Friday, July 19, 2024
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एसिड अटैक से चेहरा ही नहीं जलती है आत्मा भी

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  • एकतरफा प्यार में दूसरे समुदाय के व्यक्ति साबिर ने एसिड अटैक कर पूरी जिंदगी तबाह कर दी
  • एसिड पीड़िता ने कहा कि सरकार एसिड बिक्री पर पूरी तरह से बैन करे जिससे और जिंदगियां बर्बाद न हों

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: किसी को मौत के घाट उतार देने से उसकी पूरी जिंदगी खत्म की जा सकती है, उसका हाथ-पैर काट देने से उसको अपंग किया जा सकता है, लेकिन अगर किसी पर तेजाब डाल दिया जाए तो वह इंसान ना मर पाता है ना ही जी पाता है। तेजाब से बदसूरत हुई जिंदगी को हमारा समाज सर उठाकर जीने की इजाजत भी नहीं देता। तेजाब से सिर्फ चेहरा नहीं, बल्कि इंसान की आत्मा भी जलने लगती है।

तेजाब से बर्बाद जिंदगियां एवं तेजाब से बर्बाद हुई जिंदगियों की कहानी बहुत लंबी और दर्द भरी है। भारत में हर महीने आपको कई ऐसी खबरें सुनने को मिल सकती हैं, जो महिलाओं पर तेजाब फेंकने से संबंधित होती हैं। यह कहानियां भारतीय समाज में महिलाओं के उस दर्दनाक मंजर की कहानी को बयां करती हैं। जिस सूरत में महिलाओं के लिए अपने वजूद को बचा पाना नामुमकिन होता है।

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ऐसी ही मेरठ की एक साहसिक महिला भारती (परविर्तित नाम) की दर्द भरी कहानी है। जिन्होंने अपनी जिंदगी में तमाम सपने देखे थे, लेकिन एक दरिंदे ने तेजाब डालकर उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया। भारती की जिंदगी की दर्दनाक दास्तां सुनकर किसी का भी दिल झकझोर देगी। भारती ने बताया कि उनका हंसता खेलता परिवार था। सभी हंसी खुशी एक छोटे से घर में जिंदगी के प्रत्येक रंग के साथ शानदार तरीके से जीवन बिता रहे थे।

हांलाकि उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन एक दिन एकतरफा प्यार में दूसरे समुदाय के व्यक्ति ने तेजाब उनके चेहरे पर उडेÞलकर उनकी खुशहाल जिंदगी को बदरंग कर दिया। तेजाब डालने के बाद भारती जिंदगी की जद्दोजहद से बुरी तरह हताश हो चुकी हैं। असामाजिक तत्वों के दिए जख्म उसके चेहरे पर तो दिखते ही हैं, साथ ही उसके मन पर भी इनका गहरा असर हुआ है।

29 जून 2005 को घर के समीप एक दूसरे समुदाय के 75 साल के व्यक्ति साबिर ने उनके ऊपर एसिड डाल दिया। दिये गए जख्मों को याद कर भारती ने बताया कि वह व्यक्ति आते-जाते छेड़छाड़ करता था। एक दिन पहले भी उसके साथ छेड़छाड़ की थी। भारती ने बताया कि साबिर जबरदस्ती शादी करना चाहता था, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया।

शादी से इंकार करना उस जालिम को नागवार गुजरा और देखते ही देखते एक दिन एसिड फेंककर उनका चेहरा बिगाड़ दिया। वहीं, शायद भारती इस घाव को भूल भी जाती, लेकिन समाज और सरकार की बेरुखी ने उसे इस कदर तड़पा दिया कि उन्होंने कई बार अपनी जान देने का प्रयास भी किया, लेकिन सही समय पर पहुंचकर उनके पिता ने जान बचा ली। उन्होंने बताया कि इलाज के लिए बस में ट्रैवल करते समय लोग उन्हें ताने मारते थे।

कहते थे देखो यह तो वही लड़की है, जिसके ऊपर तेजाब डला है। इसको तो बहुत सारे पैसे मिले हैं। ये सारे ताने सुनकर भारती का दर्द और भी बढ़ जाता और वह बुरी तरह भी टूट जाती थी। कुछ समय बाद उनके पिता भी उन्हें अकेला छोड़कर इस दुनिया से चल बसे। ऐसी परिस्थितियों में उन्होंने कैसे खुद को संभाला होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि उनकी बहन के ऊपर भी तेजाब की छींटे आई थी। बताया कि उनके पास सिर्फ सरकारी वकील था और उस व्याक्ति साबिर के पास सरकारी वकील के साथ-साथ प्राइवेट तीन वकील भी थे। उनके पास कानूनी लड़ाई लड़ने तक के पैसे नहीं थे। इलाज भी बड़ी मुश्किल से समाज के कुछ लोगों की मदद से करा पाई। भारती ने कहा कि वह सरकार से एसिड पर प्रतिबंध लगाने की मांग करती हैं।

आज भी 20-30 रुपये में तेजाब की बोतल आईडी दिखाकर खरीदा जा सकती है। इस पर पूरी तरह से बैन लगना चाहिए। कहा कि 20 रुपये की बोतल एक लड़की की पूरी जिंदगी तबाह कर देता है। इसकी कल्पना करना उन लोगों के लिए असंभव है, जिनके साथ यह घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सख्त कानून बनना चाहिए, जिससे ऐसे लोग घटना को अंजाम देने से पहले सौ बार सोचें और सजा से उनकी रुह कांप उठे।

तेजाबी हमलों को रोकने के लिए कानून

हालांकि अपने देश में तेजाब हमलों से पीड़ित महिलाओं के अधिकृत आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, पर अखबारों में ऐसी खबरें अकसर पढ़ने को मिलती हैं। ऐसी घटनाओं के बढ़ने के पीछे एक अहम् वजह स्त्री विरोधी हिंसा के इस क्रूर अपराध के खिलाफ अलग से किसी कानून का नहीं होना भी है।

एसिड या तेजाब से हमला होने की सूरत में भारत में कोई सशक्त कानून नहीं है। यूं तो ऐसे अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 329, 322 और 325 के तहत दर्ज होते हैं, लेकिन इसके अलावा पीड़ितों के इलाज, पुनर्वास और काउंसलिंग के लिए भी सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि ऐसे हादसों में पीड़ित को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ती है। इन हादसों का मन-मस्तिष्क पर लंबे समय तक विपरीत प्रभाव बना रहता है।

तेजाबी हमले से नुकसान

तेजाब के हमलों के कुप्रभावों पर हुए अध्ययन यह दर्शाते हैं कि तेजाब पीड़ित इंसान की त्वचा के साथ-साथ भीतर भी असर छोड़ता है। आंखों पर तेजाब पड़ने से आंखों की रोशनी चली जाती है। हड्डियां वक्त से पहले कमजोर पड़ जाती हैं। कई बार सर्जरी कराने से प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है।

तेजाब से जले हुए इंसान का इलाज बहुत महंगा होता है और कई बार सर्जरी कराने के बाद भी पीड़ित का विकृत चेहरा या बदन पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता है। फिर समाज के ताने और मानसिकता के चलते परिजन पीड़ित का पूरा इलाज कराए बिना ही उसे अस्पताल से घर ले आते हैं। समाज में भी ऐसी हिंसा की शिकार युवतियों के प्रति उतनी संवेदनशीलता नजर नहीं आती, जितनी हिंसा की अन्य अभिव्यक्ति के प्रति दिखाई देती है।

अकेली नहीं है भारती

भारती अकेली ऐसी युवती नहीं हैं, जिन्हें एसिड अटैक यानि तेजाबी हमले का शिकार होना पड़ा है। समाज में मनचले अकसर एकतरफा प्यार को खारिज करने के दुस्साहस की सजा महिलाओं के चेहरे या बदन पर तेजाब फेंक कर देते हैं। बेशक ऐसे तेजाबी हमलों से महिलाओं की मौत तो नहीं होती, लेकिन विकृति की वजह से उसकी तमाम जिंदगी मौत से कम नहीं होती। भारती ने कहा कि ऐसे दरिंदे महिला को ऐसी क्रूरतम सजा देते हैं कि पीड़ित जिंदा रहते हुए भी जिंदा नहीं रह पाती। सिर्फ उसका चेहरा ही आत्मा भी जलती हैं।

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