Sunday, May 10, 2026
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शादियों की धूम, लहंगों, डिजाइनर ड्रेस की खरीदारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आगामी 14 नवंबर को देव उठनी एकादशी पर अबूझ मुहूर्त होने की वजह से शहर में 1600 से अधिक शादियां होने की उम्मीद की जा रही है। शादियों के लिए हलवाई के साथ ही बैंडबाजा आदि लोगों ने पहले की बुक कर लिया है। सहालग की खरीदारी ने बाजार में रौनक ला दी है। बढ़ती महंगाई को छोड़ लोग शादी के लिए कपड़ों और ज्वैलरी की जमकर खरीदारी कर रहे है। दुकानदारों का कहना है कि बाजार में सबसे ज्यादा इस समय ग्रामीण क्षेत्रों की ग्राहकी ज्यादा हो रही है।

बाहर से आएंगे पंडित

पंडित के बिना शादी की शहनाई कैसे गूजेंगी। वैसे तो शहर में पंडितों की कमी नहीं हैं, लेकिन जिन घरों में शादियां है उन लोगों ने एक माह पहले से ही पंडित की बुकिंग कर ली है। वहीं, कुछ लोगों ने बाहर से भी शादी के लिए पंडितों को बुलाया हैं, जिसमें गायत्री परिवार हरिद्वार के पंडित आदि शामिल है।

टेंट व्यापारियों की हो रही बल्ले-बल्ले

14 नवंबर को अबूझ साया होने की वजह से गली-मोहल्लों में व पार्क में भी टेंट लगाए जाएंगे। जिसके लिए टेंट व्यापारियों की भी बल्ले-बल्ले हो चली है। जबकि दो साल से इनका व्यापार ठप पड़ा हुआ था। टेंट व्यवसायी शशिकांत ने बताया कि 14 को लेकर उनके पास 12 से अधिक बुकिंग है।

जहां उनको शामियाने के साथ बर्तन आदि का समान भेजना है। इसके लिए उनको बाहर से भी समान मंगाना पड़ रहा है। अब अचानक कोई कार्यक्रम आता है तो उसके लिए इनकार करना पड़ेगा।

बैंड वालों के है मुंह मांगे दाम

देवउठनी एकादशी के लिए बैंड और घोड़ी वाले मुंह मांगे दाम मांग रहे हैं। शहर में दर्जन भर से अधिक बैंड वाले हैं। जिनके पास 14 की फूल बुकिंग है। अमूमन एक शादी में बैंड के 20 से 25 हजार रुपये हैं, लेकिन अबूझ साया होने की वजह से इनकों दामों में बढ़ोतरी हो गई है। अब एक बुकिंग के 30 से 40 हजार रुपये लिए जा रहे हैं।

मेहंदी रचाने के लिए तीन से पांच हजार की हो रही डिमांड

शादी में दुल्हन और दुल्हे के हाथों में कभी 500 रुपये में मेहंदी लग जाया करती थी, लेकिन अब दुल्हन को मेहंदी लगाने के तीन से पांच हजार रुपये लिए जा रहे हैं। जिसमें डोली वाली मेहंदी की सबसे अधिक डिमांड की जा रही है।

सदर स्थित मेहंदी शॉप के संचालक विनीत ने बताया कि मेहंदी के लिए एडवांस बुकिंग की जा रही है। घर जाकर दुल्हन को मेहंदी लगाने के तीन से पांच हजार रेट चल रहे हैं।

डिजाइनर लहंगे भी है खास

मंजू साड़ी एम्पोरियम के संचालक कमल देव ने बताया कि शादी का सीजन आ चुका हैं, जिसको लेकर डिजाइनर लहंगों के साथ ही सिल्क व जरी की साड़ियों की जमकर खरीदारी की जा रही है। जिसमें बनारसी साड़ी और हेवी बॉडर्र वाली साड़ियों को महिलाएं अधिक पसंद कर रही है, जिनकी कीमत 10 हजार से शुरू होकर 50 हजार रुपये तक है। वहीं, ब्राइड लहंगे की बात करें तो उसमें भी कई तरह की रेंज बाजार में उतारी गई है। 15 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक के लहंगे बाजार में उपलब्ध है।

  • तुलसी विवाह के साथ शुरू होगी सहालग की धूूम
  • देवोत्थान एकादशी से शुरू होगी शादियां 11 दिसंबर तक रहेगी धूम
  • चार माह बाद जागेंगे भगवान विष्णु, देवताओं की होगी दीपावली

 मेरठ : कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी मनाई जाती है। इसे देवउठनी, प्रबोधनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह 14 नवंबर को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु चार माह की नींद के बाद जागते हैं। उनके उठने के साथ ही हिंदू धर्म में शुभ मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं।

14 नवंबर को देवउठनी एकादशी से शादियों का सीजन शुरू होने जा रहा है। चार माह 24 दिन बाद शुरू हो रहे इस सीजन में पहली बार लोगों को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। देव प्रबोधनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप और देवी तुलसी के विवाह की सालगिरह भी मनाई जाती है।

शास्त्रों में बताया गया है कि इस अवसर पर भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप का विवाह तुलसी से कराना बड़ा ही पुण्यदायी होता हैं, जो व्यक्ति तुलसी के साथ शालिग्राम का विवाह करवाता है उनके दांपत्य जीवन में आपसी सद्भाव बना रहता है और मृत्यु के पश्चात उत्तम लोक में स्थान मिलता है।

पौराणिक कहानी

एक समय जलंधर नाम का एक पराक्रमी असुर हुआ। इसका विवाह भगवान विष्णु की परम भक्त वृंदा से हुआ। उसके पतिव्रत धर्म के कारण जलंधर अजेय हो गया था। अपने अजेय होने पर इसे अभिमान हो गया और स्वर्ग की कन्याओं को परेशान करने लगा।

दु:खी होकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए और जलंधर के आतंक को समाप्त करने की प्रार्थना करने लगे। तब विष्णुजी ने माया से जलांधर का रूप धारण किया और छल से वृंदा के पतिव्रत धर्म को नष्ट कर दिया। इससे जलंधर की शक्ति क्षीर्ण हो गई और वह युद्ध में मारा गया।

जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता चला तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर का बन जाने का शाप दे दिया। देवताओं की प्रार्थना पर बाद में वृंदा ने अपना शाप वापस ले लिया।

मगर विष्णु भगवान भी वृंदा के साथ हुए छल के कारण लज्जित थे, इसलिए उन्होंने वृंदा के शाप का मान रखने के लिए अपना एक रूप पत्थर में प्रकट किया, जो शालीग्राम कहलाया। उसका विवाह तुलसी के साथ किया जाता है।

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