Wednesday, April 15, 2026
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महंगाई की चोट से हींग ने बिगाड़ा पेट का जायका

  • साधारण हींग प्रति किलो 400 रुपये हो गई महंगी
  • अफगानिस्तान से आता है हींग का कच्चा माल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: खाने में जायका बढ़ाने और पेट को तरोताजा रखने के लिये प्रयोग में आने वाली औषधीय हींग अब लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। जिस तेजी से हींग के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है उसने लोगों को हैरत में डाल दिया है। रिटेल मार्केट में हींग के दाम में प्रति किलो 400 रुपये की वृद्धि हुई है। माना जा रहा है आने वाले समय में हींग के दाम और बढ़ेंगे। दरअसल, हींग बनाने में लगने वाला कच्चा माल अफगानिस्तान और उज्बेकिस्तान से आता है और इस समय आवक कम हो रही है।

कोटला में घनश्याम ट्रैडर्स के वरुण अग्रवाल ने बताया कि हींग के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जो हींग दो माह पहले 80 रुपये की 100 ग्राम आती थी, अब वो 120 रुपये की बिक रही है। इसी तरह एमडीएच की 50 रुपये वाली डिब्बी 90 रुपये में बिक रही है। हींग के दामों में यह वृद्धि एकबारगी में हुई है। बाजार में पचासों तरह की हींग मौजूद है। बड़े ब्रांड वाली हींग के दाम पांच हजार रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।

गुप्ता स्टोर्स के नितिन गुप्ता ने बताया कि हींग कई तरह की आ रही है और उनके दाम भी कंपनी के हिसाब से बढेÞ हैं। सामान्य तौर पर 100 ग्राम हींग के दामों में 40 रुपये तक की वृद्धि हुई है। सड़कों पर बिकने वाली हींग जो हाथरस की कहकर बेची जाती है। उसके दामों में भी 30 रुपये प्रति 100 ग्राम की वृद्धि देखी जा रही है। सब्जी में हींग का उपयोग आम आदमी के बूते से बाहर होता जा रहा है।

इसके भाव महज कुछ ही दिनों में 18 हजार से 22 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। साथ ही हींग महंगी होने से इसकी भी महक कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण विदेशी आयात प्रभावित होना है। वहीं, अफगानिस्तान की हींग गुणवत्ता में सबसे अच्छी होने के कारण खपत ज्यादा है। जिससे इसके दामों में 3000 रुपये प्रति किग्रा की तेजी आई है।

हींग दो प्रकार की होती हैं, एक हींग काबूली दुधिया सफेद हींग और दूसरी हींग लाल। हींग का तीखा व कटु स्वाद है और उसमें सल्फर की मौजूदगी के कारण एक अरुचिकर तीक्ष्ण गंध निकलती है। सफेद व पीली हींग पानी में मिल जाती है। जबकि गहरे व काले रंग की हींग तेल में मिलती है। अपनी तीखी गंध के कारण शुद्ध हींग को पसंद नहीं किया जाता, बल्कि इसे स्टार्च और गोंद मिलाकर संयोजित हींग के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।

भारत में इस्तेमाल होने वाला हींग ईरान, अफगानिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से आता है। कुछ व्यापारी इसे कजाखस्तान से भी मंगवाते हैं। अफगानिस्तान से आने वाले हींग की मांग सबसे ज्यादा है। भारत हर साल 1,200 टन हींग इन देशों से 600 करोड़ रुपये खर्च कर आयात करता है। रूस और यूक्रेन में चल रहे विवाद के कारण यूरेशिया के देशों से हींग का आयात कम हो रहा है। इससे भी दाम बढ़ रहे हैं।

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