नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। महान गीतकार, गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका की आज (8 सितंबर) जयंती है। उनका जन्म 8 सितंबर 1926 को असम के सादिया में हुआ था। वे न सिर्फ असम बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर माने जाते हैं। भूपेन हजारिका ने अपने करियर की शुरुआत असमिया भाषा के गीतों से की और बाद में हिंदी सिनेमा को भी कई अमर गीत दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी जयंती पर उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
आज से शुरू हुआ जन्म शताब्दी समारोह
भूपेन हजारिका का साल भर चलने वाला जन्म शताब्दी समारोह सोमवार से शुरू हो गया। असम सरकार और विभिन्न अन्य संगठन इस महान गायक को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। रविवार को बोबीता शर्मा द्वारा निर्देशित 65 मिनट लंबी डॉक्यूमेंट्री ‘भूपेन दा अनकट’ रिलीज की गई। इसमें भूपेन हजारिका के जीवन के बारे में दिखाया गया है।
कविता का पाठ करने के लिए 50 हजार लोग हुए एकत्र
रविवार को सुबह ‘असोम अबृति अरु संस्कृति परिषद’ की तरफ से भूपेन हजारिका के लिए एक पहल की गई। इसके तहत ‘मृत्यु जिनार गान, एटा गान सेस होल’ कविता का पाठ करने के लिए सुबह 11.31 बजे पूरे राज्य में लगभग 50,000 लोग एकत्र हुए। तेजपुर, जहां हजारिका ने काफी समय बिताया था, में 300 से ज्यादा लोग एक साथ कविता पाठ करने के लिए जमा हुए। राज्य के 32 जिलों में भी ऐसा ही एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की तारीफ
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हजारिका सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सरमा ने कहा ‘हमारे प्रिय भूपेन दा के जन्मशती समारोह की शुरुआत में बस एक दिन बाकी है। उनका जीवन और समय अपने आप में एक मिसाल है। असम और भारत के प्रति उनका प्रेम सभी के लिए प्रेरणादायी है।’
पीएम मोदी ने लिखा नोट
पीएम मोदी ने लिखा ‘आज 8 सितंबर है। यह दिन उन लोगों के लिए बहुत खास है जो भारतीय संस्कृति और संगीत को पसंद करते हैं। यह असम के मेरे भाई और बहनों के लिए खास है। आज डॉ. भूपेन हजारिका की जयंती है। वह भारत की सबसे असाधारण आवाजों में से एक हैं। इस वर्ष उनके जन्म शताब्दी समारोह की शुरुआत हो रही है।’
‘भूपेन दा ने हमें संगीत से कहीं अधिक दिया
पीएम मोदी ने आगे लिखा ‘भूपेन दा ने हमें संगीत से कहीं अधिक दिया। वे केवल एक गायक नहीं थे, वे लोगों की धड़कन थे। कई पीढ़ियां उनके गीत सुनते हुए बड़ी हुईं। उनके गीतों में हमेशा करुणा, सामाजिक न्याय, एकता और गहरी आत्मीयता की गूंज है।’

