार गिराया गया था। एक तीसरे आतंकी के संदेह में सर्च आपरेशन चलाया जा रहा था। उसी दौरान घात लगाकर आतंकी ने फायर झोंक दिया। जिसकी चपेट में सूबेदार राम सिंह आ गए और बुरी तरह जख्मी हो गए, जिससे उनकी मौत हो गई।

शहीद सूबेदार राम सिंह (45) का पार्थिव शरीर अभी उधमपुर में रखा गया है। शुक्रवार सुबह पार्थिव शरीर के मेरठ लाये जाने की जानकारी दी गई है। सेना के 16 गढ़वाल में शामिल हुए सूबेदार राम सिंह मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले थे। लंबे समय से मेरठ में परिवार के साथ रह रहे थे।

पौने दो साल से वह राष्ट्रीय राइफल के साथ कार्यरत थे और फरवरी 2022 में वह 30 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे। 16 गढ़वाल में उनके वरिष्ठ साथी रहे सेवानिवृत्त कैप्टन वीर सिंह रावत ने बताया कि शहीद सूबेदार राम सिंह के आतंकी मुठभेड़ में शहीद होने की जानकारी उन्हें बटालियन की ओर से दोपहर करीब एक बजे मिली थी।

इसके बाद उन्होंने परिवार को भी इसकी जानकारी दी व अन्य मदद के लिए साथियों संग घर पहुंचे। सूबेदार राम सिंह गंगानगर के इशापुरम में रह रहे थे।

दो दिन पहले ही पत्नी से हुई थी बात

सूबेदार राम सिंह की 17 अगस्त को पत्नी से आखरी बार मोबाइल पर बात हुई थी। जिसमें सूबेदार राम सिंह ने अपनी पत्नी अनीता को कहा था कि मैं ठीक हूं, घर पर बेटे और बेटियों का ख्याल रखना, लेकिन पत्नी अनीता को नहीं पता था कि यह आखिरी बार बात हो रही हैं। गुरुवार को जब पति के शहीद होने की सूचना मिली तो पत्नी अनीता बेहोश हो गईं।

पति की शहादत पर अनीता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार में पत्नी अनीता के अलावा 20 वर्षीय बेटा सोलेन है, जोकि मेरठ कॉलेज से एमकॉम की पढ़ाई कर रहा है। जैसे ही राम सिंह के शहादत की जानकारी लोगों को हुई तो घर में लोगों का आना-जाना शुरु हो गया। हर कोई यह कह रहा था कि रिटायरमेंट के छह माह पहले परिवार को इतना बड़े हादसे का सामना करना पड़ा।

मेरठ में होगा अंतिम संस्कार

आज सुबह शहीद का पार्थिव शरीर मेरठ लाया जाएगा। आवास पर अंतिम दर्शन के बाद सूरजकुंड श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।

चिकित्सकों ने बचाने की पूरी कोशिश की

वहीं चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने के कारण नहीं बचा सके। शहीद सूबेदार राम सिंह का पार्थिव शरीर अभी उधमपुर में रखा गया है। शुक्रवार सुबह पार्थिव शरीर को मेरठ लाए जाने की जानकारी दी गई है।

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सेना के 16 गढ़वाल में शामिल हुए सूबेदार राम सिंह मूलरूप से पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले थे। लंबे समय से मेरठ में परिवार के साथ रह रहे थे। पौने दो साल से वह राष्ट्रीय राइफल के साथ कार्यरत थे और फरवरी 2022 में वह 30 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे।

अंतिम समय में निभाया सैनिक का कर्तव्य 

कसेरूखेड़ा सैनिक कॉलोनी के रहने वाले कैप्टन वीर सिंह रावत व अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि राम सिंह बेहद मिलनसार थे। उनकी बातों में देशभक्ति का जुनून साफ झलकता था। किसी भी परिस्थिति में देश के लिए समर्पित रहने का जज्बा था।

लोगों ने बताया कि सूचना आई कि गोली लगने के बाद भी उन्होंने आतंकी को नहीं छोड़ा। लोग उनकी बहादुरी की चर्चा करते रहे। देर रात भाजपा नेता अजीत सिंह ने घर जाकर परिजनों को सांत्वना दी।

परिवार में मचा कोहराम

कसेरूखेड़ा सैनिक कॉलोनी के रहने वाले कैप्टन वीर सिंह रावत ने बताया कि सूबेदार राम सिंह की चार बेटियां व एक बेटा है। इनमें से दो बेटियों की शादी हो चुकी है। जबकि दो बेटियों की शादी नहीं हुई है। पति के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद से ही पत्नी अनिता भंडारी का रो-रोकर बुरा हाल है।

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सबसे बड़ी बेटियां प्रियंका सिंह और करिश्मा नेगी परिवार को संभालने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, छोटी बेटियां मीनाक्षी भंडारी व मनीषा भंडारी के साथ बेटे सोलन भंडारी मां को संभालने के साथ एक-दूसरे को संभालने में जुटे हैं। पूरे परिवार और क्षेत्र में मातम छाया हुआ है। मौके पर पुलिस भी परिवार का हाल जानने व अन्य व्यवस्था के लिए पहुंची है।

27 जुलाई को छुट्टी काटकर गए थे

परिजनों के बताया कि सूबेदार राम सिंह 27 जुलाई को एक माह की छुट्टी काटकर गए थे। सूबेदार राम सिंह मिलनसार थे, सभी से मिलकर जुलकर रहते थे, लेकिन परिजनों को क्या पता था कि सूबेदार राम सिंह फिर कभी नहीं आएंगे।

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