- एक मार्च को सुबह तीन बजकर 16 मिनट से दो मार्च को दस बजे तक रहेगी चर्तुदशी
- महाशिवरात्रि के दिन हुआ था शिव भगवान व माता पार्वती का विवाह
मुख्य संवाददाता |
बिजनौर: शिव और शक्ति के मिलन का पर्व महाशिवरात्रि फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ही भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह हुआ था। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव जल्द ही प्रसन्न होने वाले देवता है। ये मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते है।
साल के हर माह मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि में फाल्गुन माह की महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण और मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली शिवरात्रि होती है।
प्रात काल स्नानादि से निवृत होकर घर पर या मंदिर में शिवजी की आराधना करनी चाहिए। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, इत्र, चंदन, भांग, धतूरा, बेलपत्र, रुद्राक्ष और सफेद फूल चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ मनोकामना पूर्ण करते है।
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