Saturday, April 25, 2026
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सब रजिस्ट्रार करेंगे ‘भूसे के ढेर से सुई’ की तलाश

  • एक वर्ष की अवधि में की गई सभी रजिस्ट्री के ई-स्टांप की स्कैनिंग करके फर्जी मामले पकड़ने की चली मुहिम
  • गाजियाबाद में 10 रुपये के स्टांप में छेड़छाड़ करके 1.10 लाख बनाने का मामला सामने आने के बाद जागा विभाग

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गाजियाबाद के लोनी स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय में चार जुलाई 2023 को 10 रुपये के स्टांप में छेड़छाड़ करके 1.10 लाख का ई-स्टांप की बनाकर जमीन की रजिस्ट्री करने का मामला हाल ही में प्रकाश में आने के बाद एनसीआर क्षेत्र में ऐसे बैनामों की क्यूआर रीडर से छानबीन करने के आदेश जारी किए गए हैं,

जिनमें ई-स्टांप लगाए गए हैं। हालांकि फर्जी मामले पकड़ने के लिए अधिकारियों ने पहले चरण में बड़े बैनामों को देखने के आदेश दिए हैं, लेकिन इस आदेश में छानबीन के दायरे में एक साल की अवधि में हुई हर रजिस्ट्री को रखे जाने के कारण यह काम भूसे के ढेर से सुई तलाश करने जैसा नजर आ रहा है।

दरअसल, गाजियाबाद जिले के लोनी स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय से संबंधित एक बैनामे में 1.10 लाख रुपये के ई-स्टांप लगे हुए दर्शाए गए। जबकि वास्तविक रूप से स्टांप का मूल्य केवल 10 रुपये निकला। जिसमें पाया गया कि लोनी के आलियाबाद में मोहम्मद जाहिद ने बीती चार जुलाई 2023 को 210 हेक्टेयर खेती की जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। स्टांप वेंडर ने 10 रुपये का ई-स्टांप निकाला और उसमें छेड़छाड़ कर 10 रुपये की जगह 1.10 लाख रुपये से अधिक का ई-स्टांप बना दिया।

यह मामला स्टांप पेपर लॉक करने के दौरान अधिकारियों के संज्ञान में बीते सोमवार को आया, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ लोनी के अंकुर विहार थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। बहरहाल इस मामले के सामने आने के बाद अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं। अधिकारियों ने इस प्रकार के कुछ अन्य मामले भी एनसीआर में किए जाने की आशंका से इन्कार नहीं किया है।

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जिसके चलते प्रदेश भर के सब रजिस्ट्रार के लिए एक आदेश जारी किया गया। जिसमें कहा गया कि एक वर्ष की अवधि में की गई ऐसी सभी रजिस्ट्री की क्यूआर रीडर से स्कैनिंग की जाए, जिनमें ई-स्टांप लगाए गए हैं। हालांकि पहले चरण में बड़े बैनामों को लिए जाने के आदेश जारी किए गए हैं।

हर दिन होती हैं एक हजार से अधिक रजिस्ट्री

मेरठ मंडल क्षेत्र की अगर बात की जाए, तो यहां मेरठ में छह, बागपत में तीन, गाजियाबाद में आठ, हापुड़ में चार सब रजिस्ट्रार कार्यालय हैं। एक कार्यालय में प्रतिदिन होने वाली रजिस्ट्री की औसत संख्या 50 या अधिक होती है। इस प्रकार मेरठ मंडल के 21 कार्यालयों में हर दिन एक हजार से अधिक रजिस्ट्री की जाती हैं। महीने में 30 हजार और एक वर्ष में 3.60 लाख के करीब रजिस्ट्री हो जाती हैं। अब मेरठ मंडल के सब रजिस्ट्रार को इन्हीं रजिस्ट्री की स्कैनिंग का काम करके ऐसी रजिस्ट्री का पता लगाना है, जिनमें ई-स्टांप लगाए गए हैं।

ऐसे की गई ई-स्टांप में गड़बड़ी

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार हर वेंडर को अलग-अलग ई-स्टांप नंबर जारी किया जाता है। जांच में पाया गया कि स्टांप वेंडर अफरोज परवीन की लॉग इन आईडी से दूसरे स्टांप वेंडर जयवीर कश्यप को आवंटित ई-स्टांप निकाला गया। जबकि जिस वेंडर को जो ई-स्टांप आवंटित है, वही उसे निकाल सकता है। इस मामले में मोहम्मद जाहिद, स्टांप वेंडर अफरोज परवीन, जयवीर कश्यप, बैनामा लेखक सचिन चौधरी और सचिन देव को आरोपी बनाया गया है।

ई-स्टांप में गड़बड़ी का मामला लोनी गजियाबाद क्षेत्र से संबंधित प्रकाश में आने के बाद आईजी स्टांप के स्तर से एनसीआर के सभी संबंधित अधिकारियों के लिए एक पत्र जारी किया गया है। जिसमें क्यूआर रीडर के माध्यम से ई-स्टांप की स्कैनिंग करके वास्तविक मूल्यों को सत्यापित करने के आदेश जारी किए गए हैं। यह काम लंबे समय तक चलेगा। अभी तक की छानबीन में मेरठ क्षेत्र में कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। -ब्रजचंद सिंह, डीआईजी स्टांप, मेरठ मंडल

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